भुवनेश्वर। डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रही साइबर ठगी ने आम लोगों की बचत और भरोसे दोनों को झटका दिया है। पिछले 18 महीनों में ओडिशा में साइबर अपराधियों ने 76,794 लोगों को निशाना बनाकर लगभग ₹712 करोड़ की ठगी कर ली। यह चौंकाने वाला खुलासा राज्य विधानसभा में सरकार द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों में सामने आया, जिसने ऑनलाइन अपराध की बढ़ती गंभीरता पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार जून 2024 से दिसंबर 2025 के बीच राज्य में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर हजारों शिकायतें दर्ज हुईं और कई मामलों में बड़ी रकम ऑनलाइन ठगों के हाथ लग गई।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून से दिसंबर 2024 के बीच NCRP पर 27,368 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें लोगों को लगभग ₹279.71 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके बाद वर्ष 2025 में शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़कर 49,426 तक पहुंच गई और ठगी की रकम ₹432.28 करोड़ तक जा पहुंची। इस तरह कुल 18 महीनों में दर्ज शिकायतों की संख्या 76 हजार से अधिक हो गई और नुकसान का आंकड़ा ₹712 करोड़ के पार चला गया।
हालांकि इन मामलों में कुछ हद तक राहत भी मिली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पीड़ितों को करीब ₹8 करोड़ की राशि वापस दिलाई गई, जबकि लगभग ₹92 करोड़ की रकम समय रहते विभिन्न खातों में फ्रीज कर दी गई। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि साइबर अपराध के मामलों में ठगी गई कुल रकम की तुलना में रिकवरी का अनुपात अभी भी बेहद कम है।
सरकारी जवाब में यह भी बताया गया कि राज्य में अलग से दर्ज साइबर मामलों में 2,482 वित्तीय धोखाधड़ी के मामले सामने आए, जिनमें लगभग ₹259 करोड़ की ठगी दर्ज की गई। इसके अलावा 1,689 सोशल मीडिया फ्रॉड के मामले दर्ज हुए, जिनमें करीब ₹1.28 करोड़ का नुकसान हुआ। इसी अवधि में हैकिंग से जुड़े 14 मामले सामने आए, जिनमें करीब ₹8.5 लाख की ठगी हुई, जबकि अन्य प्रकार के 53 मामलों में करीब ₹23 लाख की रकम का नुकसान दर्ज किया गया।
इन मामलों में जांच के दौरान करीब ₹61.36 लाख की राशि वापस कराई गई, जबकि लगभग ₹8.9 करोड़ की रकम संदिग्ध खातों में फ्रीज कर दी गई। अधिकारियों का कहना है कि NCRP पर दर्ज अधिकांश शिकायतें बाद में स्थानीय थानों के रिकॉर्ड में भी शामिल हो जाती हैं, इसलिए वास्तविक मामलों की संख्या कई बार overlapping के कारण अलग-अलग श्रेणियों में दिखाई देती है।
आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी स्पष्ट होता है कि राज्य में साइबर अपराध लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2023 में 2,348 मामले, 2024 में 2,501 मामले, जबकि 2025 में 2,803 मामले दर्ज किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराधियों को नए अवसर मिल रहे हैं।
इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाने का दावा किया है। राज्य में फिलहाल 34 साइबर पुलिस स्टेशन संचालित किए जा रहे हैं, जहां डिजिटल अपराधों की जांच के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई है। इसके अलावा कई कर्मियों को साइबर जांच से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग भी दी गई है और जागरूकता अभियान चलाए गए हैं ताकि लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी से बच सकें।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार आजकल ठग सोशल इंजीनियरिंग, फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल, निवेश स्कीम, केवाईसी अपडेट और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। कई मामलों में अपराधी नकली बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या तकनीकी सहायता एजेंट बनकर पीड़ितों को गुमराह करते हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं कि आज के अधिकांश साइबर अपराध तकनीकी हैकिंग से नहीं बल्कि सोशल इंजीनियरिंग के जरिए होते हैं। उनके अनुसार अपराधी पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें खुद ही संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए मजबूर कर देते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेन-देन के दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है और किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऐप से सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में साइबर अपराध का खतरा और बढ़ सकता है। इसलिए आम लोगों को सतर्क रहने के साथ-साथ किसी भी ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या संबंधित पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते रकम को रोका या वापस दिलाया जा सके।
