सीतामढ़ी। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद शराब तस्कर पुलिस और आबकारी विभाग की जांच से बचने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। सीतामढ़ी में पकड़े गए एक मामले में तस्करी का ऐसा तरीका सामने आया, जिसमें शराब से लदी गाड़ी में एक महिला को घरेलू रिश्तेदार के रूप में बैठाया गया था। पूछताछ में महिला ने बताया कि वह तस्करों की गाड़ियों में सफर करने के बदले रोजाना 10 हजार रुपये दिहाड़ी लेती थी। तस्करों को उम्मीद थी कि गाड़ी में महिला के मौजूद होने पर पुलिस उसे सामान्य पारिवारिक वाहन समझकर कम संदेह करेगी।
मामला उस समय सामने आया जब पुलिस और आबकारी विभाग की टीम ने एक संदिग्ध वाहन को रोककर जांच शुरू की। वाहन में चालक के साथ एक महिला बैठी थी। पूछताछ में चालक ने महिला को अपनी ‘चाची’ बताया और कहा कि वह उसे बेतिया ले जा रहा है। शराब या किसी प्रतिबंधित सामग्री के बारे में सवाल किए जाने पर चालक ने टीम को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि गाड़ी में उसकी चाची बैठी है और उसमें शराब होने का सवाल ही नहीं उठता।
हालांकि, टीम को चालक के जवाब पर संदेह हुआ। इसके बाद वाहन की सघन तलाशी शुरू की गई। गाड़ी के अंदर सामान्य जगहों के साथ-साथ उसके अलग-अलग हिस्सों की जांच की गई। तलाशी के दौरान वाहन में बनाया गया गुप्त तहखाना मिला। इसके अलावा अन्य हिस्सों में भी शराब छिपाकर रखी गई थी। जांच टीम ने वहां से करीब 70 लीटर विदेशी शराब बरामद की।
शराब बरामद होने के बाद वाहन में सवार चालक, महिला और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में महिला ने बताया कि वह शराब तस्करी में सीधे तौर पर शराब ले जाने के बजाय गाड़ी में एक सामान्य घरेलू महिला की भूमिका निभाती थी। इसके लिए उसे हर दिन 10 हजार रुपये दिए जाते थे। वह उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों से शराब लेकर बिहार आने वाली गाड़ियों में बैठती थी।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
जांच में यह भी सामने आया कि महिला को गाड़ी में बैठाने के पीछे तस्करों की एक खास रणनीति थी। उन्हें लगता था कि परिवार की महिला के साथ सफर कर रही गाड़ी पर पुलिसकर्मियों को कम संदेह होगा। पूछताछ के दौरान चालक भी इसी रणनीति के तहत महिला को अपनी ‘चाची’ बताकर टीम को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा था। तस्करों को भरोसा था कि महिला की मौजूदगी को देखकर वाहन की गहन तलाशी नहीं ली जाएगी।
आबकारी और पुलिस टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद शराब कहां से लाई गई थी और इसे सीतामढ़ी में किसके पास पहुंचाया जाना था। साथ ही, उस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। महिला से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वह इससे पहले कितनी बार ऐसी गाड़ियों में सफर कर चुकी है और उसे किसके माध्यम से तस्करी के लिए जोड़ा गया था।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या शराब तस्करी के इस तरीके का इस्तेमाल किसी बड़े नेटवर्क द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के आधार पर दूसरे राज्यों से बिहार तक शराब पहुंचाने वाले रास्तों और संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। बरामद वाहन की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि उसमें गुप्त तहखाना कब और किस उद्देश्य से बनाया गया था।
बिहार में शराबबंदी के बाद दूसरे राज्यों से शराब की अवैध आपूर्ति रोकना पुलिस और आबकारी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। तस्कर वाहनों में गुप्त जगह बनाकर शराब छिपाने के साथ ही जांच से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। सीतामढ़ी का यह मामला बताता है कि अब तस्करी में महिलाओं की सामाजिक पहचान को भी ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सघन जांच के दौरान यह तरीका भी तस्करों को बचा नहीं सका और करीब 70 लीटर विदेशी शराब के साथ तीन लोग गिरफ्त में आ गए।
