मुजफ्फरपुर। डाक विभाग के उत्तरी डाक परिमंडल में नए बचत खाते खोलने की प्रतियोगिता को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि देशभर में चैंपियन बनने के लिए विभागीय स्तर पर नियमों की अनदेखी करते हुए एक ही व्यक्ति के नाम पर हजारों खाते खोले गए। दावा है कि इन खातों में बड़ी संख्या ऐसे खातों की थी, जिन्हें महज ₹100 की शुरुआती राशि से खोला गया और प्रतियोगिता समाप्त होने के कुछ समय बाद बंद कर दिया गया। मामले में नार्थ बिहार फिलाटेलिस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष और आरटीआई कार्यकर्ता आचार्य चंद्रकिशोर पाराशर ने प्रधानमंत्री कार्यालय, संबंधित केंद्रीय मंत्री और विभागीय अधिकारियों को शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पाराशर के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में डाकघर बचत योजनाओं के विस्तार और लोगों को नए खाते खोलने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से डाक विभाग ने देश, राज्य और डाक प्रमंडल स्तर पर प्रतियोगिता शुरू की थी। इसमें उत्तरी डाक परिमंडल के सभी नौ डाक प्रमंडलों के डाकघरों को शामिल किया गया था। प्रतियोगिता कई चरणों में आयोजित की गई और शुरुआती चरण में उत्तरी डाक परिमंडल की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बताई गई।
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आरोप है कि प्रतियोगिता में प्रदर्शन सुधारने के लिए पीएमजी कार्यालय के स्तर से डाकपालों पर एक ही व्यक्ति के नाम पर छोटी राशि के कई खाते खोलने का दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसके बाद नए खातों की संख्या तेजी से बढ़ी और उत्तरी डाक परिमंडल प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान तक पहुंच गया। उन्होंने इस प्रक्रिया को अनैतिक और संभावित वित्तीय अनियमितता बताया है।
70 प्रतिशत खाते दो महीने में बंद होने का दावा
शिकायत में दावा किया गया है कि प्रतियोगिता के दौरान खोले गए करीब 70 प्रतिशत खाते दो महीने के भीतर ही बंद हो गए। इससे इन खातों को खोलने के उद्देश्य और उनकी वास्तविक उपयोगिता पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नए खाते खोलने के लिए डाक विभाग ने बड़ी संख्या में एजेंटों को कमीशन का भुगतान किया, लेकिन खातों के जल्द बंद होने के कारण विभाग को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में विभिन्न डाकघरों के आंकड़ों का उदाहरण दिया है। उनके अनुसार, मोतिहारी प्रमंडल के सुगौली डाकघर में कुल 23,881 खाते खोले गए। इनमें से 22,242 खाते ₹100-₹100 की राशि से केवल 93 लोगों के नाम पर खोले जाने का दावा किया गया है। शिकायत के मुताबिक, ये खाते दूसरे महीने से ही बंद होने लगे।
लहेरियासराय में 36 लोगों के नाम पर 24,300 खाते
दरभंगा प्रमंडल के लहेरियासराय प्रधान डाकघर के आंकड़ों को भी शिकायत में शामिल किया गया है। दावा है कि यहां कुल 26,383 आरडी खाते खोले गए, जिनमें 24,300 खाते केवल 36 लोगों के नाम पर थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन खातों में भी ₹100-₹100 की शुरुआती राशि जमा की गई थी और तीन महीने के भीतर बड़ी संख्या में खाते बंद कर दिए गए।
इन आंकड़ों के आधार पर शिकायतकर्ता ने प्रतियोगिता में नए खातों की संख्या बढ़ाने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि एक ही व्यक्ति के नाम पर असामान्य संख्या में खाते खोले गए और फिर उन्हें जल्दी बंद कर दिया गया, तो यह केवल रिकॉर्ड बढ़ाने की प्रक्रिया नहीं बल्कि विभागीय संसाधनों और एजेंट कमीशन के इस्तेमाल से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक मामला हो सकता है।
पीएमजी ने कहा, शिकायत मिली तो होगी जांच
उत्तरी डाक परिमंडल के पीएमजी पवन कुमार सिंह ने कहा कि डाक विभाग पिछले कुछ समय से अपने प्रदर्शन में सुधार के लिए प्रयास कर रहा है और देशभर में अच्छा काम किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग के भीतर और बाहर कुछ लोग विभाग की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस संबंध में शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
अब शिकायत के आधार पर यह स्पष्ट होना बाकी है कि विभिन्न डाकघरों में एक ही व्यक्ति के नाम पर कितने खाते खोले गए, उनमें से कितने निर्धारित अवधि में बंद हुए और खातों को खोलने की प्रक्रिया में विभागीय नियमों का पालन हुआ या नहीं। जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि प्रतियोगिता में रिकॉर्ड बनाने के लिए वास्तव में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।
