नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की एक विशेष अदालत को बताया है कि महाराष्ट्र के लातूर स्थित एक बाल रोग विशेषज्ञ ने कथित तौर पर NEET-UG अभ्यर्थी के परिवार से ₹5 लाख की रिश्वत लेकर परीक्षा से पहले उसे रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) का प्रश्नपत्र दिखाया था। यह आरोप एजेंसी ने आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना शेष है।
सीबीआई के अनुसार, आरोपी डॉ. मनोज भगवानराव शिररे ने कथित रूप से अभ्यर्थी के परिवार से रिश्वत लेने के बाद अपने अस्पताल में परीक्षा से पहले अभ्यर्थी को लीक हुआ केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र दिखाया। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह कृत्य कथित NEET-UG पेपर लीक साजिश का हिस्सा था।
विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता के समक्ष सुनवाई के दौरान सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. शिररे ने दो अन्य डॉक्टरों को सह-आरोपी पी. वी. कुलकर्णी के पास भेजा था। एजेंसी के अनुसार, उन दोनों डॉक्टरों के बच्चों को भी कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला।
सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत से कहा कि जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का समर्थन करते हैं। एजेंसी का दावा है कि आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण थी और वह परीक्षा से पहले गोपनीय प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने वाले एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।
अदालत ने जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है और आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच देश के विभिन्न राज्यों में जारी है। केंद्रीय जांच एजेंसियां कथित साजिश में शामिल बिचौलियों, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही हैं। इसके साथ ही वित्तीय लेनदेन, डिजिटल साक्ष्य और संचार रिकॉर्ड का विश्लेषण कर धन के प्रवाह और पूरे नेटवर्क की कड़ियों का पता लगाया जा रहा है।
सीबीआई ने कहा है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि आरोपी के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और इस स्तर पर किसी की दोषसिद्धि के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
