नई दिल्ली: Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए भारतीय पूंजी बाजार में प्रवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नियामक ने FPIs को कस्टोडियन के पास digitally signed Power of Attorney (PoA) जमा करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही Information Technology Act, 2000 के अनुरूप डिजिटल सिग्नेचर से तैयार PoA के लिए नोटरीकरण, एपोस्टिलेशन या कॉन्सुलराइजेशन जैसी भौतिक प्रमाणीकरण प्रक्रियाओं की अनिवार्यता खत्म हो गई है।
नई व्यवस्था 20 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई है। SEBI का यह कदम FPI registration और onboarding प्रक्रिया को अधिक डिजिटल बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होने, कागजी कार्रवाई घटने और भारतीय बाजार में निवेश शुरू करने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
नए प्रावधान के तहत कस्टोडियन अब ऐसे FPI Power of Attorney को स्वीकार कर सकेंगे, जिसमें संबंधित पता दर्ज हो और जिसे Information Technology Act, 2000 के प्रावधानों के अनुरूप डिजिटल सिग्नेचर के जरिए निष्पादित किया गया हो। यानी पात्र डिजिटल PoA को अब पारंपरिक भौतिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया से गुजरना जरूरी नहीं होगा।
इससे पहले FPI Master Circular के तहत पते का उल्लेख करने वाली Power of Attorney को विधिवत notarised और आवश्यकता के अनुसार apostilled या consularised कराना जरूरी था। अलग-अलग देशों में दस्तावेज तैयार कराने और प्रमाणित कराने की प्रक्रिया के कारण विदेशी निवेशकों के लिए onboarding में अतिरिक्त समय और प्रशासनिक जटिलताएं पैदा हो सकती थीं।
SEBI ने अब FPIs को दो विकल्प उपलब्ध कराए हैं। निवेशक पहले की तरह विधिवत notarised, apostilled या consularised PoA जमा कर सकते हैं। इसके अलावा वे Information Technology Act की आवश्यकताओं के अनुरूप digitally signed PoA भी जमा कर सकेंगे। इससे विदेशी निवेशकों को अपनी सुविधा के अनुसार दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
नियामक के अनुसार, पात्र digitally signed PoA स्वीकार किए जाने की स्थिति में notarisation, apostillisation या consularisation की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इससे FPI onboarding से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने में लगने वाला समय कम हो सकता है और कस्टोडियन तथा अन्य संबंधित मध्यस्थों के लिए दस्तावेजों की प्रोसेसिंग अधिक सुगम हो सकती है।
यह बदलाव SEBI के पहले से जारी digitalisation प्रयासों को भी आगे बढ़ाता है। नियामक ने FPI registration के लिए Common Application Form (CAF) की व्यवस्था शुरू की है। इसके जरिए FPI registration के साथ PAN, bank account और demat account से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी सुव्यवस्थित किया गया है। SEBI ने CAF और अन्य registration documents को निष्पादित करने के लिए Indian digital signatures के इस्तेमाल की भी अनुमति दी है।
CAF portal में digital signature की सुविधा उपलब्ध कराने और scanned copies के आधार पर registration की प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। अब digitally signed PoA को स्वीकार करने का निर्णय इसी digital onboarding framework की अगली कड़ी है। इससे विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में entry से जुड़ी physical paperwork पर निर्भरता और कम हो सकती है।
नई व्यवस्था FPIs के अलावा Designated Depository Participants (DDPs) और custodians पर भी लागू होगी। इसके दायरे में registrars to an issue and share transfer agents, depositories, recognised stock exchanges, clearing corporations और SEBI-registered intermediaries भी शामिल हैं।
SEBI का यह circular 20 अगस्त 2026 से प्रभावी है। नियामक ने इसे Securities and Exchange Board of India Act, 1992 की Section 11(1) और SEBI (Foreign Portfolio Investors) Regulations, 2019 के Regulation 44 के तहत जारी किया है।
विदेशी निवेशकों के लिए यह बदलाव भारतीय पूंजी बाजार में प्रवेश की एक अहम दस्तावेजी प्रक्रिया को अधिक सरल और डिजिटल बना सकता है। Digital signatures को मान्यता देकर SEBI ने FPI onboarding में एक और महत्वपूर्ण चरण को physical authentication से electronic documentation की ओर बढ़ाया है। इससे प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ भारत में विदेशी निवेश को लेकर ease of doing business को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
