कंप्यूटर में मालवेयर, कंपनियों का संवेदनशील डेटा निशाने पर; इजरायल में बड़ी साइबर गिरफ्तारी

Roopa
By Roopa
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यरुशलम: इजरायली पुलिस ने अशकेलॉन निवासी 40 वर्षीय एक व्यक्ति को दर्जनों कंपनियों के कंप्यूटर सिस्टम में कथित तौर पर सेंध लगाने, मालवेयर स्थापित करने और संवेदनशील जानकारी जुटाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के कंप्यूटर सिस्टम कथित साइबर हमलों का निशाना बने थे। हालांकि, जांच अभी शुरुआती चरण में है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वास्तव में कितना और किस प्रकार का डेटा कथित तौर पर एक्सेस या चोरी किया गया।

संदिग्ध को Lahav 433 की Cyber Unit के जांचकर्ताओं ने महीनों चली गुप्त जांच के बाद गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, जांच उस समय शुरू हुई जब कुछ कंपनियों के कंप्यूटर सिस्टम में सेंधमारी और जानकारी चोरी होने के संकेत मिले। शिकायत मिलने के बाद जांचकर्ताओं ने मामले की तकनीकी पड़ताल शुरू की और धीरे-धीरे ऐसे अन्य संस्थानों की पहचान की, जिनके सिस्टम कथित तौर पर इसी गतिविधि से जुड़े पाए गए।

जांच आगे बढ़ने के साथ साइबर अधिकारियों ने अलग-अलग घटनाओं से मिले डिजिटल साक्ष्यों को आपस में जोड़ना शुरू किया। पुलिस के अनुसार, जांचकर्ताओं ने जटिल विश्लेषणात्मक प्रक्रिया के जरिए संदिग्ध की पहचान की। अलग-अलग कंपनियों से प्राप्त जानकारी, कंप्यूटर गतिविधियों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का मिलान करते हुए जांच टीम धीरे-धीरे उस व्यक्ति तक पहुंची, जिस पर कथित हमलों के पीछे होने का संदेह था।

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध ने कथित तौर पर अकेले काम किया और उसका किसी संगठित आपराधिक समूह से संबंध सामने नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार, उसका पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं था। हालांकि, जांचकर्ता अभी यह पता नहीं लगा पाए हैं कि उसने कथित तौर पर कंपनियों के सिस्टम को निशाना क्यों बनाया और वहां से हासिल की गई जानकारी का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के समय तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला था कि संदिग्ध ने कथित तौर पर चोरी की गई जानकारी का इस्तेमाल कंपनियों को ब्लैकमेल करने के लिए किया हो। यही वजह है कि जांच में अब उसके कथित साइबर अभियान के पीछे के मकसद पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या डेटा केवल एकत्र किया गया था या उसका इस्तेमाल किसी अन्य गतिविधि के लिए भी किया गया।

जांच के दौरान प्रभावित कंपनियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गई। अधिकारियों ने अलग-अलग घटनाओं से मिले साक्ष्यों को एक साथ रखकर कथित हमलों के बीच संबंध तलाशे। इस प्रक्रिया में कई कंपनियों के कंप्यूटर सिस्टम कथित तौर पर compromised पाए गए। पुलिस का मानना है कि इन्हीं घटनाओं से जुड़े डिजिटल संकेतों ने संदिग्ध तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने संदिग्ध के घर की तलाशी ली और कंप्यूटर उपकरण तथा अन्य डिजिटल सामग्री जब्त की। जांचकर्ताओं ने मामले से जुड़ी कई अन्य कंपनियों में भी तलाशी अभियान चलाया। जब्त किए गए उपकरणों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित तौर पर किस प्रकार का मालवेयर इस्तेमाल किया गया, किन सिस्टम तक पहुंच बनाई गई और कौन-सी जानकारी कथित तौर पर हासिल की गई।

मामले की जांच Israel State Attorney’s Office के Cyber Department के साथ मिलकर की जा रही है। पुलिस ने संदिग्ध पर Israel’s Computer Law के तहत अपराधों के अलावा कथित wiretapping, privacy में हस्तक्षेप, धोखाधड़ी के जरिए जानकारी या अन्य चीज हासिल करने और अन्य संबंधित अपराधों के आरोप लगाए हैं।

गिरफ्तारी के बाद संदिग्ध को Rishon LeZion Magistrate’s Court में हिरासत संबंधी सुनवाई के लिए पेश किया गया। अदालत ने उसे छह दिन और हिरासत में रखने का आदेश दिया है। आरोपी के वकील के अनुरोध पर अदालत ने उसकी पहचान सार्वजनिक करने पर रोक लगाने वाला आदेश भी जारी किया है। इसलिए फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियों की ओर से उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।

जांच एजेंसियां अब जब्त किए गए कंप्यूटर उपकरणों, डिजिटल फाइलों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने कथित तौर पर निशाना बनाई गई कंपनियों के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि कथित तौर पर कितना डेटा प्रभावित हुआ और क्या किसी संवेदनशील कॉरपोरेट या व्यक्तिगत जानकारी को प्रभावित सिस्टम से बाहर भेजा गया।

मामला ऐसे साइबर हमलों के जोखिम को भी सामने लाता है, जिनमें मालवेयर के जरिए किसी सिस्टम तक पहुंच बनाकर लंबे समय तक गतिविधियों को छिपाया जा सकता है। इस मामले में जांचकर्ताओं द्वारा अलग-अलग कंपनियों से मिले डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर संदिग्ध तक पहुंचना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

फिलहाल संदिग्ध के खिलाफ लगाए गए साइबर अपराधों के आरोप जांच का विषय हैं। पुलिस की कार्रवाई और जब्त डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। संदिग्ध की आपराधिक जिम्मेदारी और दोष का अंतिम निर्धारण अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगा।

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