लखनऊ: राजधानी लखनऊ में साइबर अपराधियों ने एक व्यवसायी, एक डॉक्टर और एक बीमा पॉलिसी धारक को निशाना बनाकर कुल 53 लाख रुपये ठग लिए। अपराधियों ने व्हाट्सएप और फोन कॉल के माध्यम से झूठे लिंक और झांसे भेजकर शिकारों के बैंक खाते खाली किए।
यमुना विहार के ऐशबाग निवासी व्यवसायी मोहम्मद सालिम ने बताया कि उन्हें 13 जनवरी को व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा गया। उन्होंने लिंक डाउनलोड किया, जिसके बाद 41 दिन में उनके खाते से कुल ₹52.31 लाख उड़ गए। सालिम ने पासबुक अपडेट कराने मार्च में बैंक जाने पर इस धोखाधड़ी का पता लगाया।
मलिहाबाद के घुसौली गांव के राज कपूर डॉक्टर के ऑनलाइन अपॉइंटमेंट के नाम पर ठगे गए। रविवार दोपहर उन्हें एक कॉल आया जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को डॉक्टर का प्रतिनिधि बताया। 5 रुपये ट्रांसफर कराने के बहाने QR कोड के जरिए उनके खाते की जानकारी हासिल की गई और कुल ₹41,000 निकाल लिए गए।
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इसी तरह चौक चौपटिया निवासी अभय प्रकाश से उनकी बीमा पॉलिसी का नवीनीकरण कराने के बहाने ₹51,000 ठगे गए। कॉल करने वाले ने खुद को मैक्स इंश्योरेंस कंपनी का एजेंट बताया। भरोसा होने पर अभय ने पॉलिसी का नवीनीकरण कराया, लेकिन इसके बाद खाते की पूरी जानकारी ले ली गई और राशि ट्रांसफर कर दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह साइबर जालसाजी का नया तरीका है जिसमें अपराधी छोटी-छोटी रकम के बहाने खातों की संवेदनशील जानकारी चुराते हैं और बाद में बड़ी राशि निकाल लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे जालसाज अक्सर मोबाइल लिंक, QR कोड और फोन कॉल के माध्यम से लोगों को फंसाते हैं।
जालसाजों ने शिकारों को विश्वास में लेकर बैंकिंग एप, मोबाइल नंबर और OTP के जरिए उनके खाते को नियंत्रित किया। मामले में बैंकिंग धोखाधड़ी के उच्च तकनीकी दृष्टिकोण का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने कहा कि ऐसे मामलों में समय पर रिपोर्ट दर्ज कराना और खाते की गतिविधियों की सतत निगरानी रखना बेहद जरूरी है।
इस घटना के बाद पुलिस साइबर विंग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों के नेटवर्क और उनके अन्य कनेक्शन की पहचान करना प्राथमिकता है। लखनऊ पुलिस ने जनता से अपील की है कि अगर किसी ने हाल ही में मोबाइल बैंकिंग, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन या लिंक के माध्यम से कोई संदिग्ध गतिविधि देखी है, तो तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराएं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेनदेन में सावधानी बेहद जरूरी है। किसी भी अज्ञात लिंक या संदेश को क्लिक करना, QR कोड स्कैन करना या OTP साझा करना खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने लोगों से बार-बार चेतावनी दी कि बैंकिंग ऐप या अन्य वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही करें।
पुलिस ने बताया कि इस तरह के अपराधों में आम जनता के पैसे का नुकसान होने के साथ-साथ अपराधियों का नेटवर्क भी मजबूत होता है। लगातार मॉनिटरिंग और तकनीकी साधनों के जरिए ही इन जालसाजों की पहचान और गिरफ्तारी संभव है।
मामले में लखनऊ पुलिस ने भविष्य में ऐसे साइबर धोखाधड़ी के मामलों पर कड़ी नजर रखने और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जालसाजों के गिरोह को भांपने और उनके नेटवर्क को तोड़ने के लिए टेक्नोलॉजी और फील्ड वर्क दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
साइबर अपराध में तेजी से बढ़ोतरी को देखते हुए विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि लोगों को डिजिटल लेनदेन में सतर्क रहना चाहिए। किसी भी अनजान कॉल, लिंक या संदेश पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि ऑनलाइन बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन में सुरक्षा मानकों का पालन करना आज के समय में अत्यंत जरूरी है।
