पुणे में शेयर बाजार और IPO में अच्छे रिटर्न का झांसा देकर 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर से ₹6.58 लाख की कथित ठगी हुई।

अच्छे रिटर्न के लालच में फंसा टेक्नोक्रेट, शेयर बाजार के नाम पर ₹6.58 लाख की ठगी

Team The420
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पुणे। शेयर बाजार में निवेश कर अच्छा मुनाफा कमाने के लालच में 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर कथित साइबर ठगी का शिकार हो गया। आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए उससे संपर्क कर शेयर और आईपीओ में आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिया। इसके बाद उसे एक मैसेजिंग ऐप पर बनाए गए निवेश समूह में जोड़ा गया, जहां नियमित रूप से शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी और निवेश संबंधी सुझाव दिए जाते थे। धीरे-धीरे भरोसा कायम करने के बाद अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹6.58 लाख ट्रांसफर कराने का आरोप है।

हिंजवड़ी इलाके के रहने वाले इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने शेयर बाजार में निवेश करने के लिए सोशल मीडिया पर ब्रोकरेज फर्मों की तलाश शुरू की थी। इसी दौरान वह एक ऐसे कथित निवेश मंच के संपर्क में आया, जिसने शेयरों और आईपीओ में निवेश के जरिए बेहतर रिटर्न का दावा किया था। शुरुआती बातचीत में आरोपियों ने उसे बाजार से जुड़ी जानकारियां और निवेश के सुझाव दिए।

इसके बाद पीड़ित को एक मैसेजिंग ऐप के निवेश समूह में शामिल किया गया। समूह में शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, अलग-अलग कंपनियों के शेयर और आईपीओ से जुड़ी जानकारियां साझा की जाती थीं। आरोप है कि इस तरीके से पीड़ित को यह भरोसा दिलाया गया कि वह किसी वास्तविक निवेश मंच से जुड़ा है और उसके पैसे सुरक्षित तरीके से निवेश किए जा रहे हैं।

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भरोसा कायम होने के बाद आरोपियों ने उसे अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करने के लिए कहा। पीड़ित ने उनके बताए खातों में कुल ₹6.58 लाख ट्रांसफर कर दिए। उसे उम्मीद थी कि निवेश की गई रकम पर अच्छा रिटर्न मिलेगा और समय के साथ उसकी राशि बढ़ेगी। हालांकि, निर्धारित समय बीतने के बाद भी उसे न तो कथित मुनाफा मिला और न ही उसकी मूल रकम वापस की गई।

रकम वापस नहीं मिलने पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने आरोपियों से संपर्क किया। उसने अपने निवेश की स्थिति और रिटर्न के बारे में जानकारी मांगी और पैसे वापस करने की मांग की। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने उसे डराना शुरू कर दिया।

पीड़ित को कथित तौर पर बताया गया कि यदि उसने अपनी रकम वापस लेने के लिए दबाव बनाया तो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी की ओर से उसके खिलाफ जांच शुरू हो सकती है। उसे यह भी डराया गया कि निवेश से जुड़े मामले में उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। आरोपियों ने कथित तौर पर इसी डर का इस्तेमाल करते हुए रकम लौटाने से इनकार कर दिया।

लगातार दबाव और धमकियों के बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह निवेश के नाम पर चल रही कथित साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। इसके बाद उसने हिंजवड़ी पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पीड़ित के बैंक खातों से हुए लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच में उन बैंक खातों की भूमिका अहम मानी जा रही है, जिनमें पीड़ित से रकम ट्रांसफर कराई गई। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये खाते किन लोगों के नाम पर हैं और रकम जमा होने के बाद उसे आगे किन खातों में भेजा गया। जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि क्या इन खातों का इस्तेमाल अन्य लोगों से ठगी की रकम हासिल करने के लिए किया गया।

पुलिस सोशल मीडिया पर पीड़ित से संपर्क करने वाले लोगों और मैसेजिंग ऐप पर बनाए गए निवेश समूह की भी जांच कर रही है। आरोपियों ने शेयर और आईपीओ से जुड़ी जानकारी देकर किस तरह पीड़ित का भरोसा जीता, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। डिजिटल बातचीत, निवेश संबंधी संदेश और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर कथित ठगी के पूरे तरीके को समझने की कोशिश की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस कथित निवेश गिरोह में कितने लोग शामिल हैं और क्या अन्य निवेशकों को भी इसी तरीके से निशाना बनाया गया है। बैंक लेनदेन और डिजिटल संपर्कों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

प्रारंभिक तौर पर मामला शेयर बाजार में आकर्षक रिटर्न का लालच देकर निवेशकों को फंसाने और बाद में रकम वापस मांगने पर सेबी जांच या जुर्माने का डर दिखाकर दबाव बनाने के तरीके से जुड़ा माना जा रहा है। पुलिस अब पैसों के लेनदेन की कड़ी जोड़कर कथित ठगी के पीछे सक्रिय लोगों की पहचान करने में जुटी है।

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