अमेरिका में एक रिटायर्ड नर्स से ₹1.8 करोड़ की साइबर ठगी के बाद IRS ने उसी रकम की निकासी पर ₹70 लाख का टैक्स नोटिस भेजा।

फेडरल अधिकारी बनकर ठग ने खाली किया रिटायर्ड नर्स का खाता, फिर टैक्स विभाग ने थमाया ₹70 लाख का नोटिस

Team The420
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वॉशिंगटन। अमेरिका में साइबर ठगी की एक घटना ने दिखाया है कि ऑनलाइन अपराध का आर्थिक असर केवल चोरी गई रकम तक सीमित नहीं रहता। एक सेवानिवृत्त नर्स सुसान बिविन्स को फेडरल अधिकारी बनकर ठगने वाले व्यक्ति ने सेवानिवृत्ति खातों से करीब ₹1.8 करोड़ निकलवाकर ठगी कर ली। इसके बाद उनकी मुश्किल उस समय और बढ़ गई, जब अमेरिकी आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस) ने उन्हीं निकासी पर करीब ₹70 लाख का कर बकाया बता दिया। रकम चुकाने के लिए बिविन्स को अपना घर बेचना पड़ा और वह अब एक छोटे एक कमरे के अपार्टमेंट में रह रही हैं।

बिविन्स ने ठगी के बाद संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) और स्थानीय पुलिस को शिकायत दी थी। उनका कहना है कि उन्होंने मदद की उम्मीद की थी, लेकिन चोरी गई रकम वापस पाने में उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली। ठगी से हुए आर्थिक नुकसान के साथ कर की देनदारी ने उनकी स्थिति को और गंभीर बना दिया। उन्होंने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि एक समय उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे जीवन कैसे चलेगा।

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यह मामला अमेरिका में बढ़ती ऑनलाइन ठगी के व्यापक असर की ओर भी ध्यान खींचता है। एक जांच के दौरान अलग-अलग उम्र और आर्थिक पृष्ठभूमि के 58 पीड़ितों से बातचीत की गई। इनमें डॉक्टर, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कर्मचारी, शिक्षाविद और आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे लोग शामिल थे। इन पीड़ितों का नुकसान हजारों डॉलर से लेकर करीब ₹35 करोड़ तक बताया गया।

ठगी के बाद शुरू होता है आर्थिक संकट

जांच में सामने आया कि ठगी में रकम गंवाने के बाद पीड़ितों को कई अन्य आर्थिक जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ सकता है। बैंक शुल्क, कर्ज की किस्त, कानूनी खर्च और कर देनदारी जैसी परेशानियां चोरी गई रकम से अलग बोझ बन जाती हैं।

अमेरिकी उपभोक्ताओं ने पिछले वर्ष ठगी के कारण करीब 15.9 अरब डॉलर यानी लगभग ₹14 लाख करोड़ से अधिक के नुकसान की शिकायतें दर्ज कराईं। यह 2024 की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक था। हालांकि वास्तविक नुकसान इससे काफी ज्यादा हो सकता है, क्योंकि कई पीड़ित शर्म, सामाजिक दबाव या बदनामी के डर से पुलिस या संबंधित एजेंसियों को शिकायत नहीं करते।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते इस्तेमाल ने ठगी के तरीकों को और जटिल बना दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से ठग एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बना सकते हैं, जबकि क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित करना संभव होने से उसके अंतिम नियंत्रक तक पहुंचना कठिन हो जाता है।

कर नियमों ने बढ़ाई पीड़ितों की परेशानी

बिविन्स का मामला अमेरिकी कर व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण सवाल को भी सामने लाता है। कर-स्थगित सेवानिवृत्ति खातों से रकम निकालने पर सामान्य परिस्थितियों में कर लग सकता है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब निकाली गई रकम बाद में किसी ठगी में चली जाए।

2018 से पहले कुछ परिस्थितियों में चोरी या धोखाधड़ी से हुए नुकसान को कर योग्य आय से घटाने की सुविधा उपलब्ध थी। लेकिन कर कानून में किए गए बदलाव के बाद कई सामान्य ठगी मामलों में व्यक्तिगत नुकसान पर मिलने वाली कर राहत समाप्त कर दी गई। 2025 में यह व्यवस्था स्थायी कर दी गई। इसका मतलब है कि कुछ मामलों में पीड़ित रकम गंवाने के बावजूद उस रकम से जुड़ी कर देनदारी का सामना कर सकता है।

बिविन्स के साथ यही हुआ। करीब ₹1.8 करोड़ की रकम ठगी में गंवाने के बाद उन पर लगभग ₹70 लाख का आईआरएस कर बिल आया। आर्थिक दबाव के चलते उन्हें अपना घर बेचना पड़ा। अब वह छोटे अपार्टमेंट में रह रही हैं और हस्तनिर्मित रजाइयां बेचकर कर बकाया चुकाने की कोशिश कर रही हैं।

अमेरिकी कांग्रेस में ‘टैक्स रिलीफ फॉर फ्रॉड विक्टिम्स एक्ट’ नाम से एक विधेयक विचाराधीन है। इसका उद्देश्य कुछ प्रकार की ठगी के पीड़ितों को हुए नुकसान पर कर राहत देने की व्यवस्था फिर से शुरू करना है। धोखाधड़ी रोकथाम से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अपराध का शिकार हुए लोगों पर उसी अपराध के कारण पैदा हुई वित्तीय देनदारियों का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ना चाहिए।

चोरी की रकम वापस पाना भी बड़ी चुनौती

ठगी की शिकायत तुरंत करने के बावजूद पैसा वापस पाना आसान नहीं है। अमेरिकी कानून के तहत यदि ग्राहक को धोखा देकर उसी से लेनदेन अधिकृत करा लिया गया हो, तो बैंक आम तौर पर रकम लौटाने के लिए बाध्य नहीं होते। इसके विपरीत, बिना ग्राहक की अनुमति खाते से रकम निकाले जाने की स्थिति में बैंक की जिम्मेदारी बनने की संभावना अधिक होती है।

क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी ठगी में चुनौती और बढ़ जाती है। क्रिप्टो परिसंपत्तियां बैंक जमा की तरह संघीय बीमा के दायरे में नहीं आतीं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले लेनदेन और कई खातों के जरिए रकम घुमाए जाने से जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

एक अन्य पीड़ित ब्रायन ग्लिक ने करीब ₹5.1 करोड़ गंवाए। उसने एफबीआई, बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार संबंधी हेल्पलाइन, प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग और न्यूयॉर्क राज्य के अटॉर्नी जनरल कार्यालय में शिकायत की। एफबीआई ने उससे जुड़ी रकम रोकने के लिए क्रिप्टो कंपनी टीथर से संपर्क किया, लेकिन कंपनी के अनुसार तब तक रकम दूसरी धनराशि के साथ मिलाई जा चुकी थी।

सरकार ने शुरू की कई पहल

अमेरिकी कांग्रेस में साइबर ठगी से जुड़े एक दर्जन से अधिक विधेयकों पर विचार हो रहा है। प्रस्तावों में ठगी की शिकायतों के लिए केंद्रीय वेबसाइट बनाने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाए गए वीडियो तथा आवाज की पहचान संबंधी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य करने जैसे उपाय शामिल हैं।

अमेरिकी न्याय विभाग ने ठगी करने वाले आपराधिक नेटवर्क पर कार्रवाई और चोरी की रकम जब्त करने के लिए ‘स्कैम सेंटर स्ट्राइक फोर्स’ भी बनाई है। इसके बावजूद पीड़ितों और विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कार्रवाई ऑनलाइन ठगी के बढ़ते पैमाने की तुलना में अभी पर्याप्त नहीं है।

एफबीआई के इंटरनेट क्राइम शिकायत केंद्र में प्रतिदिन औसतन करीब 3,000 शिकायतें आती हैं। एफबीआई की पूर्व अधिकारी डोना ग्रेगरी के अनुसार, एजेंसी इन शिकायतों में से केवल करीब 10 से 12 प्रतिशत मामलों की ही जांच कर पाती है। ऐसे में बिविन्स की कहानी केवल एक साइबर ठगी की घटना नहीं, बल्कि उस आर्थिक संकट की तस्वीर भी है जो ठगी के बाद लंबे समय तक पीड़ितों का पीछा कर सकता है।

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