CBI ने उत्तराखंड के कथित ₹800 करोड़ LUCC निवेश घोटाले में 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच में करीब एक लाख निवेशकों से धन जुटाने, शेल कंपनियों के जरिए रकम डायवर्ट करने और अनियमित जमा योजनाएं चलाने के आरोप सामने आए हैं।

LUCC ₹800 करोड़ घोटाले में CBI ने 18 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल की

Team The420
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देहरादून। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तराखंड में करीब ₹800 करोड़ के कथित अनियमित जमा (Unregulated Deposit) घोटाले में Loni Urban Multi-State Credit and Thrift Co-operative Society (LUCC) सहित 18 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस कथित घोटाले में राज्यभर के लगभग एक लाख निवेशकों से धन जुटाया गया।

CBI ने चार्जशीट शुक्रवार को देहरादून स्थित अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम (Banning of Unregulated Deposit Schemes Act) के तहत गठित विशेष अदालत में दाखिल की। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय दंड संहिता (IPC), उत्तराखंड निवेशकों के हितों का संरक्षण अधिनियम तथा Banning of Unregulated Deposit Schemes Act की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

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चार्जशीट में समीर अग्रवाल, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत, सानिया अग्रवाल, माया सिंह राजपूत, जितेंद्र सिंह निरंजन, दिनेश सिंह, गिरीश चंद सिंह बिष्ट, उर्मिला बिष्ट, जगमोहन बिष्ट, ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, सुशील गोकहरू, किशनलाल उदयलाल जैन, पंकज कुशल सिंह जैन, राजेंद्र सिंह बिष्ट तथा LUCC को आरोपी बनाया गया है।

CBI ने यह मामला वर्ष 2025 में नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपने हाथ में लिया था। अदालत ने कथित घोटाले से संबंधित उत्तराखंड में दर्ज सभी FIR को CBI को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद एजेंसी ने 26 नवंबर 2025 को मामला दर्ज कर राज्यभर में दर्ज 18 FIR की जांच अपने अधीन ले ली।

जांच एजेंसी के अनुसार, LUCC का पंजीकरण वर्ष 2012 में एक मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में हुआ था। आरोप है कि वर्ष 2016 में समीर अग्रवाल ने सोसाइटी के प्रबंधन का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर नया निदेशक मंडल गठित किया और इसके बाद उत्तराखंड में 50 से अधिक शाखाओं के माध्यम से कथित रूप से अनियमित जमा योजनाएं शुरू कीं।

CBI का आरोप है कि निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर लगभग ₹800 करोड़ जमा कराए गए। जांच में मुंबई निवासी समीर अग्रवाल को कथित मास्टरमाइंड बताया गया है। एजेंसी का आरोप है कि वह अपनी पत्नी सानिया अग्रवाल के साथ विदेश फरार हो गया।

जांच के दौरान शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत और दिनेश सिंह की भूमिका भी कथित रूप से सोसाइटी के संचालन में महत्वपूर्ण पाई गई। CBI का आरोप है कि सुशील कुमार गोकहरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन ने मुंबई में 10 शेल कंपनियों के बैंक खाते खुलवाए, जिनके माध्यम से निवेशकों की धनराशि को विभिन्न खातों में लेयरिंग कर कथित रूप से डायवर्ट किया गया।

CBI के अनुसार, मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी धन के प्रवाह (Money Trail), शेल कंपनियों के नेटवर्क और अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) के अनुसार, अनियमित जमा योजनाओं से जुड़े बड़े वित्तीय घोटालों में निवेशकों की राशि को शेल कंपनियों, बहु-स्तरीय बैंक खातों और जटिल वित्तीय लेनदेन के माध्यम से छिपाने या डायवर्ट करने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए निवेशकों को केवल आरबीआई, सेबी या अन्य सक्षम नियामक संस्थाओं से अनुमोदित योजनाओं में ही निवेश करना चाहिए तथा असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के दावों से सतर्क रहना चाहिए।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। CBI का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी और कथित साजिश में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी रहेगी।

About the author — Suvedita Nath is a science student with a growing interest in cybercrime and digital safety. She writes on online activity, cyber threats, and technology-driven risks. Her work focuses on clarity, accuracy, and public awareness.

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