सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा और गोपनीयता चिंताओं का हवाला देते हुए केस मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर तक सार्वजनिक पहुंच देने से इनकार किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केस मैनेजमेंट सिस्टम के सॉफ्टवेयर तक सार्वजनिक पहुंच देने से किया इनकार

Team The420
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अपनी केस मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) में उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर तक आम जनता को पहुंच देने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की डिजिटल प्रणाली से जुड़े सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी गंभीर पहलुओं को देखते हुए इस मामले में हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। याचिका में सुप्रीम कोर्ट की केस मैनेजमेंट प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (FOSS) का अध्ययन करने के लिए सार्वजनिक पहुंच उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन भी शामिल थे, ने याचिकाकर्ता सुनील अहल्या की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा और गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में पर्याप्त सुरक्षा उपायों को बनाए रखना आवश्यक है।

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याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को अपनी केस मैनेजमेंट प्रणाली की प्रशासनिक नीति को फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के लाइसेंसिंग ढांचे और संचालन सिद्धांतों के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया जाए। याचिका में तर्क दिया गया था कि एफओएसएस सिद्धांतों पर विकसित सॉफ्टवेयर का अध्ययन और समीक्षा आम लोगों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सामान्य रूप से फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ताओं को उसके सोर्स कोड का अध्ययन, संशोधन और वितरण करने की अनुमति देता है। हालांकि अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रणाली में उपयोग होने वाले सॉफ्टवेयर को कड़े सुरक्षा और गोपनीयता मानकों का भी पालन करना होता है। इसलिए फायरवॉल और अन्य साइबर सुरक्षा उपायों के माध्यम से संवेदनशील डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

पीठ ने कहा कि न्यायिक सूचनाओं की गोपनीयता और अदालत की तकनीकी प्रणाली की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, संवेदनशील संस्थागत प्रणालियों में उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर तक अनियंत्रित सार्वजनिक पहुंच साइबर सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी जोखिम पैदा कर सकती है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के पास न्यायिक संस्थान के कामकाज को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए कोई उपयोगी और रचनात्मक सुझाव हैं, तो उनका हमेशा स्वागत किया जाएगा। अदालत ने कहा कि ऐसे सुझावों पर संबंधित प्राधिकरणों द्वारा उचित रूप से विचार किया जाएगा।

यह फैसला दर्शाता है कि न्यायपालिका तकनीकी पारदर्शिता और महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने को प्राथमिकता दे रही है। याचिका भले ही खारिज कर दी गई हो, लेकिन अदालत ने दोहराया कि न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बनाने वाले सार्थक सुझावों के लिए उसके द्वार खुले रहेंगे।

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