लुधियाना। लुधियाना में ₹2.45 करोड़ की साइबर ठगी के मामले में साइबर अपराध पुलिस ने दूसरे आरोपी मनविंदर सिंह उर्फ मनी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने ठगी की रकम का एक हिस्सा अपने बैंक खातों में प्राप्त कर उसे आगे स्थानांतरित करने में मदद की। अदालत ने आरोपी को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मामले में पुलिस पहले ही एक अन्य आरोपी मनवेंद्र सिंह को राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस के मुताबिक, ठगी का मामला एक कंपनी के प्रबंधक को निशाना बनाकर अंजाम दिया गया था। आरोपियों ने कंपनी के मालिक की तस्वीर का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी पहचान तैयार की। इसके बाद उन्होंने कंपनी के प्रबंधक से संपर्क किया और खुद को कंपनी का मालिक बताकर बातचीत की।
आरोप है कि जालसाजों ने प्रबंधक को बताया कि कंपनी किसी दूसरी कंपनी के साथ कारोबार करने वाली है। इसी बहाने उसे विश्वास में लिया गया और करीब ₹2.45 करोड़ एक खाते में स्थानांतरित करने के लिए कथित तौर पर प्रेरित किया गया। रकम भेजे जाने के बाद ठगी का खुलासा हुआ और मामले की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस को ठगी की रकम के लेनदेन में मनविंदर सिंह की भूमिका के संकेत मिले। आरोप है कि उसने अपने बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी से हासिल रकम का हिस्सा प्राप्त करने के लिए किया। इसके बाद रकम को दूसरे खातों में स्थानांतरित किए जाने की आशंका है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसके खातों में कितनी रकम आई और उसे किन-किन खातों में भेजा गया।
मनविंदर सिंह को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस आरोपी से उसके बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल लेनदेन और अन्य संपर्कों के बारे में पूछताछ कर रही है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य ठगी की रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाना और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
इस मामले में पुलिस इससे पहले राजस्थान के जोधपुर से मनवेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। उसकी गिरफ्तारी के बाद सामने आए वित्तीय और डिजिटल सुरागों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। पुलिस को आशंका है कि ठगी की पूरी रकम को अलग-अलग खातों के जरिए घुमाया गया हो सकता है, ताकि उसके वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
अब तक पीड़ित को करीब ₹24 लाख की रकम वापस मिल चुकी है या बरामद की जा चुकी है। हालांकि ठगी गई कुल ₹2.45 करोड़ की रकम की तुलना में यह राशि काफी कम है। पुलिस बाकी रकम की तलाश के लिए बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है।
जांच में फर्जी पहचान के इस्तेमाल को भी अहम कड़ी माना जा रहा है। कंपनी के मालिक की तस्वीर का इस्तेमाल कर प्रबंधक के सामने भरोसेमंद पहचान पेश करने की कथित कोशिश की गई। इसके बाद कारोबारी लेनदेन का बहाना बनाकर बड़ी रकम हस्तांतरित कराई गई। ऐसे मामलों में जालसाज अक्सर वास्तविक कारोबारी संबंधों और वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारियों पर तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाते हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ उनके संपर्कों और बैंकिंग नेटवर्क की भी जांच कर रही है। अधिकारियों ने अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी रखने और डिजिटल साक्ष्यों की जांच करने की बात कही है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन-किन खातों से होकर गुजरी और प्रत्येक आरोपी की उसमें क्या भूमिका थी।
