चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने साइबर ठगी के एक मामले में आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच समझौता होने के बावजूद एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि साइबर अपराध को केवल दो पक्षों के बीच निजी विवाद मानकर आपराधिक कार्रवाई खत्म नहीं की जा सकती। पीड़ित को ठगी की रकम वापस कर देना अपने आप में आपराधिक मुकदमे को समाप्त करने का आधार नहीं हो सकता।
न्यायमूर्ति शालिनी सिंह नागपाल की पीठ के समक्ष यह मामला एफआईआर रद्द करने की मांग से जुड़ा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2025 में नए क्रेडिट कार्ड के लिए प्रयास करने के दौरान उसे व्हाट्सऐप पर एक लिंक मिला था। लिंक के जरिए उसने अपने क्रेडिट कार्ड से संबंधित जानकारी दर्ज की। इसके बाद उसके खाते से कथित तौर पर 99,461 रुपये की रकम निकाल ली गई। मामले में 22 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज की गई थी।
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मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है और शिकायतकर्ता को रकम भी वापस कर दी गई है। इसी आधार पर आपराधिक मामले और एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने साइबर अपराधों की प्रकृति और उनके व्यापक प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल ने ऐसे अपराधों की पहुंच और गति दोनों बढ़ा दी है। साइबर ठगी का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, जिसके खाते से रकम निकाली जाती है, बल्कि ऐसे अपराध डिजिटल लेनदेन की विश्वसनीयता और लोगों के भरोसे को भी प्रभावित करते हैं।
पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल मुआवजा या रकम की वापसी के आधार पर ऐसे अपराधों की आपराधिक कार्यवाही को खत्म नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, साइबर अपराधों को सामान्य निजी विवादों की श्रेणी में रखकर समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द करना उचित नहीं होगा। ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति और उसके व्यापक प्रभाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
यह मामला उस तरीके को भी सामने लाता है, जिसमें साइबर ठग क्रेडिट कार्ड से जुड़ी सेवाओं के नाम पर लोगों को निशाना बना सकते हैं। शिकायतकर्ता को नए क्रेडिट कार्ड के लिए प्रयास के दौरान व्हाट्सऐप लिंक मिला था। लिंक पर जानकारी दर्ज करने के बाद उसके खाते से रकम निकलने का आरोप है। इस तरह के मामलों में डिजिटल माध्यम से हासिल की गई वित्तीय जानकारी का इस्तेमाल अनधिकृत लेनदेन के लिए किए जाने की आशंका रहती है।
हाईकोर्ट का यह रुख इस बात को रेखांकित करता है कि साइबर ठगी से जुड़े आपराधिक मामलों में आरोपी और पीड़ित के बीच बाद में हुआ समझौता अपने आप मुकदमे को खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने मामले की प्रकृति को देखते हुए एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।
