अमृतसर। पंजाब के अमृतसर में जमीन खरीद से जुड़े एक सौदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने की मांग की है। जांच एजेंसी ने कुछ ही महीनों के भीतर जमीन की कीमत में असाधारण वृद्धि पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच की आवश्यकता जताई है। यह सौदा पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) द्वारा जमीन खरीदने से संबंधित है।
मामले के उपलब्ध विवरण के अनुसार, दो रियल एस्टेट डेवलपर्स ने अगस्त से नवंबर 2025 के बीच अमृतसर के एक गांव में कृषि भूमि करीब ₹15 लाख प्रति एकड़ की दर से खरीदी थी। इसके बाद फरवरी 2026 में यही जमीन पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन को लगभग ₹3 करोड़ प्रति एकड़ की दर से बेच दी गई।
जमीन की खरीद और बिक्री की कीमतों में भारी अंतर ने जांच एजेंसी का ध्यान आकर्षित किया है। कुछ ही महीनों में कीमत करीब 20 गुना बढ़ने से सवाल उठ रहे हैं कि जमीन का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया और क्या इस सौदे में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई।
कुछ महीनों में जमीन की कीमत करीब 20 गुना बढ़ी
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, डेवलपर्स ने कृषि भूमि लगभग ₹15 लाख प्रति एकड़ की दर से खरीदी थी। बाद में फरवरी 2026 में इसे करीब ₹3 करोड़ प्रति एकड़ की दर से पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन को बेच दिया गया।
इस तरह जमीन की कथित खरीद और बिक्री की कीमत में करीब 20 गुना का अंतर सामने आया है। इतने कम समय में कीमत में हुई इस वृद्धि को मामले का प्रमुख पहलू माना जा रहा है।
ईडी इस बात की जांच कराना चाहती है कि जमीन खरीदने और बाद में क्रिकेट एसोसिएशन को ऊंची कीमत पर बेचने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं। साथ ही, यह भी पता लगाने की जरूरत है कि जमीन की कीमत तय करने में किन कारकों को आधार बनाया गया था।
हालांकि, केवल खरीद और बिक्री की कीमतों में अंतर होना अपने आप में किसी आपराधिक गतिविधि का प्रमाण नहीं है। जांच में जमीन की वास्तविक बाजार कीमत, उसकी भौगोलिक स्थिति, विकास की संभावनाओं, संबंधित अनुमतियों और सौदे की शर्तों की पड़ताल करना आवश्यक होगा।
ईडी ने प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की
प्रवर्तन निदेशालय ने संबंधित जांच एजेंसी या पुलिस से मामले में एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच करने की मांग की है। इसका उद्देश्य जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े तथ्यों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराना है।
प्रस्तावित जांच में जमीन खरीदने की प्रक्रिया, बाद में हुई बिक्री, दोनों सौदों के बीच की अवधि और कीमत में भारी अंतर के आधार की पड़ताल की जा सकती है। इसके अलावा, लेन-देन से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि पूरी प्रक्रिया लागू कानूनों और नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
ईडी की इस पहल से सौदे में संभावित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एजेंसी की चिंता सामने आई है। यदि सक्षम प्राधिकारी एफआईआर दर्ज करने का आदेश देते हैं, तो संबंधित एजेंसियां मामले के तथ्यों की जांच कर सकेंगी और यह निर्धारित करने का प्रयास करेंगी कि किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर डेवलपर्स या पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ किसी गलत काम को साबित हुआ नहीं माना जा सकता। सौदे की परिस्थितियों और जमीन की कीमत में हुई वृद्धि के कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
जमीन के मूल्यांकन और लेन-देन की होगी पड़ताल
इस मामले का प्रमुख सवाल जमीन की कथित खरीद कीमत और पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन को उसकी बिक्री के लिए तय की गई कीमत के बीच का बड़ा अंतर है।
बताया गया है कि अगस्त से नवंबर 2025 के बीच जमीन करीब ₹15 लाख प्रति एकड़ में खरीदी गई थी, जबकि फरवरी 2026 में इसे लगभग ₹3 करोड़ प्रति एकड़ में बेच दिया गया। दोनों सौदों के बीच कम समय का अंतर होने के कारण मूल्यांकन की प्रक्रिया और वित्तीय लेन-देन की परिस्थितियों पर सवाल उठ रहे हैं।
विस्तृत जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन की कीमत में वृद्धि के पीछे कोई वैध व्यावसायिक या विकास संबंधी कारण था अथवा सौदे में ऐसी अनियमितताएं हुईं जिन पर कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।
एफआईआर दर्ज होने की स्थिति में यह मामले के तथ्यों का औपचारिक रूप से पता लगाने की दिशा में अगला कदम होगा। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही यह तय किया जा सकेगा कि किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या आगे कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
अमृतसर में जमीन खरीद से जुड़ा यह सौदा अब ईडी की जांच संबंधी मांग के कारण चर्चा में है। फिलहाल, जमीन की वास्तविक कीमत, खरीद-बिक्री की शर्तों और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की पुष्टि होना बाकी है।
