जैसलमेर में 92 वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी की 25 बीघा आवंटित नहरी भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने और महज छह दिनों में म्यूटेशन कराने का गंभीर मामला दर्ज हुआ है।

फर्जी दस्तावेज बनाकर पूर्व सैन्य अधिकारी की जमीन हड़पने का आरोप

Team The420
5 Min Read

राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक बेहद संवेदनशील और गंभीर भूमि धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। चीन और पाकिस्तान के खिलाफ तीन ऐतिहासिक युद्ध लड़ चुके 92 वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी कैप्टन चुन्नीलाल की 25 बीघा मूल्यवान नहरी कृषि भूमि को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दिया गया है। पीड़ित परिवार की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने जालसाजी और धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर व्यापक जांच शुरू कर दी है।

पोंग बांध विस्थापन और आवंटित भूमि का इतिहास

पीड़ित सैन्य अधिकारी कैप्टन चुन्नीलाल मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के निवासी हैं। उन्हें दशकों पहले हिमाचल प्रदेश में पोंग बांध परियोजना के कारण हुए विस्थापन के मुआवजे और पुनर्वास नीति के तहत राजस्थान के जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में यह नहरी कृषि भूमि आवंटित की गई थी। देश की सेवा में अपना जीवन बिताने वाले इस बुजुर्ग अधिकारी के लिए यह जमीन उनके जीवन भर की पूंजी और आजीविका का एक मुख्य जरिया रही है।

भौगोलिक दूरी अधिक होने के कारण कैप्टन चुन्नीलाल स्वयं जैसलमेर में नहीं रहते थे और स्थानीय काश्तकारों के माध्यम से इस भूमि पर कृषि कार्य करवाते थे। वर्षों से यह व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी और उन्हें नियमित रूप से अपनी फसल की उपज का हिस्सा मिलता रहता था। हाल ही में भूमि पर काम करने वाले स्थानीय काश्तकार से मिली एक चौंकाने वाली सूचना के बाद पीड़ित परिवार को पता चला कि उनकी इस जमीन का स्वामित्व किसी अन्य व्यक्ति के नाम हस्तांतरित किया जा चुका है।

पहचान दस्तावेजों में हेरफेर और म्यूटेशन की जल्दबाजी

पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, जालसाजों ने इस पूरी धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए कैप्टन चुन्नीलाल के व्यक्तिगत पहचान पत्रों और आवश्यक दस्तावेजों में कथित तौर पर गंभीर हेरफेर किया था। इन फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके आरोपियों ने किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति को कैप्टन चुन्नीलाल के रूप में रजिस्ट्रार कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। इसी सुनियोजित साजिश के तहत बीते 16 जून को संबंधित भूमि की अवैध रजिस्ट्री किसी अन्य खरीदार के नाम पर करवा दी गई।

इस कथित घोटाले का सबसे संदिग्ध पहलू इसकी प्रशासनिक गति रही, जिसने एक बड़े संगठित नेटवर्क की ओर इशारा किया है। भूमि की अवैध रजिस्ट्री होने के मात्र छह दिनों के भीतर, यानी 22 जून को, संबंधित राजस्व कार्यालय में जमीन का म्यूटेशन भी दर्ज कर लिया गया। इस पूरी त्वरित प्रक्रिया की भनक न तो असली भूमि स्वामी को लगी और न ही उनके परिवार को इसकी कोई पूर्व आधिकारिक सूचना प्राप्त हुई, जिससे स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर भी मिलीभगत की आशंका गहरा गई है।

पुलिस की व्यापक जांच और सुरक्षात्मक उपाय

इस धोखाधड़ी की सूचना मिलते ही 92 वर्षीय बुजुर्ग सैन्य अधिकारी अपने परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश से सीधे जैसलमेर पहुंचे और जिला प्रशासन व पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी आपबीती रखी। पुलिस ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जमीन के पंजीकरण से जुड़े सभी दस्तावेजों, हस्ताक्षरों, तस्वीरों और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। जांच दल इस बात का बारीकी से परीक्षण कर रहा है कि पंजीकरण के दौरान सरकारी स्तर पर पहचान सत्यापन के नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

पीड़ित परिवार ने इस घटना के बाद आशंका जताई है कि मोहनगढ़ और सीमावर्ती क्षेत्रों में पोंग बांध विस्थापितों तथा बाहरी राज्यों में रह रहे पूर्व सैनिकों की संपत्तियों को निशाना बनाने वाला कोई सक्रिय गिरोह काम कर रहा है। चूंकि वास्तविक भूमि स्वामी दूरदराज के राज्यों में रहते हैं, इसलिए उन्हें अपने राजस्व रिकॉर्ड में होने वाले अवैध बदलावों की समय पर जानकारी नहीं मिल पाती। जैसलमेर पुलिस ने इस मामले में राजस्व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने की बात कही है और आश्वासन दिया है कि किसी भी दोषी बिचौलिए या अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हमसे जुड़ें

Share This Article