लखनऊ। साइबर जालसाजों ने सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त पूरनराम टम्टा को 11 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ दिखाकर लगभग 16 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकाया और मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल भेजने की धमकी दी। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम विभाग ने मोबाइल नंबरों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, टम्टा, जो इंडिया ग्रीन सिटी, सदरौना के निवासी हैं, को 27 फरवरी को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को इंस्पेक्टर बताकर चेतावनी दी कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी है और उन्हें 24 घंटे नजर में रखा गया है। किसी को कुछ बताए जाने पर उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इसके बाद एक अन्य कॉल, जिसे कथित तौर पर ईडी अधिकारी बताया गया, ने टम्टा और उनकी पत्नी की व्यक्तिगत जानकारी जुटाई, जिसमें उनके आधार कार्ड की जानकारी भी शामिल थी। जालसाजों ने दावा किया कि पत्नी के आधार से खोले गए बैंक खातों में अनधिकृत लेन-देन हुआ है और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। उन्होंने टम्टा को बताया कि वह ‘डिजिटल अरेस्ट’ में हैं, किसी से संपर्क नहीं कर सकते और कोई जानकारी साझा नहीं करेंगे। बैंक खातों की जांच के बाद क्लीन चिट दी जाएगी, अन्यथा जेल भेज दिया जाएगा।
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डर और मानसिक दबाव में टम्टा ने कथित अधिकारियों की मांग पर 6 मार्च को 10 लाख और 9 मार्च को 6 लाख रुपये RTGS के जरिए जालसाजों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब और पैसे की मांग हुई, तो उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने कॉल काट दी। परिचितों की जानकारी मिलने पर उन्हें समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।
साइबर क्राइम विभाग ने पुष्टि की कि मोबाइल नंबरों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और आरोपियों की पहचान और लोकेशन का पता लगाने के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह गिरोह रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाकर ठगी करता रहा है और आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए मानसिक दबाव
टम्टा ने बताया कि जालसाजों ने डराने के लिए कहा कि वे डिजिटल अरेस्ट में हैं और किसी से बात करने या जानकारी साझा करने पर जेल भेज दिए जाएंगे। जांच के बहाने बैंक खातों की पूरी जानकारी जुटाई गई और मानसिक दबाव बनाए रखा गया। वरिष्ठ नागरिक और रिटायर्ड कर्मचारी आमतौर पर इस तरह के साइबर अपराध का निशाना बनते हैं।
साइबर क्राइम जागरूकता की आवश्यकता
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी धमकी भरे कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और बैंक डिटेल या आधार जैसी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। साइबर धोखाधड़ी की शिकायत तुरंत दर्ज कराई जानी चाहिए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि डिजिटल ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए सतर्क रहना और सूचना साझा करना बेहद जरूरी है।
साइबर टीम अब डिजिटल ट्रेल और फॉरेंसिक डेटा की मदद से गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके बैंक खातों का पता लगा रही है। आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है और पूरे मामले का पर्दाफाश होने की संभावना है।
