वाराणसी के ईंट कारोबारी को बनाया शिकार; टेलीग्राम बॉट से भेजते थे मैसेज, ट्रोजन एपीके से मोबाइल पर कब्जा कर निकालते थे पैसे

जामताड़ा में ट्रेनिंग, बंगाल में ठिकाना: एपीके फाइल से फोन हैक कर 50 लाख की साइबर ठगी, दो चचेरे भाई गिरफ्तार

Team The420
5 Min Read

वाराणसी। साइबर अपराध के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो चचेरे भाइयों को गिरफ्तार किया गया है, जो झारखंड के जामताड़ा में ट्रेनिंग लेने के बाद पश्चिम बंगाल में ठिकाना बनाकर देशभर के लोगों को निशाना बना रहे थे। आरोप है कि दोनों ने एपीके फाइल भेजकर मोबाइल फोन हैक करने की तकनीक के जरिए करीब ₹50 लाख की साइबर ठगी को अंजाम दिया।

जांच के अनुसार वाराणसी के रामनगर क्षेत्र के निवासी ईंट कारोबारी अनूप गुप्ता को भी इसी तरीके से निशाना बनाया गया था। ठगों ने उन्हें एक एपीके फाइल भेजी, जिसे डाउनलोड करते ही मोबाइल फोन का एक्सेस उनके नियंत्रण में चला गया। इसके बाद बैंक से जुड़े ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल कर आरोपियों ने ₹8.38 लाख की ठगी कर ली।

जामताड़ा में सीखी साइबर ठगी की तकनीक

जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी पहले झारखंड के कुख्यात साइबर अपराध केंद्र जामताड़ा में ठगी की ट्रेनिंग ले चुके थे। वहां पहले से दर्ज मामलों के कारण उन्होंने अपनी गतिविधियां दूसरे राज्य में स्थानांतरित कर दीं और पश्चिम बंगाल के अंडाल क्षेत्र को अपना नया ठिकाना बना लिया।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

जामताड़ा से करीब 64 किलोमीटर दूर स्थित अंडाल में रहकर दोनों चचेरे भाई साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। यहां से वे विभिन्न राज्यों के लोगों को निशाना बनाते थे और डिजिटल माध्यमों के जरिए ठगी को अंजाम देते थे।

सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट से मिली सफलता

साइबर ठगी की शिकायत दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया। तकनीकी जांच के दौरान मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन गतिविधियों का विश्लेषण किया गया।

इसी आधार पर दोनों आरोपियों को पश्चिम बंगाल के अंडाल से गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि दोनों चचेरे भाई संगठित तरीके से लोगों को निशाना बनाते थे और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों के जरिए निकालते थे।

टेलीग्राम बॉट से भेजते थे मैसेज

पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी संभावित शिकार तक पहुंचने के लिए टेलीग्राम बॉट का इस्तेमाल करते थे। इस माध्यम से वे बड़ी संख्या में लोगों को मैसेज भेजते और उन्हें किसी बहाने से एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते थे।

जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड करता, उसके मोबाइल में ट्रोजन और एसएमएस फॉरवर्डर आधारित मालवेयर सक्रिय हो जाता। इसके बाद फोन में आने वाले ओटीपी और बैंकिंग से जुड़े संदेश सीधे ठगों तक पहुंचने लगते थे।

इसके बाद आरोपी म्यूल खातों के माध्यम से बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे और ठगी की रकम को अलग-अलग चैनलों में स्थानांतरित कर देते थे।

ठगी के पैसों से खरीदा मकान

जांच में यह भी पता चला कि दोनों आरोपियों ने साइबर ठगी से अर्जित रकम का इस्तेमाल अपनी संपत्ति बढ़ाने में किया। लगभग ₹50 लाख की ठगी की रकम में से करीब ₹25 लाख खर्च कर उन्होंने एक मकान खरीद लिया था।

इसके अलावा ठगी के नेटवर्क को संचालित करने के लिए आरोपियों ने कई मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण भी खरीदे थे। जांच में पता चला कि गिरोह के पास लगभग 10 मोबाइल फोन थे, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग गतिविधियों के लिए किया जाता था।

करीब 100 लोगों को बना चुके थे निशाना

जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों आरोपी अब तक करीब 100 लोगों को निशाना बना चुके थे। वे अलग-अलग राज्यों के लोगों को संदेश भेजकर उन्हें फंसाने की कोशिश करते थे।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। फिलहाल आरोपियों के नेटवर्क, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क काफी संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। अब इस मामले में गिरोह के अन्य सदस्यों और म्यूल खातों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

हमसे जुड़ें

Share This Article