रायपुर: राज्य की राजधानी में साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जहां ऑनलाइन अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में जालसाजों ने लोन ऐप, फिशिंग कॉल और फर्जी बीमा योजनाओं का सहारा लेकर करीब ₹8 लाख की ठगी कर ली। इन घटनाओं के बाद पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
लोन ऐप के बहाने मोबाइल तक पहुंच
सबसे गंभीर मामला टिकरापारा इलाके के निवासी और निजी कंपनी में कार्यरत विशाल गुप्ता से जुड़ा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 10 मार्च को उन्होंने ₹10,000 के छोटे लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। लेकिन जालसाजों ने उन्हें बताया कि ₹40,000 का लोन स्वीकृत हो गया है। इसी बहाने उन्होंने पीड़ित के मोबाइल तक पहुंच बना ली।
जांच में सामने आया कि मोबाइल एक्सेस मिलने के बाद आरोपियों ने फोन की गैलरी से निजी फोटो निकाल लिए और उन्हें एडिट कर आपत्तिजनक बना दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी देकर लगातार दबाव बनाया गया। मानसिक दबाव में आकर विशाल गुप्ता ने अलग-अलग किश्तों में करीब ₹6 लाख ट्रांसफर कर दिए। यह मामला दिखाता है कि कैसे साइबर अपराधी तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का एक साथ इस्तेमाल कर रहे हैं।
FCRF Academy Launches Premier Anti-Money Laundering Certification Program
रिवॉर्ड प्वाइंट के नाम पर फिशिंग कॉल
दूसरा मामला सेना के एक सूबेदार हरिश्चंद्र सिंह से जुड़ा है, जो फिशिंग स्कैम का शिकार हुए। 17 अप्रैल को उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को Axis Bank का प्रतिनिधि बताया। कॉलर ने क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने का झांसा दिया और उन्हें एक फर्जी वेबसाइट पर भेज दिया।
जैसे ही पीड़ित ने उस वेबसाइट पर अपने कार्ड की जानकारी डाली, उनके खाते से ₹1,99,996 की अनधिकृत ट्रांजैक्शन हो गई। ठगी का एहसास होते ही उन्होंने तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, ऐसे मामलों में रकम की रिकवरी चुनौतीपूर्ण होती है क्योंकि जालसाज कई स्तरों पर ट्रांजैक्शन को घुमा देते हैं।
फर्जी बीमा अलर्ट से बनाया गया दबाव
तीसरा मामला अमलीडीह निवासी फल व्यापारी जयकुमार वाधवानी से जुड़ा है, जिन्हें फर्जी बीमा योजना के नाम पर निशाना बनाया गया। जालसाजों ने उन्हें कॉल कर बताया कि उनकी ICICI Prudential Life Insurance पॉलिसी में नुकसान हो रहा है और तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। डर पैदा करने के लिए ‘कंज्यूमर कोर्ट’ में केस का भी हवाला दिया गया।
इसके बाद उन्हें एक लिंक भेजा गया, जिसे “फ्रीजिंग कोड” बताकर क्लिक करने को कहा गया। जैसे ही उन्होंने लिंक खोला, उनके बैंकिंग डिटेल्स हैक हो गए और खाते से ₹55,000 निकाल लिए गए। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हाइब्रिड स्कैम, जिसमें तकनीकी और मानसिक दोनों तरह का दबाव बनाया जाता है, तेजी से बढ़ रहे हैं।
मल्टी-लेयर्ड सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि ठगी के तरीके लगातार विकसित हो रहे हैं। Algoritha Security के एक शोधकर्ता के अनुसार, अपराधी अब “मल्टी-लेयर्ड सोशल इंजीनियरिंग” का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें भावनात्मक दबाव के साथ तकनीकी हथकंडों को जोड़ा जाता है।
रायपुर में पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ऐप पर भरोसा न करें। बैंकिंग जानकारी, OTP या कार्ड डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें और संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
डिजिटल ट्रेल और बैंक खातों की जांच जारी
अधिकारियों ने यह भी बताया कि ऐसे साइबर गिरोह अक्सर राज्य या देश के बाहर से ऑपरेट करते हैं, जिससे जांच और पैसे की रिकवरी और जटिल हो जाती है। फिलहाल, साइबर टीमें इन मामलों में शामिल खातों और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही हैं ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
हालिया घटनाएं यह साफ संकेत देती हैं कि डिजिटल लेन-देन के बढ़ते दौर में सावधानी और जागरूकता बेहद जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है, इसलिए हर व्यक्ति को सतर्क रहना होगा।
