नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने अब एक नया रूप ले लिया है। पारंपरिक सैन्य संघर्ष के साथ-साथ अब तकनीकी और आर्थिक ढांचे को भी निशाना बनाए जाने की आशंका सामने आ रही है। ईरानी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई अमेरिकी टेक कंपनियों के दफ्तर और उनके डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को संभावित लक्ष्य के रूप में चिन्हित किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, एनवीडिया, पलेंटिर और ओरेकल जैसी बड़ी टेक कंपनियां इस सूची में शामिल हैं। इन कंपनियों के कार्यालय इजरायल के विभिन्न शहरों के अलावा खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों में भी स्थित हैं, जिन्हें अब बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच संवेदनशील माना जा रहा है।
तकनीक के सैन्य इस्तेमाल का आरोप
ईरानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों की तकनीक का इस्तेमाल इजरायल के सैन्य अभियानों और सुरक्षा ढांचे में किया जा रहा है। इसी आधार पर इन कंपनियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को संघर्ष के दायरे में लाने की चेतावनी दी गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे क्षेत्रीय युद्ध का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे संभावित लक्ष्यों की सूची भी विस्तारित होती जा रही है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठानों के साथ-साथ आर्थिक और तकनीकी ढांचे को भी शामिल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत इस बात की ओर है कि मौजूदा संघर्ष अब पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक तकनीकी नेटवर्क भी इसके प्रभाव क्षेत्र में आ सकते हैं।
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आर्थिक संस्थानों को भी चेतावनी
ईरान की ओर से जारी चेतावनियों में अमेरिका और इजरायल से जुड़े आर्थिक संस्थानों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद उन बैंकों और आर्थिक केंद्रों को भी संभावित लक्ष्य बताया गया है जो अमेरिका या इजरायल से जुड़े माने जाते हैं।
एक बयान में कहा गया कि यदि इन संस्थानों का इस्तेमाल ईरान विरोधी गतिविधियों के लिए किया जाता है, तो उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को ऐसे आर्थिक केंद्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के भीतर एक बैंक पर हमला किए जाने की खबरें सामने आई थीं। उस हमले में कई कर्मचारियों की मौत होने की भी जानकारी दी गई थी।
जवाबी कदम और बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
घटनाक्रम के बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई के संकेत भी सामने आए हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी संपत्तियों और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े ठिकानों पर हमले की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बढ़ गया है।
ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि इस क्षेत्र में अवरोध पैदा होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रभाव एशियाई बाजारों पर भी पड़ सकता है, जिनमें भारत और चीन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
साइबर और इन्फ्रास्ट्रक्चर युद्ध की आशंका
मामले को लेकर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संघर्ष का एक बड़ा हिस्सा अब डिजिटल और तकनीकी मोर्चे पर भी लड़ा जा सकता है। डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क और संचार ढांचे जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल संसाधन किसी भी देश की रणनीतिक क्षमता का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि आधुनिक युद्धों में तकनीक और डिजिटल नेटवर्क की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उनके अनुसार, “आज बड़ी टेक कंपनियों के डेटा सेंटर, क्लाउड सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म कई देशों की सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि इन प्रणालियों को निशाना बनाया जाता है तो इसका असर सीमित क्षेत्र से कहीं आगे तक जा सकता है।”
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी कंपनियों या उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले की स्थिति बनती है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और डिजिटल सेवाओं पर भी पड़ सकता है। क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वित्तीय नेटवर्क आज दुनिया के अधिकांश देशों की आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो मिडिल ईस्ट का संघर्ष साइबर, तकनीक और आर्थिक ढांचे तक फैल सकता है, जिसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाएगा।
