मथुरा की सदर तहसील के कई गांवों में सरकारी भूमि के एग्रीमेंट कराने का आरोप; पुलिस खंगाल रही दस्तावेज, लेनदेन और कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका

सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने की कोशिश, 16 लोगों पर FIR; करोड़ों के सौदों की जांच शुरू

Roopa
By Roopa
5 Min Read

मथुरा। सदर तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर बेचने की कथित कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने सरकारी भूमि पर अपना मालिकाना हक जताते हुए अलग-अलग खरीदारों के साथ बिक्री के एग्रीमेंट कर दिए। शिकायत और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद सदर कोतवाली पुलिस ने सोमवार देर शाम 16 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अब जमीन से जुड़े दस्तावेजों और कथित लेनदेन की जांच कर रही है।

मामला आड़ूकी, भुडरुसू और तारसी समेत कई गांवों की जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने इन गांवों में स्थित सरकारी जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए दूसरे लोगों को बेचने के लिए एग्रीमेंट किए। आरोपियों में नेम सिंह, योगेंद्र, नारायण सिंह, राजू, डोरीलाल और राल समेत अन्य लोग शामिल हैं। प्राथमिकी तहसीलदार सदर की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।

तहसील प्रशासन को जब इस संबंध में शिकायत मिली तो संबंधित जमीन के राजस्व अभिलेखों की जांच कराई गई। जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि जिन भूखंडों को निजी बताकर बेचने के लिए एग्रीमेंट किए गए थे, उनमें अधिकांश सरकारी भूमि थी। इसके बावजूद आरोपियों ने जमीन पर अपना अधिकार होने का दावा करते हुए उसे दूसरे लोगों के पक्ष में हस्तांतरित करने की कोशिश की।

प्रशासनिक जांच में सरकारी भूमि होने की पुष्टि के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने उपलब्ध दस्तावेजों और भूमि अभिलेखों की जांच की। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर तहसीलदार ने सदर कोतवाली में लिखित शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने 16 नामजद लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि सरकारी जमीन को निजी बताकर कितने लोगों के साथ बिक्री के एग्रीमेंट किए गए। इन सौदों में कितनी रकम तय हुई और क्या किसी खरीदार से अग्रिम राशि या अन्य भुगतान लिया गया, इसका भी पता लगाया जा रहा है। पुलिस एग्रीमेंट के दस्तावेज, भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड और जमीन के राजस्व अभिलेखों को आपस में मिलाकर देख रही है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित तौर पर सरकारी जमीन को निजी बताने की प्रक्रिया में केवल प्राथमिकी में नामजद लोग ही शामिल थे या उनके साथ अन्य व्यक्ति भी जुड़े हुए थे। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

मामले में जमीन के वास्तविक सरकारी स्वामित्व और कथित बिक्री समझौतों के बीच संबंध की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाएगी कि आरोपियों ने संभावित खरीदारों को कौन-कौन से दस्तावेज दिखाए और क्या इन दस्तावेजों के आधार पर उन्हें जमीन का मालिक होने का विश्वास दिलाया गया था। इससे कथित धोखाधड़ी के पूरे तरीके और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।

राजस्व विभाग के स्तर पर भी संबंधित भूमि का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी जमीन पर किए गए कथित एग्रीमेंट से किसी तीसरे पक्ष के अधिकार या सरकारी संपत्ति को कोई नुकसान न पहुंचे। प्रशासन उन जमीनों की स्थिति की भी निगरानी कर रहा है, जिनके संबंध में कथित तौर पर बिक्री के समझौते किए गए थे।

पुलिस ने फिलहाल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। दस्तावेजों, जमीन के रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी सरकारी भूमि को निजी बताकर सौदे किए गए और इस कथित प्रक्रिया से कितने लोग प्रभावित हुए।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस आरोपियों से पूछताछ और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर सकती है। साथ ही कथित खरीदारों और जमीन के सौदों से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं। इससे सरकारी भूमि को निजी बताकर बेचने की कोशिश के पीछे पूरे नेटवर्क और संभावित वित्तीय लेनदेन का पता लगाने में मदद मिलेगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article