मुंबई। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि तीनों म्यूल बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने का काम करते थे, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में भेजने और निकालने के लिए किया जाता था। जांच में अब तक आरोपियों से जुड़े 10 बैंक खातों के जरिए करीब ₹24 करोड़ के संदिग्ध साइबर ठगी लेनदेन का पता चला है, जबकि पूरे नेटवर्क का लेनदेन करीब ₹350 करोड़ का होने का संदेह है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस्लामुद्दीन सलीमुद्दीन शेख (44), यासिर नसीरुद्दीन शेख (26) और अब्दुल रज्जाक अब्दुल रऊफ (42) के रूप में हुई है। अपराध शाखा की यूनिट-5 ने तीनों को 11 सितंबर को गिरफ्तार किया। उन्हें एस्प्लेनेड अदालत में पेश किया गया, जहां से 19 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
मामले में मलाड थाने में भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, उकसावे और कई लोगों द्वारा साझा मंशा से किए गए अपराध से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) भी लगाई गई है, जो कंप्यूटर या संचार उपकरण के माध्यम से पहचान छिपाकर धोखाधड़ी से संबंधित है।
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जांच के अनुसार, आरोपी दूसरे लोगों से कमीशन देकर उनके नाम पर खुले बैंक खाते और सिम कार्ड खरीदते थे। इसके बाद इन खातों और सिम कार्ड को या तो खुद इस्तेमाल करते थे या साइबर ठगी के नेटवर्क में ऊपर स्तर पर सक्रिय लोगों को उपलब्ध कराते थे। पुलिस का आरोप है कि तीनों इस पूरी श्रृंखला में खरीदार और विक्रेता, दोनों की भूमिका निभा रहे थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी और उनके सहयोगी अपने नाम के अलावा दूसरे लोगों के नाम पर भी बैंक खाते खुलवाते या हासिल करते थे। इन खातों से जुड़े सिम कार्ड भी जुटाए जाते थे। आरोप है कि आरोपियों के पास बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेजों का नियंत्रण रहता था। इनका इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे अलग-अलग खातों में भेजने के लिए किया जाता था।
अपराध शाखा ने कार्रवाई के दौरान 88 बैंक पासबुक, 143 चेकबुक, 100 एटीएम कार्ड, 167 सिम कार्ड, 24 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और अन्य बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद सामग्री की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किन खातों और साइबर ठगी की किन घटनाओं में किया गया।
पुलिस के अनुसार, जांच में अब तक 2,898 सिम कार्ड के साइबर ठगी में इस्तेमाल होने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों से जुड़े चिन्हित बैंक खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत प्रणाली पर 32 शिकायतें भी दर्ज मिली हैं। इन शिकायतों का संबंध उन खातों से बताया गया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराध की रकम के लेनदेन में किया गया।
जांचकर्ताओं का कहना है कि 10 बैंक खातों से ही करीब ₹24 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का पता चलना नेटवर्क के व्यापक स्वरूप की ओर संकेत करता है। पुलिस अब बरामद बैंकिंग सामग्री और डिजिटल उपकरणों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है, जिससे अतिरिक्त बैंक खातों, पीड़ितों और साइबर अपराध के मामलों का पता लगाया जा सके।
अपराध शाखा अब उन लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने कथित तौर पर आरोपियों को बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराए। साथ ही उन उच्च स्तर के संचालकों की भी तलाश की जा रही है, जिन्हें ये खाते और सिम कार्ड आगे दिए जाते थे। जांच का उद्देश्य पूरे नेटवर्क की संरचना, रकम के प्रवाह और साइबर ठगी से जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचना है।
