मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच की साउथ साइबर पुलिस ने कथित CEO/Boss Fraud के एक मामले में बिहार और झारखंड से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मुंबई की एक कंपनी के 43 वर्षीय कर्मचारी से ₹48.60 लाख की ठगी की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने पूरी ठगी की रकम को फ्रीज करा दिया। पुलिस ने 161 Airtel SIM कार्ड और अन्य उपकरण बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, 26 फरवरी 2026 को पीड़ित कर्मचारी को एक अज्ञात WhatsApp नंबर से संदेश मिला। इस नंबर पर कंपनी के निदेशक की तस्वीर लगी हुई थी। कर्मचारी ने संदेश को वास्तविक मान लिया और आरोपियों की ओर से बताए गए बैंक खातों में कुल ₹48,60,511 ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया।
जांच में सामने आया कि ठगी में इस्तेमाल किए गए कुछ मोबाइल नंबर कथित तौर पर फर्जी या दुरुपयोग किए गए electronic KYC दस्तावेजों के आधार पर सक्रिय किए गए थे। पुलिस ने बिहार के सिवान निवासी 22 वर्षीय Aamir Chand Mohammad Khan को चिन्हित किया। वह Airtel SIM distributor और Point of Sale operator के तौर पर काम करता था।
पुलिस का आरोप है कि Khan ग्राहकों को मौजूदा मोबाइल नंबर port कराने का भरोसा देकर कई SIM कार्ड सक्रिय कराता था, जबकि संबंधित ग्राहकों को इसकी जानकारी नहीं होती थी। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि उसने आठ SIM कार्ड झारखंड के धनबाद जिले के कुमरधुबी निवासी Suraj Kumar Pradeep Kumar Sav alias Vishal को ₹6,000 में दिए। पुलिस के अनुसार भुगतान Khan के Airtel Payments Bank खाते में UPI के जरिए किया गया था।
तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल सुरागों के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों तक पहुंच बनाई। Aamir Chand Mohammad Khan को 14 अगस्त को सिवान से गिरफ्तार किया गया, जबकि Suraj Kumar Pradeep Kumar Sav alias Vishal को 16 अगस्त को झारखंड से पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, जांच में दोनों आरोपियों के कथित तौर पर देशभर में दर्ज सात साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इनमें मुंबई के दो मामलों के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मामले शामिल हैं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 161 SIM कार्ड के अलावा एक megaphone, मोबाइल फोन और ऐसा उपकरण भी जब्त किया, जिसमें SIM activation के लिए Telecom Mitra application मौजूद था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन SIM कार्ड का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया और इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था या नहीं।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के मुताबिक, CEO Fraud में अपराधी अक्सर भरोसेमंद पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारी पर तुरंत भुगतान का दबाव बनाते हैं। उनके अनुसार, WhatsApp पर वरिष्ठ अधिकारी या कंपनी प्रमुख की तस्वीर दिखाई देना किसी संदेश की प्रामाणिकता का प्रमाण नहीं है। किसी भी वित्तीय अनुरोध की स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि करना जरूरी है, खासकर तब जब रकम ट्रांसफर करने के लिए अचानक कहा जाए।
विशेषज्ञ ने कहा कि SIM कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में KYC की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है। किसी दूसरे व्यक्ति के दस्तावेज या पहचान का दुरुपयोग कर सक्रिय किए गए मोबाइल कनेक्शन साइबर ठगों के लिए महत्वपूर्ण साधन बन सकते हैं।
मुंबई पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि WhatsApp पर अज्ञात नंबर से आने वाले पैसों के अनुरोध पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को कंपनी अधिकारी, रिश्तेदार या परिचित बताकर भुगतान मांगता है, तो उसके वास्तविक नंबर या किसी अन्य विश्वसनीय माध्यम से पहचान की पुष्टि करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। पुलिस ने अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी Sanchar Saathi के माध्यम से जांचने और बैंक खाते किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न देने की भी अपील की है।
