कानपुर के ₹5600 करोड़ के कथित साइबर ठगी नेटवर्क में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी खातों के जरिए ₹1037 करोड़ के लेनदेन का खुलासा हुआ है।

5600 करोड़ की साइबर ठगी का दुबई-नेपाल नेटवर्क, ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी खातों में 1037 करोड़ का लेनदेन

Team The420
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कानपुर। कानपुर में सामने आए करीब 5600 करोड़ रुपये के कथित साइबर ठगी नेटवर्क की जांच में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के जरिए रकम को ठिकाने लगाने का बड़ा तंत्र सामने आया है। जांच में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े 16 खातों में ही 1037 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। आशंका है कि ठगी की रकम को छिपाने और अलग-अलग खातों में फैलाने के लिए ऑनलाइन गेमिंग, आईपीएल और अन्य मैचों पर सट्टा लगाने वाले लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था।

जांच में गिरोह से जुड़े 14 बैंकों के 77 खातों की जानकारी सामने आई है। इनमें आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के खातों में करीब 3000 करोड़ रुपये का लेनदेन पाया गया है। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, बंधन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक समेत अन्य बैंकों के खाते भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस अब इन खातों में हुए लेनदेन, रकम के स्रोत और आगे किए गए स्थानांतरण की कड़ियां जोड़ रही है।

जांच में चकेरी-सनिगवां क्षेत्र के एक दारोगा के बेटे इखलाख हुसैन का नाम भी सामने आया है। उसकी तलाश में शुक्रवार को लखनऊ के लुलु मॉल तक साइबर टीम पहुंची थी, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही वह वहां से निकल गया। इसके बाद उसकी लोकेशन नेपाल में मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां उसकी गतिविधियों और गिरोह के अन्य सदस्यों से संपर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।

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गिरोह के सरगना शाहजेव और उसके कई साथियों के विदेश जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। उनकी यात्रा से जुड़े रिकॉर्ड में दुबई, तुर्की, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्राओं के संकेत मिले हैं। अब आरोपितों की ट्रैवल हिस्ट्री खंगालकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि विदेश यात्राओं के दौरान उनका किन लोगों से संपर्क रहा और साइबर ठगी के नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितना विस्तार था।

गिरोह के एक सदस्य शाहजेव से हैदराबाद जाने का कारण पूछताछ में सामने आया। बताया गया कि उसका साथी मो. आरिफ वहां पुलिस की गतिविधियों की जानकारी देने वाला था। हालांकि शाहजेव को हैदराबाद एयरपोर्ट पर ही पकड़ लिया गया। आरिफ की लोकेशन बाद में मुंबई में मिली। जांच टीम अब दोनों के संपर्कों और संभावित सहयोगियों की जानकारी जुटा रही है।

जाजमऊ के दरगाह शरीफ क्षेत्र में रहने वाला चांद सिद्दीकी और बेकनगंज निवासी मो. अमान भी गिरोह से जुड़े बताए गए हैं। दोनों पहले से एक अन्य ठगी के मामले में कानपुर जेल में बंद हैं। जांच में चांद के एक बैंक खाते में दो वर्षों के दौरान 33.62 करोड़ रुपये का लेनदेन मिला है। वहीं अमान के एचडीएफसी बैंक खाते में एक वर्ष के भीतर 559 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। इन लेनदेन की प्रकृति और रकम के वास्तविक स्रोत की जांच की जा रही है।

गिरोह के प्रमुख सदस्यों में इखलाख हुसैन के अलावा एहतेशाम, शाहवेज इलाही, मो. मुजम्मिल, मो. आरिफ, मो. अनस और मो. अर्सलान समेत 10 आरोपित अभी फरार बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश में अलग-अलग स्थानों पर दबिश और तकनीकी निगरानी की जा रही है।

जांच में 77 संदिग्ध फर्मों का भी पता चला है। इनमें एग्रोकाम, सिद्धनाथ इंटरप्राइजेज, रॉयल इंटरप्राइजेज, इंडिगो, केजीएम, एएम इंटरप्राइजेज, एमए ट्रेडर्स, एसएस इंटरप्राइजेज, एआई एग्रो फूड, एसजी ट्रेडर्स, परफेक्ट ट्रेडर्स, एमएस रॉयल और एसआर इंटरप्राइजेज समेत कई नाम शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में कई फर्मों के नाम सही मिले, लेकिन उनके पते गलत या संदिग्ध पाए गए। इनमें स्लॉटर और स्क्रैप कारोबार से जुड़ी फर्मों की संख्या अधिक बताई गई है। अब जांच टीम इन फर्मों के पते पर जाकर उनके वास्तविक अस्तित्व और कारोबार की पुष्टि करेगी।

जांच का सबसे अहम पहलू यह है कि ठगी की रकम सीधे एक खाते में रखने के बजाय बड़ी संख्या में बैंक खातों, ऑनलाइन गेमिंग खातों और संदिग्ध कारोबारी फर्मों के बीच घुमाई जाती थी। 5600 करोड़ रुपये के कथित नेटवर्क में 1037 करोड़ रुपये का ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ना इस बात की ओर संकेत करता है कि साइबर ठगी की रकम को वैध लेनदेन का स्वरूप देने के लिए डिजिटल गेमिंग और सट्टेबाजी के खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। अब जांच एजेंसियां बैंकिंग लेनदेन, फर्जी फर्मों, फरार आरोपितों और विदेश यात्राओं की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की संरचना का पता लगाने में जुटी हैं।

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