आईएसआई द्वारा हाईवे किनारे ढाबों, रेस्टोरेंट और दुकानों के जरिए सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने की आशंका के बाद एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। लश्कर मॉड्यूल की जांच NIA ने संभाली और कई राज्यों में निगरानी बढ़ाई गई।

हाईवे ढाबों से जासूसी की साजिश: आईएसआई का नया प्लान बेनकाब, चुनाव से पहले अलर्ट मोड में एजेंसियां

Team The420
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देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नया और चिंताजनक इनपुट आया है, जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा भारत में जासूसी के लिए नए तौर-तरीकों को अपनाने की आशंका जताई गई है। हाईवे किनारे ढाबों, रेस्टोरेंट और छोटी दुकानों के जरिए सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने की साजिश की जानकारी सामने आने के बाद कई राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसी बीच, अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपने हाथ में ले ली है।

जम्मू-कश्मीर में लश्कर मॉड्यूल पर कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, सात अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में एक बड़े आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पांच आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना गया। अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने केस अपने हाथ में ले लिया है। एजेंसी ने गिरफ्तार किए गए दो पाकिस्तानी नागरिकों समेत पांचों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सुराग सामने आ सकते हैं।

जांच एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार, यह मॉड्यूल केवल सीमित गतिविधियों तक ही नहीं था, बल्कि इसका विस्तार कई राज्यों तक फैला हुआ था। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि यह नेटवर्क युवाओं को बरगलाकर उन्हें स्लीपर सेल का हिस्सा बना रहा था। इसके जरिए भविष्य में बड़े हमलों को अंजाम देने की योजना बनाई जा रही थी।

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यूपी चुनाव-2027 से पहले सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

इसी क्रम में उत्तर प्रदेश से भी एक अहम इनपुट सामने आया है। खुफिया एजेंसियों और एटीएस को जानकारी मिली है कि वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए आतंकी संगठन सक्रिय हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव से पहले अशांति फैलाने के उद्देश्य से कई घटनाओं की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए कश्मीर से लेकर दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्लीपर सेल को सक्रिय किया जा रहा है।

सबसे चौंकाने वाला पहलू बिहार से सामने आया है, जहां पुलिस मुख्यालय ने 24 अप्रैल को एक अलर्ट जारी कर सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। खुफिया इनपुट के मुताबिक, आईएसआई भारत के हाईवे नेटवर्क पर स्थायी बेस बनाने की कोशिश में है। इसके लिए वे ऐसी जगहों को चिन्हित कर रहे हैं, जो सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास स्थित हैं।

ढाबों और दुकानों को कवर बनाने की आशंका

सूत्रों का कहना है कि इस योजना के तहत ढाबों, रेस्टोरेंट, मोबाइल रिपेयरिंग की दुकानों और जनसेवा केंद्रों के रूप में कवर तैयार किया जा सकता है। इन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की आशंका है, जिनके जरिए सेना की आवाजाही और गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। इसके अलावा, लाइव लोकेशन और अन्य संवेदनशील जानकारी जुटाने की भी कोशिश की जा सकती है।

हालांकि, क्षेत्रीय स्तर पर अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी ठोस गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां स्थानीय स्तर पर भी जागरूकता बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं।

डिजिटल निगरानी से बढ़ा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि जासूसी के लिए इस तरह के सिविल कवर का इस्तेमाल कोई नई रणनीति नहीं है, लेकिन डिजिटल तकनीक और निगरानी उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल ने इसे और खतरनाक बना दिया है। छोटे व्यवसायों के जरिए संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ करना और लंबे समय तक बिना शक के गतिविधियां संचालित करना इस तरह के नेटवर्क की खासियत होती है।

कुल मिलाकर, देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आ रहे इन इनपुट्स ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया है। जांच एजेंसियां अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर एक व्यापक तस्वीर तैयार करने में जुटी हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके।

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