जयपुर: ₹960 करोड़ के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने फरार चल रहे पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। कई हफ्तों से छिपे हुए अग्रवाल की गिरफ्तारी को इस मामले में एक अहम सफलता माना जा रहा है, जिससे जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
जांच एजेंसी के अनुसार, अग्रवाल के खिलाफ पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका था। वह फरवरी 2026 से ही फरार चल रहे थे, जिसके बाद उन्हें पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी और निगरानी अभियान चलाया जा रहा था। आखिरकार, उनकी दिल्ली में मौजूदगी की सटीक जानकारी मिलने के बाद एक विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।
इस मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। इससे पहले इस घोटाले में नौ अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जिनमें विभाग के वरिष्ठ स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में समन्वय बनाकर कार्रवाई की है।
जांच में सामने आया है कि यह घोटाला टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अंजाम दिया गया। आरोप है कि कुछ निजी फर्मों ने सरकारी ठेके हासिल करने के लिए फर्जी ‘कम्प्लीशन सर्टिफिकेट’ तैयार किए, जिनका उपयोग बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पात्रता साबित करने में किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये के ठेके हासिल किए गए, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, करीब ₹960 करोड़ की राशि से जुड़े इस पूरे प्रकरण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और फंड डायवर्जन के संकेत मिले हैं। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए सार्वजनिक धन को व्यवस्थित तरीके से siphon किया गया, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ कंपनियों ने प्रतिष्ठित संस्थाओं के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया। इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच में गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
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इससे पहले जांच एजेंसी ने 17 फरवरी को देशभर में बड़े स्तर पर छापेमारी की थी, जिसमें जयपुर, बाड़मेर, जालौर, सीकर के अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली में कुल 15 स्थानों पर कार्रवाई की गई थी। इन छापों में कई अहम दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए गए, जिन्होंने इस घोटाले की परतें खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इससे न केवल प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई, बल्कि सरकारी परियोजनाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए।
गिरफ्तारी के बाद अग्रवाल को जयपुर लाया गया है, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस घोटाले में और किन-किन लोगों की भूमिका रही है और धन के प्रवाह का पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला सार्वजनिक योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को फिर से सामने लाता है। खासकर जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराना है, उसमें इस तरह की अनियमितताएं गंभीर चिंता का विषय हैं।
फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
