नई Closing Auction Session में कथित तौर पर ऊंचे दामों पर बड़े Buy Orders लगाने का आरोप; SEBI ने दो संस्थाओं से ₹3.68 करोड़ की रकम जब्त करने और CAS में भागीदारी पर रोक का आदेश दिया

SEBI की बड़ी कार्रवाई: JPMorgan की Copthall Mauritius पर बाजार में एंट्री बैन, Sensex Closing Auction में हेरफेर का आरोप

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने JPMorgan Chase & Co. की स्वामित्व वाली Copthall Mauritius Investment को अगला आदेश आने तक भारतीय securities market से प्रतिबंधित कर दिया है। नियामक ने आरोप लगाया है कि कंपनी के trading patterns प्रथम दृष्टया “manipulative in nature” थे। यह कार्रवाई Sensex से जुड़े stocks में नई Closing Auction Session (CAS) व्यवस्था के कथित दुरुपयोग से संबंधित है।

SEBI के interim order में Copthall Mauritius और मुंबई स्थित Mansi Share and Stock Broking को 13 अगस्त को Sensex stocks में कथित तौर पर ऐसे trades करने का आरोप लगाया गया है, जिनसे closing value को प्रभावित करने की कोशिश की गई। यह वही दिन था जब Sensex से जुड़े weekly derivatives contracts की expiry थी। नियामक के अनुसार, दोनों संस्थाओं की trading activity ने बाजार के आधिकारिक closing price को प्रभावित करने की कोशिश की।

SEBI के मुताबिक, Copthall Mauritius ने CAS के दौरान Sensex में शामिल सभी stocks में बड़े buy orders लगाए। इन orders की कीमतें उस समय के prevailing market levels से काफी ऊपर थीं। नियामक का आरोप है कि इन orders के पीछे shares खरीदने की वास्तविक मंशा नहीं थी। SEBI ने यह भी कहा कि कुछ orders बाद में cancel कर दिए गए।

नियामक के अनुसार, कथित trading strategy का उद्देश्य Sensex की closing value को ऊपर ले जाना था, जिससे Copthall Mauritius के expiry वाले options positions का मूल्य बढ़ सके। SEBI ने आरोप लगाया कि इस गतिविधि से संस्था को करीब ₹2.96 करोड़ का कथित अनुचित लाभ हुआ।

मामले को समझने के लिए नई Closing Auction Session व्यवस्था महत्वपूर्ण है। CAS को भारतीय stock exchanges में 3 अगस्त 2026 से लागू किया गया था। यह कारोबार समाप्त होने से पहले होने वाली एक छोटी auction प्रक्रिया है, जिसमें buy और sell orders को match करके stocks का official closing price निर्धारित किया जाता है। इससे पहले closing price तय करने के लिए continuous trading के अंतिम 30 मिनट के दौरान हुए trades की average price का इस्तेमाल किया जाता था।

नई व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय बाजारों की closing-price mechanism को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस्तेमाल होने वाली प्रणालियों के अनुरूप बनाना था। हालांकि, इसके शुरुआती दौर में benchmark indices में तेज उतार-चढ़ाव और कीमतों में अंतर देखने को मिला है। CAS के दौरान liquidity भी अपेक्षाकृत कम रही है और इसमें institutional participants की भूमिका अधिक रही।

SEBI के अनुसार, CAS trades का हिस्सा daily cash-market turnover के 1% से भी कम रहा है। पिछली closing-price व्यवस्था की तुलना में इस दौरान trading volume भी काफी कम रहा। कम participation के कारण relatively छोटे orders का भी प्रमुख stocks और benchmark indices की closing value पर अपेक्षाकृत बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

इसी CAS व्यवस्था में Mansi Share and Stock Broking पर भी कथित हेरफेर का आरोप लगाया गया है। SEBI के अनुसार, कंपनी ने Sensex के आठ stocks में prevailing market prices से नीचे बड़े sell orders लगाए। इससे कथित तौर पर Sensex करीब पांच मिनट तक दबाव में रहा। नियामक का आरोप है कि Mansi ने profitable options positions से निकलने के बाद अपने लगभग सभी sell orders cancel कर दिए।

SEBI ने दोनों संस्थाओं के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई करते हुए संयुक्त रूप से करीब ₹3.68 करोड़ की रकम impound करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही दोनों को securities market में कारोबार करने से रोक दिया गया है। उन्हें Closing Auction Session में भाग लेने पर भी प्रतिबंधित किया गया है। यह कार्रवाई तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक मामले की आगे की जांच पूरी नहीं हो जाती और नियामक की ओर से अगला आदेश जारी नहीं होता।

Copthall Mauritius भारतीय equities में block deals के जरिए निवेश करने वाली संस्था है। SEBI के आदेश के खिलाफ कंपनी Securities Appellate Tribunal (SAT) का रुख कर सकती है। JPMorgan ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है, जबकि Mansi Share and Stock Broking की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई।

फिलहाल SEBI की कार्रवाई अंतरिम प्रकृति की है और लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं। नियामक अब यह निर्धारित करेगा कि CAS के दौरान की गई trading गतिविधियां वास्तव में market manipulation की श्रेणी में आती हैं या नहीं। अंतिम जिम्मेदारी और किसी भी संभावित उल्लंघन का निर्धारण आगे की नियामकीय और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

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