नई दिल्ली। रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े करीब ₹9,280 करोड़ के कथित बैंक ऋण घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दूसरी चार्जशीट दाखिल कर दी है। सोमवार को मुंबई की विशेष अदालत के समक्ष दाखिल पूरक आरोपपत्र में 17 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें रिलायंस एडीए समूह से जुड़े तीन पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, आठ कंपनियां और बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक तथा इंडियन ओवरसीज बैंक के छह अधिकारी शामिल हैं। हालांकि, उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम इस चार्जशीट में आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया गया है।
सीबीआई के मुताबिक, जांच में अब तक सामने आया है कि रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड द्वारा जुटाई गई ₹6,229.54 करोड़ की रकम कथित तौर पर मध्यस्थ और बिचौलिया संस्थाओं के जरिए रिलायंस एडीए समूह की विभिन्न कंपनियों में स्थानांतरित की गई। एजेंसी का आरोप है कि इन लेनदेन ने ऋण की निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया और इससे ऋणदाताओं को अनुचित वित्तीय नुकसान हुआ, जबकि संबंधित संस्थाओं और आरोपियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिला।
तीन पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप
दूसरी चार्जशीट में रिलायंस एडीए समूह के पूर्व समूह प्रबंध निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से जुड़े पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी अमित बापन्ना और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कंपनी सचिव रमेश शेनॉय को आरोपी बनाया गया है।
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सीबीआई ने इन लोगों पर अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कथित आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी और आपराधिक दुरुपयोग में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। आरोपपत्र में भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधान भी लगाए गए हैं।
आठ कंपनियां भी आरोपी
सीबीआई ने आठ कंपनियों को भी मामले में आरोपी बनाया है। इनमें रिलायंस पावर लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, रिलायंस बिग एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, बिग फ्लिक्स प्राइवेट लिमिटेड, कुंजबिहारी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड शामिल हैं।
जांच एजेंसी का कहना है कि ऋण से जुड़ी रकम को कथित तौर पर ऐसी संस्थाओं के जरिए स्थानांतरित किया गया, जिनका इस्तेमाल धन को एक कंपनी से दूसरी कंपनी तक पहुंचाने के लिए किया गया। एजेंसी अब इन लेनदेन की पूरी श्रृंखला और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
छह बैंक अधिकारी भी जांच के घेरे में
मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक से जुड़े छह अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई का आरोप है कि इन अधिकारियों ने कथित तौर पर रिलायंस एडीए समूह से जुड़े लोगों के साथ मिलीभगत की या संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को रोकने और उनकी उचित जांच करने में अपनी भूमिका नहीं निभाई।
जांच एजेंसी के अनुसार, बैंक अधिकारियों की भूमिका यह पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण है कि ऋण स्वीकृति, धन के हस्तांतरण और कथित अनियमितताओं के दौरान बैंकिंग स्तर पर क्या हुआ था।
कुल नुकसान करीब ₹9,280 करोड़
सीबीआई ने यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र और कंसोर्टियम में शामिल अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शिकायतों के आधार पर दर्ज किया था। एजेंसी के अनुमान के अनुसार, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य ऋणदाताओं को इस मामले में कुल करीब ₹9,280 करोड़ का नुकसान हुआ।
हालांकि, जांच में कथित तौर पर ₹6,229.54 करोड़ की रकम के स्थानांतरण का विशेष रूप से पता चला है। सीबीआई अब इस रकम के अंतिम उपयोग, विभिन्न कंपनियों तक इसके पहुंचने और प्रत्येक लेनदेन में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
पहली चार्जशीट जुलाई में दाखिल हुई थी
सीबीआई ने इस मामले में पहली चार्जशीट 7 जुलाई 2026 को सात आरोपियों के खिलाफ दाखिल की थी। दूसरी और पूरक चार्जशीट में 17 और आरोपियों को नामजद किए जाने के बाद अब तक इस मामले में व्यक्तियों और कंपनियों समेत कुल 24 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है।
यह मामला रिलायंस एडीए समूह से जुड़ी कई कंपनियों के खिलाफ सीबीआई की व्यापक जांच का हिस्सा है। एजेंसी ने सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों, भारतीय जीवन बीमा निगम और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से मिली शिकायतों के आधार पर समूह की अलग-अलग कंपनियों से संबंधित कई प्राथमिकी दर्ज की हैं।
अनिल अंबानी की भूमिका पर जांच जारी
दूसरी चार्जशीट में अनिल अंबानी को आरोपी नहीं बनाया गया है। हालांकि, सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले नए साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल अदालत में दाखिल आरोपपत्र में तीन पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों, आठ कंपनियों और छह बैंक अधिकारियों समेत 17 नए आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही और सीबीआई की जारी जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित ₹9,280 करोड़ के नुकसान और ₹6,229.54 करोड़ के धन हस्तांतरण में किसकी क्या भूमिका थी।
