भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA) ने Gensol Engineering Ltd और उसकी सहायक कंपनी Gensol EV Lease Ltd के ऋण खातों को धोखाधड़ी (Fraud) की श्रेणी में डाल दिया है। इसके साथ ही इस वित्तीय गड़बड़ी की पूरी रिपोर्ट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सौंप दी गई है। इस बड़ी नियामकीय कार्रवाई के बाद दोनों कंपनियों पर ₹672 करोड़ से अधिक के फंड के गबन और जालसाजी के गंभीर आरोप लगे हैं।
₹672 करोड़ से अधिक के बकाया ऋण खातों पर गंभीर आरोप
IREDA द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन दोनों कंपनियों के खातों को RBI के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए जारी फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट नियमों के तहत धोखाधड़ी घोषित किया गया है। वित्तीय लेखा-जोखा के अनुसार, मुख्य कंपनी Gensol Engineering के ऋण खाते पर ₹453.77 करोड़ का बकाया है, जबकि इसकी सहायक कंपनी Gensol EV Lease Ltd के खाते पर ₹218.97 करोड़ की राशि लंबित है।
इन कंपनियों पर बैंक फंड के गबन, आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी के उद्देश्य से फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार करने जैसे संगीन आरोप लगे हैं। वित्तीय नुकसान को कम करने के लिए वित्तीय मानकों के तहत आवश्यक कार्रवाई करते हुए 31 मार्च 2026 तक इन दोनों ऋण खातों के कुल बकाया का लगभग 85 प्रतिशत प्रावधान (Provisioning) पहले ही पूरा किया जा चुका है।
सेबी की जांच और कंपनी प्रमोटरों पर कड़ा प्रतिबंध
यह मामला पिछले साल से चल रही एक बड़ी कॉर्पोरेट जांच का हिस्सा है। अप्रैल 2025 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें कंपनी के धन के कथित दुरुपयोग और ऋणदाताओं को फर्जी दस्तावेज देने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसी कार्रवाई के तहत नियामक ने कंपनी के प्रमोटरों अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी को बाजार में भाग लेने और किसी भी प्रबंधकीय पद को संभालने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था।
जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भुगतान में देरी होने पर मार्च 2025 में ही इसकी रेटिंग को डाउनग्रेड कर डिफॉल्ट श्रेणी में डाल दिया था। सेबी को ऐसे शुरुआती सबूत भी मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि ऋणदाताओं के सामने साख साबित करने के लिए IREDA और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) के नाम से जो कंडक्ट लेटर दिखाए गए थे, वे पूरी तरह फर्जी और जाली थे।
ऋण वसूली के लिए दिवाला और कानूनी कार्यवाही की शुरुआत
फंड की रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए IREDA ने अब केवल खातों को फ्रॉड घोषित करने तक ही सीमित न रहकर कड़े कानूनी कदम उठाए हैं। एजेंसी ने बकाया राशि की शत-प्रतिशत वसूली के लिए डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) का दरवाजा खटखटाया है। इसके साथ ही Gensol Engineering के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) में दिवाला एवं शोधन अक्षमता (Insolvency) की कार्यवाही भी आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी गई है।
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, कॉर्पोरेट ऋण धोखाधड़ी के मामलों में फर्जी वित्तीय दस्तावेज और लोन राशि का डायवर्जन सबसे आम तरीके बन चुके हैं। ऐसे बड़े घोटालों को रोकने के लिए देश के सभी वित्तीय संस्थानों को ऋण देने के बाद भी लगातार फॉरेंसिक ऑडिट, डिजिटल प्रमाणीकरण और स्वतंत्र दस्तावेज सत्यापन जैसे कड़े सुरक्षा चक्र अपनाने चाहिए ताकि बैंकिंग प्रणाली को सुरक्षित रखा जा सके।
