कानपुर में राजनीतिक फंड और कमीशन का झांसा देकर स्कूल संचालक दंपती के खातों का इस्तेमाल ₹1.09 करोड़ की साइबर ठगी में किए जाने का मामला सामने आया है।

मिशन म्यूल हंटिंग’ में बड़ा खुलासा: फर्जी कंपनी बनाकर ₹100 करोड़ का साइबर फ्रॉड, डायरेक्टर गिरफ्तार

Team The420
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘मिशन म्यूल हंटिंग’ के तहत एक बड़े और संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि फर्जी कंपनी बनाकर करीब ₹100 करोड़ से अधिक का साइबर फ्रॉड अंजाम दिया गया। इस मामले में कंपनी के कथित डायरेक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस साइबर फ्रॉड का संचालन बेहद सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था, जिसमें म्यूल बैंक अकाउंट, फर्जी सिम कार्ड और शेल कंपनियों का व्यापक इस्तेमाल किया गया। आरोपी नेटवर्क लोगों को नौकरी का झांसा देकर या लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और फिर इन खातों का इस्तेमाल अवैध लेनदेन के लिए करता था।

अधिकारियों ने बताया कि ‘म्यूल अकाउंट’ ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिन्हें किसी तीसरे व्यक्ति के नाम पर खोला जाता है और उनका उपयोग साइबर अपराध में प्राप्त रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। इसी तरह, शेल कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद होती हैं और उनका उपयोग फंड ट्रांसफर तथा मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है।

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जांच के दौरान एक प्रमुख बैंक खाते की पहचान हुई, जो देशभर में दर्ज 336 साइबर फ्रॉड शिकायतों से जुड़ा पाया गया। इस खाते में संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिलने के बाद विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस एक खाते के माध्यम से ही ₹100 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह रहा कि केवल तीन दिनों के भीतर इस खाते में ₹16 करोड़ से अधिक की राशि जमा की गई। यह रकम कंपनी के घोषित कारोबार से मेल नहीं खाती थी, जिससे संदेह और गहरा गया। इसके बाद इस पैसे को अलग-अलग खातों और अन्य शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया, ताकि लेयरिंग के जरिए धन के स्रोत को छिपाया जा सके।

जांच एजेंसियों ने पाया कि इस पूरे नेटवर्क की रीढ़ म्यूल अकाउंट्स और शेल कंपनियां थीं। इनके जरिए न केवल फर्जी ट्रांजैक्शन किए जा रहे थे, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए रकम को वैध दिखाने की कोशिश भी की जा रही थी। डिजिटल भुगतान माध्यम जैसे यूपीआई, आईएमपीएस, आरटीजीएस और एटीएम चैनलों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।

तकनीकी विश्लेषण में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के तार देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े हुए हैं। आईटी सिस्टम और डेटा मॉनिटरिंग टूल्स के जरिए संदिग्ध ट्रांजैक्शन पैटर्न की पहचान की गई, जिससे पूरे रैकेट का खुलासा संभव हो सका।

अधिकारियों ने आम लोगों को चेतावनी देते हुए कहा है कि जो लोग लालच में आकर अपने बैंक खाते, केवाईसी दस्तावेज या अन्य वित्तीय जानकारी साझा करते हैं, वे भी इस तरह के अपराधों में सहभागी माने जा सकते हैं। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के साइबर फ्रॉड में तकनीक के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग का भी बड़ा रोल होता है। अपराधी पहले भरोसा जीतते हैं और फिर लोगों को झांसे में लेकर उनके बैंकिंग संसाधनों का दुरुपयोग करते हैं। यही कारण है कि जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि ‘मिशन म्यूल हंटिंग’ अभियान के तहत ऐसे सभी नेटवर्क्स को चिन्हित कर खत्म करने की कार्रवाई जारी रहेगी। आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी की संभावना है, क्योंकि जांच में लगातार नए सुराग सामने आ रहे हैं।

यह कार्रवाई एक बार फिर यह संकेत देती है कि साइबर अपराध अब छोटे स्तर तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे में कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रही हैं, ताकि इन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

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