सहारनपुर में राज्य कर विभाग के अधिकारी को ₹1 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया, व्यापारी से हर महीने अवैध वसूली मांगने का आरोप है।

₹1 लाख रिश्वत लेते राज्य कर विभाग का अधिकारी गिरफ्तार: व्यापारी से हर महीने ‘हफ्ता’ मांगने का आरोप

Team The420
5 Min Read

सहारनपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में राज्य कर विभाग से जुड़े एक अधिकारी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। आरोपी सुनील कुमार पर आरोप है कि वह व्यापारियों को वाहन जांच के नाम पर परेशान कर अवैध वसूली करता था।

जानकारी के अनुसार, आरोपी अधिकारी सीमावर्ती चेकिंग प्वाइंट पर तैनात रहते हुए मालवाहक वाहनों की जांच करता था और ई-वे बिल में मामूली खामियां निकालकर उन्हें रोक लेता था। इसी आधार पर वह व्यापारियों से मोटी रकम की मांग करता था।

शिकायतकर्ता के अनुसार 28 मार्च 2026 को जब वह स्क्रैप माल लेकर रुड़की की ओर जा रहा था, तब उसे सहारनपुर बाईपास पर रोका गया। बिलों में कमी बताकर वाहन को जब्त कर लिया गया और भारी जुर्माना लगाने की धमकी दी गई।

FCRF Launches India’s Premier Certified Data Protection Officer Program Aligned with DPDP Act

इसके बाद व्यापारी पर लगातार दबाव बनाया गया कि वह लाखों रुपये की राशि जमा करे, जिसमें एक हिस्सा सरकारी खाते में और शेष नकद देने की मांग की गई। आरोप है कि आरोपी ने हर महीने एक लाख रुपये की अवैध वसूली की शर्त भी रखी।

मामले से परेशान होकर व्यापारी ने सतर्कता तंत्र से संपर्क किया और पूरी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद योजना बनाकर जाल बिछाया गया और आरोपी को उसके आवास पर एक लाख रुपये लेते हुए पकड़ लिया गया।

इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा तेज हो गई है और व्यापारिक संगठनों ने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है ताकि ईमानदार कारोबार प्रभावित न हो।

अधिकारियों के अनुसार, शिकायत की पुष्टि के बाद पूरा जाल तैयार किया गया और निगरानी के दौरान आरोपी को पकड़ने की रणनीति बनाई गई। जैसे ही तय रकम ली गई, उसे तुरंत दबोच लिया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय स्तर पर भी आंतरिक जांच की संभावना जताई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की गतिविधियों में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि चेकिंग प्वाइंट्स पर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए और डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत किया जाए ताकि किसी भी अधिकारी द्वारा मनमानी वसूली की गुंजाइश न रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में शिकायतकर्ताओं को प्रोत्साहित करना और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ सकती है।

इस तरह की घटनाएं न केवल सरकारी व्यवस्था की छवि को प्रभावित करती हैं, बल्कि आम जनता और कारोबारियों के बीच विश्वास को भी कमजोर करती हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि निगरानी तंत्र को और अधिक सख्त और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की आवश्यकता है।

फिलहाल आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारी स्तर पर इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस घटना के बाद क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि समय रहते शिकायत न की जाती, तो यह अवैध वसूली लंबे समय तक चल सकती थी। ऐसे मामलों में जागरूकता और त्वरित शिकायत प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि कोई भी अधिकारी अपनी पद की शक्ति का दुरुपयोग न कर सके।

व्यापारिक समुदाय ने उम्मीद जताई है कि इस तरह की कार्रवाई से भविष्य में चेकिंग व्यवस्था में सुधार आएगा और ईमानदार व्यापारियों को राहत मिलेगी। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article