मुजफ्फरपुर में साइबर ठगों ने पटना हाई कोर्ट का जज बनकर ट्रांसपोर्टर से ₹20 लाख की ठगी की, पुलिस डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है।

जज बनकर 20 लाख की ठगी: साइबर गिरोह ने ट्रांसपोर्टर को बनाया शिकार, ‘तुरंत काम’ के बहाने उड़ाए पैसे

Team The420
5 Min Read

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को पटना हाई कोर्ट का जज बताकर एक ट्रांसपोर्टर से करीब ₹20 लाख की ठगी कर ली। इस हाई-प्रोफाइल अंदाज में की गई वारदात ने न केवल आम लोगों, बल्कि अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े की शुरुआत एक सुनियोजित तरीके से की गई। ठग ने पहले एक परिवहन अधिकारी से संपर्क साधा और खुद को उच्च न्यायिक पद पर आसीन बताते हुए भरोसा जीत लिया। इसके बाद उसने एक विश्वसनीय ट्रांसपोर्टर का संपर्क नंबर हासिल कर लिया।

बताया गया कि 24 अप्रैल 2026 को दिन के समय परिवहन विभाग के एक अधिकारी के मोबाइल पर कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पटना हाई कोर्ट का न्यायाधीश बताया और किसी आवश्यक कार्य के लिए मुजफ्फरपुर के एक भरोसेमंद ट्रांसपोर्टर का नंबर मांगा। उच्च पद का हवाला देने पर अधिकारी ने बिना संदेह किए ट्रांसपोर्टर उदय शंकर प्रसाद सिंह का मोबाइल नंबर साझा कर दिया।

FCRF Launches India’s Premier Certified Data Protection Officer Program Aligned with DPDP Act

इसके बाद ठग ने सीधे ट्रांसपोर्टर से संपर्क किया और बातचीत के दौरान खुद को जज बताते हुए एक जरूरी कार्य के लिए तत्काल पैसों की जरूरत बताई। उसने भरोसा दिलाया कि यह रकम जल्द ही लौटा दी जाएगी। अधिकार और विश्वसनीयता का आभास कराते हुए ठग ने धीरे-धीरे ट्रांसपोर्टर को अपने जाल में फंसा लिया।

सूत्रों के अनुसार, ठग ने अलग-अलग माध्यमों से कई बार में कुल ₹20 लाख ट्रांसफर करवा लिए। ट्रांसपोर्टर को इस दौरान यह यकीन दिलाया गया कि वह किसी बड़े और जरूरी सरकारी काम में सहयोग कर रहा है। लगातार बातचीत और दबाव के चलते पीड़ित को ठगी का अहसास नहीं हुआ।

हालांकि, जब पैसे ट्रांसफर होने के बाद ट्रांसपोर्टर ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो आरोपी का मोबाइल फोन बंद मिलने लगा। कई बार कॉल करने के बावजूद संपर्क न होने पर संदेह गहराया और तब जाकर पूरे मामले की सच्चाई सामने आई।

इसके बाद ट्रांसपोर्टर ने तुरंत पूरे घटनाक्रम की जानकारी संबंधित परिवहन अधिकारी को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। साइबर टीम अब कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल ट्रेल के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला साइबर अपराधियों के बदलते तरीकों को दर्शाता है, जहां वे अब केवल आम लोगों को नहीं बल्कि अधिकारियों और व्यवसायियों को भी निशाना बना रहे हैं। “प्रसिद्ध साइबर विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह” के अनुसार, इस तरह के मामलों में अपराधी सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें वे पीड़ित का भरोसा जीतकर उसे मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं और फिर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।

उन्होंने कहा कि उच्च पदों का नाम लेकर दबाव बनाना और तत्काल निर्णय लेने के लिए मजबूर करना ऐसे मामलों की आम रणनीति है। इसलिए किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले पहचान की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

इस घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें, चाहे सामने वाला खुद को कितना ही बड़ा अधिकारी क्यों न बताए।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।

यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे साइबर अपराधी नई-नई तरकीबों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और तकनीकी समझ ही इस तरह की ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

हमसे जुड़ें

Share This Article