अलप्पुझा। अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए हथियार निर्माण का बड़ा ठेका मिलने और उससे हजारों करोड़ रुपये का कारोबार होने का दावा कर निवेशकों को फंसाने के कथित ₹1,000 करोड़ के फर्जीवाड़े में केरल समन्वयक पी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि निवेशकों को ₹1 करोड़ लगाने पर ₹5,000 करोड़ के उप-ठेके में हिस्सेदारी और 25 प्रतिशत मुनाफे का लालच दिया गया। प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी उस समय हुई जब एक शिकायतकर्ता ने उसे अलप्पुझा के पास एक होटल में पहचान लिया।
कोल्लम के परिप्पल्ली निवासी प्रदीप कुमार के खिलाफ वर्कला निवासी एएम मुनीर की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। मुनीर ने आरोप लगाया कि उनसे करीब ₹70 लाख की रकम निवेश के नाम पर ली गई। रविवार शाम करीब चार बजे मुनीर ने प्रदीप कुमार को चेरथला रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में देखा। पहचान होने के बाद उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से उसे रोक लिया और पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही चेरथला पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदीप कुमार को हिरासत में लिया। बाद में उसे वर्कला पुलिस के हवाले किया गया, जहां पूछताछ के बाद उसकी गिरफ्तारी दर्ज की गई। पुलिस अब आरोपी से कथित निवेश योजना, कंपनी की गतिविधियों और रकम के लेनदेन से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।
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मुनीर के बयान के मुताबिक, प्रदीप कुमार और अन्य आरोपियों ने दावा किया था कि कंपनी को अमेरिकी रक्षा विभाग से हथियार निर्माण के बड़े अनुबंध मिले हैं। निवेशकों को कथित तौर पर बताया गया कि ₹1 करोड़ का निवेश करने पर ₹5,000 करोड़ का उप-ठेका हासिल किया जा सकता है और निवेशक को 25 प्रतिशत मुनाफा मिलेगा। बड़े सरकारी अनुबंध और भारी रिटर्न के इस दावे के जरिए निवेशकों को रकम लगाने के लिए तैयार करने का आरोप है।
शिवापुरी मंदिर परियोजना का भी दिया झांसा
मुनीर ने आरोप लगाया कि उन्हें वर्कला में प्रस्तावित ₹350 करोड़ की ‘शिवापुरी मंदिर निर्माण परियोजना’ में साझेदार बनाने का भी लालच दिया गया। कथित तौर पर इस परियोजना में भागीदारी के नाम पर भी उनसे निवेश कराया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि मंदिर परियोजना और अमेरिकी रक्षा विभाग के कथित अनुबंध से जुड़े दावों में कितनी वास्तविकता थी और निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।
मामले में वीपीवीवी टेक्नो कंस्ट्रक्शंस के अध्यक्ष और कथित मुख्य साजिशकर्ता वेंकिट्टा वेंकिट, कंपनी के केरल समन्वयक जीएस बिजू, कथित मास्टरमाइंड डॉ. साब और येलाथी पद्मराज गोपाल समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं। वेंकिट्टा वेंकिट को दिल्ली पुलिस ने इसी महीने की शुरुआत में गिरफ्तार किया था।
कंपनी के निदेशक हितेश कुमार और एर्नाकुलम के कूथट्टुकुलम निवासी राहुल राजीव नायर फिलहाल जमानत पर हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि वेंकिट, प्रदीप कुमार और एक अन्य समन्वयक विनोद वारियर ने अपने नामों के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर वीपीवीवी कंपनी का नाम बनाया था।
पुलिस जांच का दायरा बढ़ा
गिरफ्तारी के बाद पुलिस का फोकस कथित निवेश नेटवर्क और रकम के प्रवाह का पता लगाने पर है। जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि योजना के तहत कितने लोगों से रकम जुटाई गई, किस-किस खाते में पैसा पहुंचा और निवेशकों को दिखाए गए कथित अनुबंध व अन्य दस्तावेज कहां से तैयार किए गए।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि अमेरिकी रक्षा विभाग से अनुबंध मिलने का दावा किसी वास्तविक कारोबारी समझौते पर आधारित था या निवेशकों को प्रभावित करने के लिए तैयार की गई कथित कहानी का हिस्सा था। पुलिस संभावित अन्य पीड़ितों और आरोपियों के बीच वित्तीय संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।
मामले में हुई गिरफ्तारियों और दस्तावेजों की जांच से कथित निवेश नेटवर्क के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम को आगे किन माध्यमों से स्थानांतरित किया गया और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
