लखनऊ: लखनऊ क्राइम ब्रांच ने पेट्रोल और डीजल चोरी कर उसमें सॉल्वेंट मिलाकर बेचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य पेट्रोलियम टैंकरों से ईंधन चोरी कर उसमें सॉल्वेंट मिलाते थे और बाद में उसे ग्रामीण क्षेत्रों में बेच देते थे। पुलिस ने उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में पेट्रोल, डीजल, मिलावटी ईंधन, सॉल्वेंट, एक एचपी टैंकर और एक मारुति वैन बरामद की है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मलियाबाद निवासी अनिल प्रजापति, काकोरी निवासी अभिषेक, हरदोई निवासी राम तीरथ और उन्नाव निवासी धीरज के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार इनके कब्जे से 7,750 लीटर पेट्रोल, 4,000 लीटर डीजल, 1,150 लीटर मिलावटी पेट्रोल, 3,200 लीटर सॉल्वेंट, एक एचपी टैंकर और एक मारुति वैन बरामद की गई है।
जांच में सामने आया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देता था। पेट्रोलियम कंपनियों के टैंकर जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से जुड़े होते हैं और उनकी लगातार निगरानी की जाती है। आरोपी रात 11 बजे से सुबह 5 बजे के बीच सुनसान स्थानों पर टैंकर रोककर जीपीएस का पावर सोर्स निकाल देते थे। इससे कंट्रोल रूम में टैंकर उसी स्थान पर खड़ा दिखाई देता था, जबकि उसी दौरान उससे ईंधन चोरी किया जा रहा होता था।
पुलिस के अनुसार टैंकरों में सेंसर आधारित हाई-सिक्योरिटी इलेक्ट्रॉनिक लॉक लगे होते हैं, जिनकी कीमत लगभग ₹70 हजार होती है। सामान्य स्थिति में लॉक खुलते ही संबंधित पेट्रोल पंप संचालक के पास ओटीपी पहुंचती है और पूरी प्रक्रिया सिस्टम में दर्ज हो जाती है। जांच में पता चला कि आरोपियों ने विशेष प्रकार की ‘मास्टर-की’ तैयार कर रखी थी। वे पतले धातु के तार की मदद से सेंसर को अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर लॉक खोलते थे। इसके बाद ईंधन निकालकर उसमें सॉल्वेंट मिलाया जाता और फिर लॉक दोबारा बंद कर दिया जाता था। इससे सेंसर सामान्य स्थिति में लौट आता था और न तो ओटीपी जनरेट होती थी और न ही सिस्टम में किसी अनधिकृत गतिविधि का रिकॉर्ड दर्ज होता था।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह तापमान में होने वाले प्राकृतिक बदलाव का भी फायदा उठाता था। आरोपी रात के समय प्रत्येक टैंकर से लगभग 50 लीटर तक ईंधन निकाल लेते थे। दिन और रात के तापमान में अंतर के कारण पेट्रोल और डीजल के आयतन में होने वाले स्वाभाविक बदलाव से डिलीवरी के समय चोरी का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस के अनुसार चोरी किए गए ईंधन में सॉल्वेंट मिलाकर उसे ग्रामीण क्षेत्रों में कम कीमत पर बेचा जाता था, जहां पेट्रोल पंपों के बीच अधिक दूरी होती है। ट्रैक्टर, ट्यूबवेल और कृषि उपकरण चलाने वाले किसान तथा स्थानीय वाहन चालक ऐसे सस्ते ईंधन के प्रमुख खरीदार थे। अधिकारियों का कहना है कि मिलावटी ईंधन न केवल वाहनों और मशीनों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इससे आग लगने जैसी गंभीर दुर्घटनाओं का भी खतरा बना रहता है।
पूछताछ के दौरान आरोपी राम तीरथ ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह डिपो से टैंकर लेकर निकलने के बाद रास्ते में ईंधन निकालकर गिरोह को बेच देता था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के एक सदस्य ने अपने आवासीय भवन के बेसमेंट में बड़ी मात्रा में पेट्रोल, डीजल और सॉल्वेंट का अवैध भंडारण कर रखा था, जिससे आसपास के रिहायशी क्षेत्र में बड़े अग्निकांड का खतरा पैदा हो गया था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह गिरोह कब से सक्रिय था, इसका नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ था और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे। बरामद ईंधन और सॉल्वेंट के नमूनों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि मिलावट की प्रकृति और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधों का भी पता लगाया जा सके।
