नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन में साइबर ठगों ने 65 वर्षीय महिला को करीब 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखकर कथित तौर पर ₹24 लाख ठग लिए। जालसाजों ने पहले खुद को टेलीफोन विभाग का कर्मचारी बताया और दावा किया कि महिला के आधार कार्ड का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में किया गया है। इसके बाद कथित जांच अधिकारी बनकर महिला को गिरफ्तारी, मुकदमे और वारंट का डर दिखाया गया। आरोपियों ने उनके नाम से विदेश भेजे जा रहे एक पार्सल में ड्रग्स मिलने और हवाला कारोबार से जुड़े होने की बात भी कही।
पीड़िता की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब कॉल करने वालों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और रकम के लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, टेज जोन-4 क्षेत्र में रहने वाली महिला के पास 5 अक्टूबर 2025 को एक अनजान नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीफोन विभाग का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए किया गया है। महिला को बताया गया कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है और वारंट भी जारी किया जा चुका है।
कोरियर में ड्रग्स मिलने का डर दिखाया
महिला ने जब कथित अवैध गतिविधि के बारे में जानकारी मांगी तो कॉल को एक अन्य व्यक्ति के पास स्थानांतरित कर दिया गया। दूसरे व्यक्ति ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि महिला के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर विदेश में एक कोरियर भेजा जा रहा था। जांच के दौरान उस कोरियर में ड्रग्स मिलने का दावा किया गया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
इसके बाद जालसाजों ने महिला पर हवाला कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाया। उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि मामला गंभीर है और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जा सकता है। लगातार धमकियों और पूछताछ के जरिए महिला पर दबाव बनाया गया।
वीडियो कॉल पर 48 घंटे तक निगरानी
आरोपियों ने महिला को वीडियो कॉल से जोड़े रखा और करीब 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रखा। इस दौरान उन्हें कथित जांच में सहयोग करने और निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया। महिला को यह भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने के बाद यदि वह निर्दोष पाई गईं तो उनसे ली गई रकम वापस कर दी जाएगी।
7 अक्टूबर 2025 को आरोपियों ने जांच के नाम पर महिला के बैंक खाते से ₹24 लाख अपने बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए। रकम भेजने के बाद महिला को वापसी का इंतजार रहा, लेकिन पैसा वापस नहीं आया। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग अक्सर खुद को पुलिस, जांच एजेंसी, दूरसंचार विभाग या अन्य सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल पर निगरानी रखने या जांच के नाम पर खाते में रकम जमा कराने का दबाव बनाया जाता है।
