श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मिड-डे मील (MDM) योजना के राशन में कथित हेराफेरी के मामले में राजौरी जिले के मंजाकोट स्थित जोनल एजुकेशन ऑफिस (ZEO) के पूर्व जूनियर असिस्टेंट मोहम्मद फारूक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। ACB ने सोमवार को FIR संख्या 26/2018 से जुड़े मामले में राजौरी की विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत के समक्ष आरोपपत्र पेश किया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की है।
ACB के अनुसार, मामला 28 दिसंबर 2018 को प्रारंभिक सत्यापन के बाद दर्ज किया गया था। जांच का केंद्र 2014-15 की चौथी तिमाही के दौरान मंजाकोट शिक्षा क्षेत्र में MDM योजना के लिए आवंटित चावल की कथित हेराफेरी थी। शुरुआती शिकायत में करीब 200 क्विंटल चावल के दुरुपयोग का आरोप सामने आया था। बाद में रिकॉर्ड की विस्तृत जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कथित गबन की मात्रा इससे अधिक पाई गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मामले में तत्कालीन ZEO मंजाकोट शाह नवाज खान और मोहम्मद फारूक की भूमिका सामने आई। खान की जांच के दौरान मृत्यु हो चुकी है। ACB का आरोप है कि MDM का काम देखने वाले कर्मचारी फारूक ने तत्कालीन ZEO के साथ मिलकर आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर किया और चावल की निकासी से संबंधित फर्जी तथा जाली इंडेंट और अथॉरिटी लेटर तैयार किए।
ACB ने जांच के दौरान सरकारी रिकॉर्ड की जांच के साथ फोरेंसिक राय भी हासिल की। एजेंसी के अनुसार, इन दस्तावेजों और साक्ष्यों की पड़ताल से 256.40 क्विंटल चावल की कथित हेराफेरी स्थापित हुई। इस चावल का मूल्य ₹8,03,557.60 आंका गया है। इसके अलावा MDM के तहत भोजन तैयार करने के लिए निर्धारित ₹4,61,578 की कथित कुकिंग लागत भी गलत तरीके से इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
इस तरह जांच में राज्य के सरकारी खजाने को कुल ₹12,65,135.60 का नुकसान होने का आकलन किया गया है। ACB ने आरोप लगाया है कि योजना के लिए निर्धारित खाद्यान्न और धनराशि को नियमों के विपरीत निकालकर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया गया।
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जांच के दौरान अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों, रिकॉर्ड और चावल की आपूर्ति तथा वितरण से जुड़े कागजात की जांच की। फोरेंसिक राय को भी केस की जांच में शामिल किया गया। ACB का कहना है कि रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से राशन की वास्तविक निकासी और उपयोग के संबंध में गलत तस्वीर तैयार की गई।
मामले में जम्मू-कश्मीर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और तत्कालीन रणबीर दंड संहिता (RPC) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। चार्जशीट में भ्रष्टाचार, सरकारी पद का दुरुपयोग, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने, साक्ष्य नष्ट करने और आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं।
ACB ने मोहम्मद फारूक के खिलाफ जम्मू-कश्मीर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 2006 की धारा 5(1)(c), 5(1)(d) सहपठित धारा 5(2) तथा रणबीर दंड संहिता की धाराओं 465, 468, 471, 201 और 120-B के तहत आरोप लगाए हैं। फारूक वर्तमान में सरकारी सेवा में कार्यरत बताया गया है और उसके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति हासिल करने के बाद चार्जशीट दाखिल की गई।
मामले के दूसरे प्रमुख आरोपी तत्कालीन ZEO शाह नवाज खान की जांच के दौरान मृत्यु हो गई। ACB के अनुसार, उनकी मृत्यु के कारण उनके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जा सकी। इसके बाद वर्तमान में सेवा में मौजूद फारूक के खिलाफ आवश्यक अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर अदालत में आरोपपत्र पेश किया गया।
MDM योजना के तहत स्कूली बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए सरकार चावल और खाना पकाने की लागत के लिए धन उपलब्ध कराती है। ऐसे में राशन की कथित हेराफेरी को लेकर दर्ज यह मामला सरकारी कल्याणकारी योजना के संसाधनों के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाता है। अब अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान चार्जशीट में लगाए गए आरोपों और ACB द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों की न्यायिक जांच होगी।
