पाली: डिजिटल युग में नौकरी की तलाश अब कई युवाओं के लिए जोखिम भरा जाल बनती जा रही है। राजस्थान के पाली जिले में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवती से ₹8,03,900 की ठगी कर ली गई। यह ठगी जनवरी से मार्च 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से की गई, जिसमें ऑनलाइन लिंक, फर्जी इंटरव्यू कॉल और अलग-अलग प्रोसेस के नाम पर पैसे ऐंठे गए।
मामले के सामने आने के बाद पीड़िता ने राष्ट्रीय साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। रकम ₹5 लाख से अधिक होने के चलते जयपुर स्थित विशेष ऑपरेशन समूह (एसओजी) ने मामले में जीरो नंबर की FIR दर्ज की और जांच के लिए केस को पाली के साइबर थाना को ट्रांसफर कर दिया गया है।
जांच में सामने आया है कि पीड़िता ने एक ऑनलाइन लिंक के माध्यम से नौकरी के लिए आवेदन किया था। आवेदन के कुछ समय बाद उसे इंटरव्यू कॉल आया, जिसमें खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताने वाले व्यक्ति ने उसे चयन प्रक्रिया में शामिल होने की बात कही। इसके बाद अलग-अलग चरणों—जैसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज, ट्रेनिंग फीस और दस्तावेज सत्यापन—के नाम पर पैसे जमा करवाए गए।
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ठगों ने बेहद पेशेवर तरीके से बातचीत की और हर चरण पर भरोसा दिलाया कि भुगतान पूरा होने के बाद नौकरी सुनिश्चित हो जाएगी। इसी भरोसे में आकर युवती ने बार-बार ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए रकम भेजी। करीब तीन महीने तक यह सिलसिला चलता रहा और कुल मिलाकर ₹8 लाख से अधिक की राशि ठगों के खातों में चली गई।
काफी समय बीतने के बाद जब युवती को नौकरी नहीं मिली और सामने से संपर्क भी कम होने लगा, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पूरे मामले की जानकारी जुटाई और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाई।
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में अपराधी अक्सर नकली वेबसाइट, फर्जी ईमेल आईडी और वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी पहचान छिपी रहती है। पैसे की लेनदेन भी कई अलग-अलग बैंक खातों में करवाई जाती है, ताकि जांच एजेंसियों को ट्रैक करने में मुश्किल हो।
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस ठगी के पीछे एक संगठित साइबर गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो देशभर में बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा है। ऐसे गिरोह सोशल मीडिया, जॉब पोर्टल और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंच बनाते हैं और उन्हें आकर्षक ऑफर देकर फंसाते हैं।
साइबर थाना पाली की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और उन खातों से आगे कहां भेजी गई। इसके साथ ही संबंधित बैंकिंग ट्रेल, मोबाइल नंबर और डिजिटल सबूतों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जॉब स्कैम में सोशल इंजीनियरिंग की बड़ी भूमिका होती है। ठग पहले पीड़ित का भरोसा जीतते हैं और फिर धीरे-धीरे आर्थिक शोषण शुरू करते हैं। वे ऐसे हालात पैदा करते हैं कि व्यक्ति को लगे कि थोड़ी और रकम देने से नौकरी पक्की हो जाएगी।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी नौकरी के नाम पर पहले से पैसे मांगने वाले प्रस्तावों से सावधान रहें। किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या ईमेल पर तुरंत भरोसा न करें और आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि जरूर करें।
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और समय पर शिकायत दर्ज कराना ही सबसे बड़ा बचाव है।
