FIITJEE के 32 coaching centres बंद होने से 14,411 छात्रों के प्रभावित होने और ₹85.79 करोड़ की फीस के कथित दुरुपयोग मामले में ED ने company और उसके directors के खिलाफ prosecution complaint दाखिल की है।

एफआईआईटीजेई पर ₹85.79 करोड़ की फीस के कथित दुरुपयोग का आरोप, ईडी ने कंपनी और निदेशकों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

Team The420
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गाजियाबाद। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थान एफआईआईटीजेई (FIITJEE) पर छात्रों की फीस के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 15 अक्टूबर को कंपनी और उसके निदेशकों दिनेश कुमार गोयल तथा मोनिला गोयल के खिलाफ गाजियाबाद स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की। ईडी ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ जांच के दौरान जब्त और अस्थायी रूप से कुर्क की गई ₹71.88 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है।

जांच एजेंसी के अनुसार, मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच एफआईआईटीजेई के 32 कोचिंग सेंटर अचानक बंद हो गए थे। इससे 14,411 छात्र प्रभावित हुए, जिन्होंने पढ़ाई के लिए फीस जमा की थी, लेकिन उन्हें वादा किया गया कोचिंग कार्यक्रम नहीं मिल सका। ईडी का आरोप है कि संस्थान ने छात्रों से अग्रिम फीस लेने के बावजूद अपनी शैक्षणिक सेवाएं उपलब्ध नहीं कराईं और फीस की रकम का कथित तौर पर दुरुपयोग किया।

चार एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच

ईडी ने इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में दर्ज चार एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इनमें से तीन एफआईआर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश पुलिस ने दर्ज की थीं, जबकि चौथी भोपाल में मध्य प्रदेश पुलिस ने दर्ज की थी।

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शिकायतों में आरोप लगाया गया कि संस्थान ने जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की दो से चार साल की कोचिंग के लिए प्रत्येक छात्र से ₹2.80 लाख से ₹3.50 लाख तक अग्रिम फीस ली थी। इसके बाद कई केंद्रों में शिक्षकों ने वेतन का भुगतान नहीं होने के कारण संस्थान छोड़ दिया और कोचिंग सेंटर बंद हो गए।

ईडी का दावा है कि प्रबंधन को शिक्षकों के संस्थान छोड़ने और कोचिंग कार्यक्रमों को पूरा करने में आ रही दिक्कतों की जानकारी थी। इसके बावजूद छात्रों का दाखिला जारी रखा गया। एजेंसी ने ₹85.79 करोड़ की छात्र फीस को कथित अपराध से अर्जित आय के रूप में चिह्नित किया है। यह रकम धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच के दायरे में है।

मार्च 2029 तक के पाठ्यक्रमों में भी दाखिले का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, संस्थान ने ऐसे पाठ्यक्रमों में भी छात्रों का दाखिला जारी रखा, जिनकी अवधि मार्च 2029 तक निर्धारित थी। ईडी का आरोप है कि प्रबंधन को इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने की अपनी क्षमता को लेकर जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद फीस लेना जारी रखा गया।

इस मामले में नोएडा पुलिस पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिसमें दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को आरोपी बनाया गया है। पुलिस की जांच में करीब 300 पीड़ितों, कोचिंग सेंटर संचालकों और अन्य गवाहों के बयान शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा फीस की रसीदों और अन्य दस्तावेजों को भी साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है।

निदेशकों को ₹24.92 करोड़ वेतन देने का आरोप

ईडी ने आरोप लगाया है कि कंपनी पर नियंत्रण रखने वाले दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल ने वित्त वर्ष 2022-23 से आगे की अवधि में वेतन के रूप में कुल ₹24.92 करोड़ प्राप्त किए। एजेंसी के अनुसार, गोयल परिवार की कंपनी में 86.31 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इससे निदेशकों को अपने पारिश्रमिक को मंजूरी देने में स्वतंत्र निगरानी की कमी का लाभ मिलने का आरोप है।

ईडी के मुताबिक, कर्मचारियों को वेतन मिलने में देरी हो रही थी या उनका भुगतान नहीं किया जा रहा था, जबकि निदेशकों को भुगतान जारी रहा। जांच में दिनेश कुमार गोयल का मासिक वेतन करीब ₹56 लाख और मोनिला गोयल का मासिक वेतन ₹25 लाख से अधिक बताया गया है।

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि मोनिला गोयल नियमित रूप से कार्यालय नहीं आती थीं और घर से ही चेक पर हस्ताक्षर करती थीं। कोचिंग सेंटर बंद होने के दौरान भी उन्हें भुगतान किए जाने की बात जांच में सामने आने का दावा किया गया है।

छापेमारी में नकदी और आभूषण जब्त

ईडी ने 24 अप्रैल 2025 को सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान ₹10 लाख नकद और ₹4.86 करोड़ मूल्य के आभूषण जब्त किए गए। इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को एजेंसी ने पीएमएलए के तहत ₹66.92 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया।

अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद अब मामले में अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। ईडी ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और संबंधित संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। हालांकि, फीस के दुरुपयोग, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में होनी बाकी है। आरोपियों की दोषसिद्धि और संपत्तियों की अंतिम जब्ती पर निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

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