आगरा में 12 टन स्क्रैप बिना वैध e-way bill के पकड़े जाने और अलग मामले में ₹1.02 करोड़ की कथित फर्जी ITC के दावे को लेकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।

जीएसटी चोरी का खेल: झारखंड के कागज पर अलीगढ़ भेजा जा रहा था माल, दो मामलों में पांच से ज्यादा पर प्राथमिकी

Team The420
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आगरा। आगरा में जीएसटी चोरी और फर्जी दस्तावेजों के जरिये कर लाभ लेने के दो मामले सामने आए हैं। पहले मामले में झारखंड के दस्तावेजों के आधार पर आगरा से अलीगढ़ भेजे जा रहे 12 मीट्रिक टन स्क्रैप से लदे ट्रक को पकड़ा गया। जांच में बिल और बिल्टी संदिग्ध पाए गए और माल के परिवहन के लिए ईवे बिल भी जारी नहीं किया गया था। दूसरे मामले में विशेष अनुसंधान शाखा की जांच में ऐसी फर्म का पता चला, जिसके घोषित कारोबारी पते पर उसका अस्तित्व नहीं मिला। दोनों मामलों में पुलिस ने संबंधित फर्मों और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पहले मामले में राज्य कर विभाग की सचल टीम ने 18 अगस्त की रात करीब 11:35 बजे रामबाग चौराहे पर ट्रक को रोका था। ट्रक में 12 मीट्रिक टन स्क्रैप लदा था। चालक ने झारखंड के दस्तावेज दिखाए और बताया कि माल का परिवहन दुमका से अलीगढ़ के लिए किया जा रहा है। जांच में सामने आया कि माल की बुकिंग गाजियाबाद की एक ट्रांसपोर्ट फर्म के जरिये की गई थी। झारखंड की एक फर्म द्वारा अलीगढ़ की एक फर्म के नाम जारी टैक्स इनवॉइस भी दिखाया गया।

जांच के दौरान चालक ने शपथ देकर बताया कि वह माल को आगरा से अलीगढ़ ले जा रहा था। इससे परिवहन दस्तावेजों में दर्ज जानकारी पर सवाल खड़े हुए। विभाग के अनुसार माल की कीमत 2,16,383 रुपये दर्शाई गई थी, लेकिन इसके लिए ईवे बिल जारी नहीं किया गया था। जीएसटी नियमों के तहत निर्धारित सीमा से अधिक मूल्य के माल के अंतरराज्यीय परिवहन में ईवे बिल आवश्यक होता है। जांच में यह भी सामने आया कि माल आगरा से लोड किया गया था, जबकि दस्तावेजों में इसकी लोडिंग दूसरे स्थान से दिखाई गई थी।

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वाहन की आवाजाही की जांच में भी दस्तावेजों से मेल नहीं खाती जानकारी सामने आई। विभाग के अनुसार वाहन 2 जून को बरोस टोल प्लाजा से गुजरा था, लेकिन उसके झारखंड जाने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद अधिकारियों ने दस्तावेजों में दर्ज झारखंड की सप्लायर फर्म की जीएसटी प्रोफाइल की जांच की। रिकॉर्ड में सामने आया कि फर्म ने 27 दिसंबर 2025 को जीएसटी पंजीकरण कराया था।

विभागीय जांच में वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए जीएसटीआर-2ए में खरीद शून्य मिली। फर्म के पास संबंधित माल का स्टॉक भी उपलब्ध नहीं पाया गया। जीएसटीआर-1 में मई 2026 में 5,378 रुपये और जून 2026 में 7,825 रुपये की बिक्री दिखाई गई थी। दोनों महीनों की कुल घोषित बिक्री 13,203 रुपये थी। ऐसे में करीब 1.83 लाख रुपये मूल्य के 12 टन स्क्रैप की बिक्री का इनवॉइस जारी किए जाने पर विभाग ने संदेह जताया।

जांच में खरीदार फर्म की खरीद का भी स्वतंत्र सत्यापन नहीं हो सका। विभाग के अनुसार खरीदार ने ऐसी फर्म से माल खरीदना दर्शाया था, जिनमें कुछ फर्मों का पंजीकरण निरस्त या निलंबित पाया गया। अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेजों में दर्शाई गई खरीद और वास्तविक माल की आवाजाही के बीच अंतर की भी जांच की जा रही है।

इसी क्रम में सामने आए दूसरे मामले में टेढ़ी बगिया स्थित एमएस निहाल ट्रेडिंग कंपनी के खिलाफ लोहामंडी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। विशेष अनुसंधान शाखा की जांच में फर्म के पंजीकरण और आईटीसी लेनदेन में कथित अनियमितताएं सामने आईं। रिकॉर्ड के अनुसार फर्म ने 10 जुलाई 2018 को जीएसटी पंजीकरण हासिल किया था। पंजीकरण के समय टेढ़ी बगिया का कारोबारी पता, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी दी गई थी।

राज्य कर विभाग ने 21 अक्टूबर 2019 को फर्म का पंजीकरण निरस्त कर दिया था। बाद की जांच में घोषित कारोबारी पते पर फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला। पंजीकरण के लिए टेढ़ी बगिया निवासी एक व्यक्ति का बिजली बिल इस्तेमाल किया गया था, जबकि संबंधित व्यक्ति ने फर्म के नाम और उसके कारोबार से किसी तरह की जानकारी होने से इनकार किया।

जांच के अनुसार फर्म ने 5.69 करोड़ रुपये की बोगस इनवर्ड सप्लाई दिखाई और इसके आधार पर 1.02 करोड़ रुपये की आईटीसी का दावा कर उसका इस्तेमाल किया। इसके अलावा 5,38,86,914.60 रुपये की आउटवर्ड सप्लाई घोषित करते हुए 46,59,108.28 रुपये की बोगस आईटीसी आगे पास ऑन किए जाने का आरोप है। दोनों मामलों में पुलिस दस्तावेजों, जीएसटी रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और माल की वास्तविक आवाजाही की जांच कर रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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