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पैन कार्ड फ्रॉड का बढ़ता खतरा: बिना लोन लिए भी बिगड़ रहा क्रेडिट स्कोर, देशभर में नए साइबर अपराध का खुलासा

Team The420
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देश में पैन कार्ड के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जहां कई लोगों के नाम पर बिना उनकी जानकारी के फर्जी लोन लिए जा रहे हैं। इसका सीधा असर उनके क्रेडिट स्कोर पर पड़ रहा है, जिससे आम लोगों को बैंकिंग, लोन और वित्तीय सेवाओं में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह नया साइबर फ्रॉड ट्रेंड अब एक बड़े खतरे के रूप में उभर रहा है, जिसमें पहचान चोरी के जरिए लोगों के वित्तीय जीवन को प्रभावित किया जा रहा है।

पैन कार्ड अब केवल टैक्स से जुड़ा दस्तावेज नहीं रह गया है, बल्कि यह बैंकिंग और वित्तीय पहचान का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। बैंक, एनबीएफसी और डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म किसी भी तरह के लोन, क्रेडिट कार्ड या वित्तीय सेवा के लिए पैन को अनिवार्य रूप से उपयोग करते हैं। इसी कारण, यदि किसी व्यक्ति का पैन डेटा गलत हाथों में चला जाता है, तो उसका दुरुपयोग करना साइबर अपराधियों के लिए बेहद आसान हो जाता है। डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग के साथ यह जोखिम और अधिक बढ़ गया है।

जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधी पहले डेटा लीक, फिशिंग लिंक, नकली वेबसाइटों और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करते हैं। इसके बाद पैन कार्ड, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और अन्य दस्तावेजों को जोड़कर एक फर्जी पहचान तैयार की जाती है। इस पहचान के आधार पर डिजिटल केवाईसी पूरी की जाती है और बैंक या एनबीएफसी से लोन स्वीकृत कर लिया जाता है। कई मामलों में पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगती।

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सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब यह फर्जी लोन क्रेडिट ब्यूरो जैसे ट्रांसयूनियन सिबिल, एक्सपीरियन या इक्विफैक्स में दर्ज हो जाता है। इसके बाद असली व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर अचानक गिरने लगता है। कई बार उसे तब पता चलता है जब बैंक से रिकवरी कॉल आने लगते हैं या नया लोन लेने में समस्या आती है। यह पूरा फ्रॉड महीनों तक बिना पकड़े चलता रहता है, जिससे नुकसान और बढ़ जाता है।

यह धोखाधड़ी केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे व्यक्ति का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड प्रभावित हो जाता है। टैक्स फाइलिंग, लोन पात्रता और बैंकिंग सेवाओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है। कई मामलों में पीड़ित को कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फ्रॉड धीरे-धीरे पहचान आधारित अपराध का बड़ा रूप ले रहा है।

इस विषय पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा, “आज के समय में पैन और आधार डेटा सबसे संवेदनशील डिजिटल संपत्ति बन चुके हैं। साइबर अपराधी इन्हीं दस्तावेजों के जरिए फर्जी पहचान बनाकर पूरी वित्तीय व्यवस्था को निशाना बना रहे हैं। यदि लोग नियमित रूप से अपने क्रेडिट रिकॉर्ड की जांच नहीं करेंगे तो इस तरह के फ्रॉड का पता लगाना बहुत देर से होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जागरूकता और डिजिटल सावधानी ही इसका सबसे प्रभावी समाधान है।

इस संदर्भ में Future Crime Research Foundation की रिपोर्ट और शोध भी लगातार इस खतरे की ओर ध्यान दिला रहे हैं। फाउंडेशन के अनुसार, भारत में डिजिटल पहचान आधारित अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और आने वाले वर्षों में यह सबसे बड़ा वित्तीय साइबर खतरा बन सकता है। संस्था का मानना है कि डेटा सुरक्षा, जागरूकता अभियान और तकनीकी निगरानी को मजबूत किए बिना इस समस्या पर नियंत्रण मुश्किल है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे बचाव के लिए लोगों को नियमित रूप से अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करनी चाहिए, ताकि किसी भी अनजान लोन या क्रेडिट गतिविधि का तुरंत पता चल सके। यदि क्रेडिट स्कोर में अचानक गिरावट दिखे या कोई संदिग्ध एंट्री मिले, तो तुरंत बैंक और क्रेडिट ब्यूरो को सूचित करना चाहिए। साथ ही साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करना भी जरूरी है।

इसके अलावा फॉर्म 26AS, बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल ट्रांजैक्शन की नियमित निगरानी भी जरूरी है। किसी भी अनजान वेबसाइट पर पैन या आधार विवरण साझा करने से बचना चाहिए और केवल सुरक्षित प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करना चाहिए। मजबूत पासवर्ड और दो-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली भी इस तरह के जोखिम को कम कर सकती है।

फिलहाल देशभर में इस तरह के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वित्तीय संस्थाएं इसे एक गंभीर चुनौती के रूप में देख रही हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर अपराध भी अधिक जटिल होता जा रहा है। ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और समय पर निगरानी ही इस बढ़ते खतरे से बचने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।

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