दुर्घटना के पुख्ता सबूत नहीं मिले, देर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट; अदालत ने याचिका खारिज कर पत्नी और ट्रक मालिक पर ₹1 लाख का हर्जाना लगाया

ट्रक हादसे में पैर कटने का दावा पड़ा भारी: ₹20.50 लाख के बीमा क्लेम को कोर्ट ने बताया फर्जी

Team The420
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जयपुर। ट्रक हादसे में पैर कटने का हवाला देकर लाखों रुपये का बीमा क्लेम लेने की कोशिश आखिरकार अदालत में टिक नहीं पाई। जांच और सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों में विरोधाभास सामने आने पर लेबर कोर्ट-1 जयपुर एवं कर्मचारी क्षतिपूर्ति आयुक्त, दौसा ने करीब ₹20.50 लाख के मुआवजे की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी माना कि दावा पर्याप्त साक्ष्यों के बिना किया गया था और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया।

कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए याचिकाकर्ता पक्ष और ट्रक मालिक पर कुल ₹1 लाख का विशेष हर्जाना भी लगाया है। आदेश के अनुसार यह राशि आर्मी वेलफेयर युद्ध हताहत कल्याण फंड में जमा कराई जाएगी।

कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत दायर हुआ था दावा

मामले के अनुसार दौसा के अयोध्या नगर निवासी अजय सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत लेबर कोर्ट में क्लेम याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि वह दौसा में रेलवे स्टेशन के सामने रहने वाले ट्रक मालिक राजेश कुमार के यहां ड्राइवर के रूप में काम करता था।

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सुनवाई के दौरान अजय सिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी पुष्पा कंवर को मामले में पक्षकार बनाया गया और उन्होंने ही आगे मुकदमे की पैरवी जारी रखी।

हादसे में पैर कटने का किया गया था दावा

याचिका में कहा गया था कि 11 दिसंबर 2009 को अजय सिंह ट्रक लेकर सीकर से जयपुर की ओर जा रहा था। रास्ते में ग्राम अणतपुरा मोड़ के पास अचानक नीलगाय सामने आ जाने से उसे बचाने की कोशिश में ट्रक पेड़ से टकरा गया।

दावे के अनुसार इस दुर्घटना में अजय सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इलाज के दौरान उसका बायां पैर घुटने के पास से काटना पड़ा। याचिका में उसकी उम्र करीब 40 वर्ष बताई गई और मासिक आय लगभग ₹9,000 होने का दावा किया गया।

इसी आधार पर ट्रक मालिक और बीमा कंपनी से ₹20 लाख 50 हजार की क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग अदालत से की गई थी।

सुनवाई के दौरान कई तथ्य संदिग्ध पाए गए

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने कई ऐसे तथ्य आए, जिनसे पूरे दावे पर सवाल खड़े हो गए। अदालत ने पाया कि कथित दुर्घटना से जुड़ी रिपोर्ट काफी देर से दर्ज कराई गई थी।

रिकॉर्ड के अनुसार दुर्घटना की सूचना लगभग डेढ़ महीने बाद दर्ज कराई गई, जबकि इस देरी के पीछे कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे अदालत ने पूरे मामले को संदेह की दृष्टि से देखा।

हादसे से जुड़े दस्तावेज भी पेश नहीं किए गए

सुनवाई के दौरान ट्रक को हुए नुकसान से संबंधित कोई दस्तावेज या तकनीकी प्रमाण भी अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। बीमा कंपनी की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित थाने के रोजनामचे में इस तरह की किसी दुर्घटना का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला।

इसके अलावा ट्रक मालिक राजेश कुमार भी अदालत में गवाही के लिए उपस्थित नहीं हुआ। वहीं याचिकाकर्ता पक्ष यह भी प्रमाणित नहीं कर सका कि अजय सिंह वास्तव में संबंधित ट्रक पर ड्राइवर के रूप में कार्यरत था।

इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने माना कि दावा ठोस साक्ष्यों पर आधारित नहीं है और इसमें कई महत्वपूर्ण कमियां हैं। इसलिए अदालत ने क्लेम याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया।

आर्मी वेलफेयर फंड में जमा होगा हर्जाना

अदालत ने मामले में ₹1 लाख का विशेष हर्जाना भी लगाया है। आदेश के अनुसार इस राशि में से ₹50-50 हजार अजय सिंह की पत्नी पुष्पा कंवर और ट्रक मालिक राजेश कुमार को जमा कराने होंगे।

अदालत ने निर्देश दिया है कि यह राशि 6 अप्रैल 2026 तक आर्मी वेलफेयर युद्ध हताहत कल्याण फंड में जमा कराई जाए। निर्धारित समय के भीतर राशि जमा नहीं होने की स्थिति में इसे राजस्व बकाया की तरह वसूल किया जाएगा।

अदालत के इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के मामलों में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जहां बिना पर्याप्त साक्ष्य के बड़े मुआवजे के दावे अदालतों में प्रस्तुत किए जाते हैं।

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