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डिजिटल पेमेंट्स में जल्द आएगा ‘किल स्विच’, RBI का फ्रॉड से बचाव में बड़ा कदम

Roopa
By Roopa
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मुंबई: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी Payments Vision 2028 नीति में डिजिटल पेमेंट सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के लिए नए नियमों का संकेत दिया है। केंद्रीय बैंक ने प्रस्ताव रखा है कि अनधिकृत डिजिटल ट्रांजैक्शन्स की जिम्मेदारी अब केवल ग्राहक या बैंक की नहीं, बल्कि ग्राहक और लाभार्थी बैंक दोनों की होगी। इसका मकसद धोखाधड़ी का पता लगाने में तेजी लाना, इंटर‑बैंक समन्वय बढ़ाना और उपयोगकर्ताओं में डिजिटल पेमेंट्स पर भरोसा मजबूत करना है।

RBI ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि वर्तमान में कार्ड ट्रांजैक्शन्स में उपलब्ध ‘switch on/off’ फीचर को अब सभी डिजिटल पेमेंट मोड्स में लागू करने की तैयारी है। यह सुविधा ग्राहकों को अपनी ट्रांजैक्शन क्षमता को नियंत्रित करने का अधिकार देती है और फ्रॉड जोखिम को कम करती है। बैंकिंग सिस्टम में यह कदम ग्राहकों के लिए ट्रांजैक्शन प्रबंधन और धोखाधड़ी रोकथाम को आसान बनाएगा।

साझा ज़िम्मेदारी मॉडल से बढ़ेगा सिस्टम का विश्वास

RBI का मानना है कि जब ग्राहक और बैंक दोनों जिम्मेदार होंगे, तो बैंक मजबूत फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम विकसित करने के लिए अधिक सक्रिय होंगे। इससे न केवल धोखाधड़ी पर तेजी से रोकथाम होगी, बल्कि इंटर-बैंक समन्वय और त्वरित हस्तक्षेप भी संभव होगा। इस पहल से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि OTP साझा करने जैसे पिछले विवादों के बीच यह कदम समय की मांग है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि डिजिटल ट्रांजैक्शन में शामिल सभी पक्ष अपनी ज़िम्मेदारी निभाएँ और धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से कार्रवाई हो सके।

किल स्विच का विस्तार: कार्ड से डिजिटल मोड तक

RBI ने बताया कि ‘switch on/off’ सुविधा, जो फिलहाल केवल कार्ड ट्रांजैक्शन्स के लिए उपलब्ध है, को जल्द ही सभी डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स पर लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि ग्राहक अपने मोबाइल वॉलेट, UPI, नेट बैंकिंग और अन्य डिजिटल माध्यमों पर ट्रांजैक्शन सक्षम/अक्षम करने का विकल्प पाएंगे।

यह फीचर विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में उपयोगी होगा। इसके माध्यम से ग्राहक जरूरत के अनुसार किसी विशेष समय या देश के लिए ट्रांजैक्शन को बंद कर सकते हैं, जिससे फ्रॉड की संभावना और कम होगी।

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उपभोक्ता संरक्षण और प्रणाली क्षमता में सुधार

RBI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नए नियमों से उपभोक्ता संरक्षण में सुधार होगा। बैंक और भुगतान संस्थान अब फ्रॉड का पता लगाने और रोकथाम करने के लिए साझा प्रयास करेंगे। साथ ही, डिजिटल पेमेंट प्रणाली की स्थिरता और दक्षता में भी सुधार होगा।

RBI का यह कदम एक समग्र दृष्टिकोण के तहत डिजिटल भुगतान के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने का प्रयास है। इसके अलावा, यह योजना क्रॉस‑बॉर्डर पेमेंट्स को भी अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाने में सहायक होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस पहल से ग्राहकों में डिजिटल लेनदेन पर भरोसा बढ़ेगा और बैंकिंग संस्थानों को सुरक्षा उपायों में निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

निष्कर्ष

RBI का Payments Vision 2028 दस्तावेज़ डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में सुरक्षा, दक्षता और उपभोक्ता विश्वास को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। साझा जिम्मेदारी मॉडल और किल स्विच के विस्तार से यह सुनिश्चित होगा कि डिजिटल लेनदेन सुरक्षित, नियंत्रित और भरोसेमंद बने रहें।

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