नालासोपारा (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के पालघर जिले के नालासोपारा क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के सहारे बीमा कमीशन और अवैध दावों का एक संगठित नेटवर्क उजागर हुआ है, जिसमें एक डॉक्टर सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
यह कार्रवाई एक औचक निरीक्षण अभियान के दौरान सामने आई, जब अवैध सोनोग्राफी और गर्भपात केंद्रों पर चल रही निगरानी के तहत एक टीम ने संबंधित अस्पताल पर छापा मारा। शुरुआती पूछताछ में कर्मचारियों ने गोलमोल जवाब दिए और अस्पताल को अस्थायी रूप से बंद बताने की कोशिश की, लेकिन गहन तलाशी के बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।
तलाशी के दौरान अधिकारियों को 70 से 80 से अधिक फर्जी लेटरहेड, विभिन्न अस्पतालों के नाम पर तैयार किए गए नकली इन-पेशेंट डिपार्टमेंट (IPD) रिकॉर्ड, और कई फर्जी मेडिकल फॉर्म बरामद हुए, जिनका इस्तेमाल बीमा कंपनियों से अवैध कमीशन और क्लेम राशि प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था।
पूछताछ के दौरान आरोपी डॉक्टर ने स्वीकार किया कि वह लंबे समय से विभिन्न अस्पतालों के नाम पर फर्जी फाइलें तैयार कर बीमा क्लेम और कमीशन हासिल कर रहा था। छापेमारी के दौरान आरोपी मौके से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज लेकर फरार हो गया, जिसके बाद उसकी तलाश तेज कर दी गई है।
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जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल परिसर से कंप्यूटर, प्रिंटर, उपस्थिति रजिस्टर और बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेजों के प्रारूप जब्त किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह गतिविधि केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक संगठित नेटवर्क की तरह संचालित की जा रही थी। पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि यह रैकेट लंबे समय से सक्रिय था और कई निजी अस्पतालों एवं फर्जी मेडिकल कागजातों के माध्यम से बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क में कुछ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान और भूमिका की जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में फर्जी पहचान, कागजात और संस्थागत नामों का दुरुपयोग कर लोगों को लंबे समय तक भ्रमित रखा जाता है, जिससे न केवल बीमा कंपनियों को बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है।
इस तरह के फर्जीवाड़े के मामलों का सीधा असर आम जनता और बीमा प्रणाली दोनों पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे रैकेट बीमा प्रीमियम की लागत बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर अविश्वास भी पैदा करते हैं। अस्पतालों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर क्लेम उठाने की प्रवृत्ति से ईमानदार चिकित्सा संस्थानों की छवि भी प्रभावित होती है।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े थे और कितने अस्पतालों के नाम का इस्तेमाल किया गया। यह जांच कई जिलों तक फैले नेटवर्क को भी उजागर कर सकती है। मामले को संगठित आर्थिक अपराध के रूप में भी देखा जा रहा है और इसके वित्तीय लेन-देन की भी गहराई से जांच की जा रही है।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और पुलिस का कहना है कि सभी डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज और बैंक लेन-देन की जांच के बाद पूरे नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने लाई जाएगी। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अभी जांच जारी है।
