ईरान से जुड़े हैकर समूह ‘हंडाला टीम’ ने ली जिम्मेदारी; कर्मचारियों के डिवाइस अचानक बंद, माइक्रोसॉफ्ट सिस्टम के दुरुपयोग की आशंका

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बड़ा साइबर हमला: अमेरिकी मेडिकल टेक कंपनी का नेटवर्क ठप

Team The420
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वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा साइबर हमला सामने आया है। मिशिगन मुख्यालय वाली अमेरिकी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी स्ट्राइकर के डिजिटल नेटवर्क में आई भारी गड़बड़ी को साइबर हमले से जोड़कर देखा जा रहा है। इस हमले के कारण कंपनी के कई कर्मचारियों के आधिकारिक मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस अचानक काम करना बंद कर गए, जिससे आंतरिक संचार और कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे मौजूदा टकराव के बाद किसी अमेरिकी कंपनी पर ईरान से जुड़े समूह द्वारा किया गया पहला बड़ा साइबर हमला माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि ‘हंडाला टीम’ नामक हैकर समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इससे जुड़े संदेश भी जारी किए हैं।

मिशिगन स्थित स्ट्राइकर कंपनी दुनिया भर में चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य तकनीक से जुड़े उत्पाद बनाती है। कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उसके माइक्रोसॉफ्ट आधारित नेटवर्क वातावरण में साइबर हमले के कारण वैश्विक स्तर पर व्यवधान आया है। हालांकि कंपनी का कहना है कि उसके मुख्य सर्वर या संवेदनशील सिस्टम सीधे तौर पर हैक नहीं किए गए हैं।

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प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि हमलावरों ने कंपनी के माइक्रोसॉफ्ट डिवाइस मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंच हासिल कर ली थी। इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कंपनियां अपने कर्मचारियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिवाइस को दूर से नियंत्रित करने के लिए करती हैं। इसी सुविधा का दुरुपयोग करते हुए कई डिवाइस को दूर से रीसेट या फैक्ट्री सेटिंग पर भेज दिया गया, जिसके कारण कर्मचारियों के फोन और कामकाजी उपकरण अचानक निष्क्रिय हो गए।

कंपनी से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि कई कर्मचारियों के आधिकारिक मोबाइल फोन अचानक बंद हो गए और सहकर्मियों के बीच संवाद पूरी तरह ठप पड़ गया। इससे कंपनी के कई विभागों का काम कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हमलावरों ने संभवतः कंपनी के माइक्रोसॉफ्ट इंट्यून मैनेजमेंट कंसोल तक पहुंच हासिल कर ली थी। यह एक ऐसा सिस्टम है जिसके जरिए किसी भी कॉरपोरेट डिवाइस को दूर से नियंत्रित किया जा सकता है। आम तौर पर इसका उपयोग तब किया जाता है जब कोई डिवाइस खो जाए या चोरी हो जाए और उसमें मौजूद डेटा को सुरक्षित तरीके से मिटाना जरूरी हो।

लेकिन इस मामले में इसी तकनीक का इस्तेमाल हमले के रूप में किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार हमलावरों ने सिस्टम में घुसपैठ कर कई डिवाइस को एक साथ रीसेट करने का आदेश भेज दिया, जिससे कर्मचारियों के उपकरणों का डेटा मिट गया और कामकाज बाधित हो गया।

स्ट्राइकर ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि इस घटना में रैनसमवेयर या पारंपरिक मालवेयर हमले के संकेत नहीं मिले हैं। कंपनी का कहना है कि यह नेटवर्क व्यवधान एक साइबर हमले का परिणाम है, लेकिन स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है और तकनीकी टीमें सिस्टम को सामान्य करने में जुटी हैं।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष अब साइबर दुनिया में भी तेजी से फैल रहा है। पहले भी ईरान से जुड़े हैकर समूहों पर विभिन्न देशों की कंपनियों और संस्थानों को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं।

इतिहास में ईरान से जुड़े हैकरों द्वारा कई चर्चित साइबर हमले किए जाने के आरोप लगे हैं। इनमें 2012 में सऊदी अरब की तेल कंपनी पर हुआ डेटा नष्ट करने वाला हमला और 2014 में अमेरिका के एक बड़े कसीनो नेटवर्क पर हुआ साइबर हमला प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं।

हालिया घटना के बाद साइबर सुरक्षा एजेंसियों और विशेषज्ञों ने अमेरिकी कंपनियों को अपने डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के दौर में कॉरपोरेट नेटवर्क और डिजिटल सिस्टम साइबर हमलों के लिए प्रमुख लक्ष्य बन सकते हैं।

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