भुवनेश्वर। ओडिशा में सरकारी आवासीय विद्यालयों के लेखा परीक्षण के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप में दो सरकारी ऑडिटर सतर्कता विभाग की कार्रवाई में फंस गए। आरोप है कि दोनों ऑडिटर विद्यालयों में दर्ज प्रत्येक छात्र के हिसाब से ₹10 की रकम मांग रहे थे। कथित तौर पर यह राशि स्कूल और छात्रावास के खातों में मिली गड़बड़ियों को नियमित करने और लेखा परीक्षण को सुचारु रूप से पूरा करने के बदले मांगी जा रही थी। कार्रवाई के दौरान दोनों के कब्जे और होटल के कमरों से कुल ₹14,38,340 नकद बरामद हुआ।
सतर्कता विभाग के अनुसार, दोनों ऑडिटर अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के अधीन संचालित आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों का लेखा परीक्षण करने के लिए मयूरभंज जिले के बारीपदा में तैनात थे। वे 30 अगस्त से बारीपदा में रहकर अपना काम कर रहे थे। शुरुआत में दोनों ने जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय का लेखा परीक्षण किया और इसके बाद आवासीय विद्यालयों के छात्रावासों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
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लेखा परीक्षण के लिए दोनों ने विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और प्रभारी अधिकारियों को बारीपदा स्थित जिला मुख्यालय पर स्कूल और छात्रावासों की फाइलें, रजिस्टर तथा अन्य दस्तावेज लेकर आने को कहा था। इसी दौरान उनके खिलाफ कथित तौर पर रिश्वत मांगने की शिकायतें सतर्कता विभाग तक पहुंचीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि विद्यालय और छात्रावास अधिकारियों से प्रत्येक नामांकित छात्र के आधार पर ₹10 मांगे जा रहे हैं।
शिकायत की पुष्टि के बाद सतर्कता अधिकारियों ने दोनों की गतिविधियों पर नजर रखी। 10 सितंबर की देर रात दोनों ऑडिटर जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय से अपना काम पूरा करने के बाद होटल लौट रहे थे। इसी दौरान सतर्कता टीम ने उन्हें रोककर तलाशी ली। उनके पास 52 लिफाफों और 20 खुले नकदी बंडलों में कुल ₹5,51,510 मिले।
अधिकारियों के मुताबिक, बरामद रकम के स्रोत और उद्देश्य के बारे में दोनों संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद उनके होटल के कमरों की तलाशी ली गई। वहां से ₹8,86,830 की अतिरिक्त नकदी बरामद हुई। इस रकम का भी संतोषजनक हिसाब नहीं मिलने पर दोनों स्थानों से बरामद कुल ₹14,38,340 को जब्त कर लिया गया।
सतर्कता विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से आई और क्या इसका संबंध कथित रिश्वत की मांग से है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि प्रति छात्र ₹10 की कथित मांग के आधार पर कितने विद्यालयों से रकम मांगी गई थी और क्या किसी विद्यालय या छात्रावास प्रबंधन ने वास्तव में भुगतान किया था।
आय से अधिक संपत्ति की जांच भी शुरू
नकदी बरामद होने के बाद मामला आय से अधिक संपत्ति की जांच की दिशा में भी बढ़ाया गया है। सतर्कता विभाग की टीमें दोनों ऑडिटरों के आवास और कार्यालय परिसरों की तलाशी ले रही हैं। जांच के दौरान उनकी संपत्तियों, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि दोनों ऑडिटरों ने कथित अवैध आय से कोई संपत्ति या अन्य निवेश तो नहीं किया। इसके अलावा उन विद्यालयों और छात्रावासों के अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है, जिनका लेखा परीक्षण दोनों कर रहे थे।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कथित रिश्वत की रकम किसी एक फाइल या काम के लिए तय किए जाने के बजाय प्रत्येक छात्र की संख्या के आधार पर मांगे जाने का आरोप है। अब सतर्कता विभाग बरामद नकदी और लेखा परीक्षण से जुड़े दस्तावेजों के बीच संबंध की जांच कर रहा है। आरोपों की पुष्टि होने पर दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति से संबंधित मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
