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नॉर्वे में कैमरा वाले स्मार्ट चश्मों पर प्रतिबंध की तैयारी, निजता को लेकर बढ़ी चिंता

Roopa
By Roopa
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ओस्लो। नॉर्वे सरकार कैमरा और इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले स्मार्ट चश्मों तथा अन्य पहनने योग्य उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही है। सरकार का यह कदम ऐसे उपकरणों से जुड़ी निजता संबंधी चिंताओं के बीच सामने आया है। इन उपकरणों में कैमरे और माइक्रोफोन लगे होते हैं और भविष्य में इनमें चेहरे की पहचान जैसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुविधाएं भी शामिल की जा सकती हैं।

नॉर्वे की डिजिटल मंत्री करियाने तुंग ने कहा है कि सरकार कैमरा-सक्षम पहनने योग्य उपकरणों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए नए नियमों पर विचार कर रही है। इनमें मेटा और स्नैप जैसी कंपनियों के स्मार्ट चश्मे भी शामिल हैं। इन उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर नागरिक स्वतंत्रता और निजता अधिकारों से जुड़े समूह पहले ही चिंता जता चुके हैं।

सरकार के अनुसार, स्मार्ट चश्मे और अन्य पहनने योग्य उपकरण पारंपरिक कैमरों की तुलना में अलग तरह की निजता चुनौती पैदा करते हैं। इन्हें पहनकर कोई व्यक्ति आसपास मौजूद लोगों की तस्वीरें या वीडियो बिना उनकी जानकारी के रिकॉर्ड कर सकता है। चूंकि ये उपकरण इंटरनेट से जुड़े होते हैं, इसलिए रिकॉर्ड की गई सामग्री को तुरंत दूसरे उपकरणों या ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंचाया जा सकता है।

तुंग ने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को कैमरों और माइक्रोफोन के साथ जोड़ने का स्पष्ट रुझान दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, चश्मे, हेडफोन, टोपी और अन्य उपकरणों में ऐसी तकनीक तेजी से शामिल हो रही है, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की निगरानी का जोखिम बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन उपकरणों का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थानों पर दूसरे लोगों की निगरानी के लिए न किया जाए। संभावित नियमों में सार्वजनिक स्थानों पर अन्य लोगों की चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के इस्तेमाल पर रोक भी शामिल हो सकती है।

नॉर्वे सरकार इस मुद्दे पर विशेषज्ञों का एक समूह गठित करने की भी योजना बना रही है। यह समूह नागरिकों की निजता और अधिकारों की बेहतर सुरक्षा के लिए सरकार को सुझाव देगा। सरकार का उद्देश्य नई तकनीक के विकास को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल से पैदा होने वाले निजता संबंधी जोखिमों को नियंत्रित करना है।

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स्मार्ट चश्मों को लेकर दुनिया के कई देशों में पहले से ही निजता और सुरक्षा पर बहस चल रही है। कैमरा-सक्षम चश्मे सामान्य चश्मों की तरह दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इनमें वीडियो रिकॉर्डिंग, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अन्य डिजिटल सुविधाएं शामिल होती हैं। इससे किसी व्यक्ति के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि उसे कब रिकॉर्ड किया जा रहा है।

तकनीक के जानकारों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ कैमरा और माइक्रोफोन को जोड़ने से इन उपकरणों की क्षमता और बढ़ सकती है। यदि चेहरे की पहचान जैसी सुविधाएं बड़े पैमाने पर उपलब्ध होती हैं, तो सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की पहचान करने, उनकी गतिविधियों पर नजर रखने और उनके बारे में जानकारी जुटाने की क्षमता भी बढ़ सकती है।

नॉर्वे में प्रस्तावित कदम ऐसे समय में सामने आया है जब स्मार्ट चश्मों को स्मार्टफोन के संभावित विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है। कंपनियां इन उपकरणों को हाथों से मुक्त डिजिटल अनुभव देने वाले उपकरण के रूप में पेश कर रही हैं। हालांकि, इनके व्यापक इस्तेमाल से यह सवाल भी उठ रहा है कि तकनीकी सुविधा और व्यक्तिगत निजता के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।

सरकार द्वारा गठित किए जाने वाले विशेषज्ञ समूह की सिफारिशों के आधार पर आगे के नियम तय किए जा सकते हैं। इनमें कैमरा-सक्षम उपकरणों के इस्तेमाल, सार्वजनिक स्थानों पर रिकॉर्डिंग और चेहरे की पहचान जैसी तकनीकों के उपयोग के लिए स्पष्ट सीमाएं तय किए जाने की संभावना है।

नॉर्वे का प्रस्ताव इस व्यापक बहस का हिस्सा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पहनने योग्य तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोगों की निजता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। आने वाले समय में स्मार्ट चश्मों और ऐसे अन्य उपकरणों के लिए अधिक सख्त नियमों की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है

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