बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने 400 पशु चिकित्सा अधिकारी पदों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को निलंबित कर दिया है। अपराध जांच विभाग (CID) की जांच के बीच सरकार ने यह कदम भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर उठे सवालों को देखते हुए उठाया है। गंगवार गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे और बाद में आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में लिए गए।
गंगवार उत्तर प्रदेश के रहने वाले 2016 बैच के कर्नाटक कैडर के IAS अधिकारी हैं। वह वर्तमान में राज्य के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग में निदेशक के पद पर तैनात थे। कथित भर्ती अनियमितता के समय वह कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थे। इसी वजह से भर्ती प्रक्रिया में उनकी भूमिका CID की जांच के दायरे में आई।
राज्य सरकार ने CID की रिपोर्ट के आधार पर निलंबन आदेश जारी किया। रिपोर्ट के अनुसार, गंगवार को 30 अगस्त को संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद CID ने उन्हें आगे की जांच के लिए पुलिस हिरासत में लिया। सरकार ने कहा कि गंगवार 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहे और उनके खिलाफ आरोप KPSC द्वारा कराई गई भर्ती प्रक्रिया की अखंडता और निष्पक्षता से जुड़े हैं।
निलंबन आदेश के अनुसार, गंगवार को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। यह निलंबन CID की जांच पूरी होने और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार की लिखित अनुमति के बिना वह अपना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
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यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तलाशी कार्रवाई के बाद भी चर्चा में आया था। ED ने उत्तर प्रदेश और बेंगलुरु स्थित गंगवार के आवासों पर तलाशी ली थी। हालांकि, तलाशी के दौरान वह दोनों स्थानों पर मौजूद नहीं थे। इसके बाद वह CID के सामने पूछताछ के लिए पेश हुए और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए प्रवेश परीक्षा 8 जनवरी को आयोजित की गई थी। अंतिम चयन सूची 17 जुलाई को जारी की गई। भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर अब तक तीन प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। CID यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया में किसी तरह की हेराफेरी हुई थी या कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया था।
जांच के दौरान CID ने परीक्षा में शामिल 329 अभ्यर्थियों की OMR उत्तर पुस्तिकाएं राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजी हैं। इन उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का उद्देश्य परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोपों की पुष्टि करना है। यह कार्रवाई एक असफल अभ्यर्थी की शिकायत के बाद की गई, जिसमें 29 सफल अभ्यर्थियों के चयन पर सवाल उठाए गए थे।
जांच एजेंसी अब भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के पूरे दायरे और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। OMR उत्तर पुस्तिकाओं की फॉरेंसिक जांच को मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उत्तर पुस्तिकाओं में किसी तरह का बदलाव, छेड़छाड़ या अन्य अनियमितता हुई थी या नहीं।
गंगवार का निलंबन ऐसे समय हुआ है जब CID भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निलंबन जांच लंबित रहने तक प्रभावी रहेगा। गंगवार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
