KPSC पशु चिकित्सक भर्ती धांधली मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने निलंबित अध्यक्ष साहुकार एस. शिवशंकरप्पा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

KPSC भर्ती का पुराना राज फिर चर्चा में, 24 नियुक्तियों और OMR छेड़छाड़ पर उठे सवाल

Team The420
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बेंगलुरु। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के आरोपों के बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग (RDPR) में सहायक कार्यकारी अभियंताओं (AEE) की करीब दो साल पुरानी भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। इस मामले में केपीएससी की जांच समिति ने कथित अनियमितताओं और ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ की बात कही थी। फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की जांच में भी छेड़छाड़ की पुष्टि होने का दावा किया गया। इसके बावजूद इस मामले में अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है।

यह मामला उस भर्ती घोटाले से अलग है जिसकी वर्तमान में अपराध जांच विभाग (CID) जांच कर रहा है। सीआईडी की कार्रवाई 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। इसी अंतर के कारण मौजूदा राजनीतिक आरोपों में दोनों मामलों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।

400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती की अलग जांच

केपीएससी से जुड़ी कथित भर्ती अनियमितताओं के तीन मामलों की सीआईडी जांच कर रही है। इनमें से दो मामले 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से संबंधित हैं। इस जांच में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार तथा एक कथित बिचौलिए की गिरफ्तारी हो चुकी है।

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इसके अलावा सीआईडी निलंबित केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहुकार के खिलाफ भी एक मामले की जांच कर रही है। इसमें उनकी दो बेटियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर गंगवार को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, ग्रामीण विकास विभाग की जिस एईई भर्ती का मुद्दा उन्होंने उठाया है, उस परीक्षा के समय गंगवार केपीएससी के परीक्षा नियंत्रक नहीं थे।

24 AEE नियुक्तियों से जुड़ा पुराना मामला

ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग में 24 सहायक कार्यकारी अभियंताओं की भर्ती परीक्षा जुलाई 2023 में आयोजित की गई थी। 22 सितंबर 2023 को केपीएससी ने इसकी अस्थायी चयन सूची जारी की। इसके बाद एक अभ्यर्थी ने चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका जताते हुए सवाल उठाए।

शिकायत के बाद केपीएससी ने मामले की जांच के लिए पहले तीन सदस्यीय समिति गठित की। बाद में इस समिति को भंग कर पांच सदस्यीय समिति बनाई गई। जांच समिति ने कथित तौर पर पाया कि ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं में कार्बन शीट के इस्तेमाल के जरिए छेड़छाड़ की गई थी।

मामले को फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के पास भी भेजा गया। रिपोर्ट में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ की पुष्टि होने की बात सामने आई। इससे परीक्षा की निष्पक्षता और चयन सूची में शामिल अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।

जांच पूरी होने से पहले जारी हो गए नियुक्ति आदेश

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि केपीएससी की जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग ने चयन सूची में शामिल सभी 24 अभ्यर्थियों को सशर्त नियुक्ति आदेश जारी कर दिए।

इन नियुक्तियों को मामले के अंतिम परिणाम के अधीन रखा गया था। विभाग का तर्क रहा कि नियुक्तियां स्थायी रूप से विवाद से बाहर नहीं थीं और मामले के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती थी।

केपीएससी की जांच समिति ने फरवरी 2026 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं का उल्लेख होने के बावजूद इस मामले में अभी तक आपराधिक जांच शुरू नहीं हुई है।

राजनीतिक विवाद में क्यों आया मामला?

कुमारस्वामी ने करीब दो साल पुराने इस मामले को ऐसे समय उठाया है, जब केपीएससी की दूसरी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की सीआईडी जांच चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रियांक खड़गे ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग के प्रभारी थे, तब कथित अनियमितताओं के बावजूद 24 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई।

खड़गे ने आरोपों से इनकार करते हुए नियुक्तियों को सशर्त बताया है। उन्होंने इस मुद्दे को उठाए जाने के समय पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति आदेश केपीएससी समिति की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले जारी किए गए थे और उन्हें मामले के परिणाम से जोड़ा गया था।

अब स्वतंत्र जांच की मांग

विवाद के बीच केपीएससी में सुधार की मांग करने वाले अभ्यर्थियों और अन्य लोगों ने एईई भर्ती मामले में भी स्वतंत्र आपराधिक जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि जब आयोग की जांच में ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं से कथित छेड़छाड़ और फोरेंसिक जांच में इसकी पुष्टि की बात सामने आई है, तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि छेड़छाड़ किसने की, चयन प्रक्रिया पर इसका कितना असर पड़ा और 24 अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का आधार क्या था।

फिलहाल एईई भर्ती मामले में किसी आपराधिक प्राथमिकी या गिरफ्तारी की जानकारी नहीं है। ऐसे में केपीएससी की जांच रिपोर्ट और सशर्त नियुक्तियों के बीच का अंतर अब राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ प्रशासनिक और कानूनी जांच का भी प्रमुख मुद्दा बन गया है।

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