पंजाब में कभी छात्र राजनीति और स्थानीय गैंग संघर्षों से जुड़े रहे लॉरेंस बिश्नोई और सतविंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ अब भारत की सबसे चर्चित संगठित अपराध जांचों में केंद्रीय नाम बन चुके हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों का कथित आपराधिक नेटवर्क भारत की सीमाओं से बाहर कई देशों तक फैल चुका है और डिजिटल संचार, वित्तीय चैनलों तथा विदेशी सहयोगियों के माध्यम से संचालित होने के आरोपों की जांच की जा रही है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में अधिकारियों ने बिश्नोई और बराड़ के खिलाफ रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गेनाइजेशंस (RICO) एक्ट के तहत आरोप तय किए हैं। उन पर लक्षित हत्याओं, रंगदारी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य संगठित आपराधिक गतिविधियों में कथित संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं। यह कार्रवाई भारत से कथित रूप से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क की जांच का हिस्सा बताई जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला पंजाब के स्थानीय गैंग नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सिंडिकेट में बदलने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। जांच के अनुसार, कथित नेटवर्क का विस्तार कनाडा, अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों तक हो चुका है।
जांच अभिलेखों के अनुसार, पंजाब के फाजिल्का जिले में जन्मे लॉरेंस बिश्नोई पहली बार चंडीगढ़ में छात्र राजनीति के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों के संज्ञान में आए थे। वर्ष 2010 में छात्र समूहों के बीच हुए विवाद के बाद उनके खिलाफ पहला आपराधिक मामला दर्ज हुआ था। जांच एजेंसियों का मानना है कि बाद के वर्षों में जेल के दौरान बने संपर्कों ने उनके कथित आपराधिक नेटवर्क के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपने पूर्व आरोपपत्र में आरोप लगाया था कि बिश्नोई गिरोह ने विदेशों में सक्रिय सहयोगियों के साथ संपर्क स्थापित किए और रंगदारी सहित अन्य कथित आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन का उपयोग विदेशों में संचालन के लिए किया। एजेंसी के अनुसार, धनराशि कथित रूप से कनाडा, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों तक पहुंचाई गई।
लॉरेंस बिश्नोई का नाम पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की वर्ष 2022 में हुई हत्या और महाराष्ट्र के नेता बाबा सिद्दीकी की वर्ष 2024 में हुई हत्या सहित कई चर्चित मामलों की जांच में सामने आया है। इसके अलावा वर्ष 1998 के काले हिरण शिकार मामले को लेकर अभिनेता सलमान खान को कथित धमकियां देने के आरोपों के बाद भी उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा। वर्तमान में बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, जहां बिश्नोई को कथित सिंडिकेट का भारत स्थित प्रमुख चेहरा माना जाता है, वहीं गोल्डी बराड़ ने विदेशों में इसके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंजाब के मुक्तसर में जन्मे बराड़ की बिश्नोई से मुलाकात कथित तौर पर कॉलेज के दिनों में हुई थी। वर्ष 2017 में वह छात्र वीजा पर कनाडा चले गए और भारतीय एजेंसियों के अनुसार वहीं से कथित आपराधिक गतिविधियों के संचालन में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
गोल्डी बराड़ भारत के मोस्ट वांटेड भगोड़ों में शामिल हैं और उनके खिलाफ सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड तथा यूथ कांग्रेस नेता गुरलाल सिंह पहलवान की हत्या सहित कई मामलों में आरोप हैं। वर्ष 2022 में उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने पर इनाम की भी घोषणा की है।
जांच एजेंसियों का यह भी कहना है कि हाल के वर्षों में बिश्नोई और बराड़ के बीच कथित मतभेद उभरने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, अनमोल बिश्नोई से जुड़े कुछ मामलों के प्रबंधन को लेकर दोनों के बीच असहमति की सूचनाएं मिली हैं। एजेंसियां फिलहाल कथित सिंडिकेट की संरचना, विदेशी नेटवर्क, वित्तीय गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच जारी रखे हुए हैं। आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित जांच के निष्कर्षों के अधीन है।
