डिजिटल फोरेंसिक जांच में iPhone और क्षतिग्रस्त MacBook से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने ब्रिटेन में कथित प्रॉपर्टी निवेश धोखाधड़ी का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच में फर्जी अनुबंध, डिजिटल संदेश, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक आर्थिक अपराधों की जांच में डिजिटल फोरेंसिक अब निर्णायक भूमिका निभा रही है।
नई दिल्ली/लंदन: ब्रिटेन में कथित प्रॉपर्टी निवेश धोखाधड़ी के एक चर्चित मामले में iPhone और क्षतिग्रस्त MacBook की डिजिटल फोरेंसिक जांच ने जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध कराए, जिसके आधार पर आरोपी जेसन कनिंघम को अदालत ने दोषी ठहराया। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने कथित रूप से मकान मालिकों और निवेशकों को फर्जी अनुबंधों तथा झूठे व्यावसायिक दावों के जरिए £113,000 (करीब ₹1.3 करोड़) से अधिक की धोखाधड़ी का शिकार बनाया। हालांकि मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायालय द्वारा दिए जा चुके हैं और आगे की वित्तीय जांच अभी भी जारी है।
जांच के अनुसार, जेसन कनिंघम तथाकथित “रेंट-टू-रेंट” मॉडल के तहत कई कंपनियां संचालित करता था। यह मॉडल सामान्य परिस्थितियों में वैध व्यावसायिक व्यवस्था माना जाता है, जिसमें किसी संपत्ति को लीज पर लेकर आगे किराये पर दिया जाता है। लेकिन अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी ने इसी मॉडल का इस्तेमाल लोगों का विश्वास जीतने और कथित वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए किया। जांच में यह भी सामने आया कि वह स्वयं को अत्यंत सफल कारोबारी के रूप में प्रस्तुत करता था और महंगी कारों, निजी जेट तथा विदेशी यात्राओं के माध्यम से अपनी कथित समृद्ध छवि प्रदर्शित करता था।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ताओं ने उसके कब्जे से बरामद एक iPhone और क्षतिग्रस्त MacBook की डिजिटल फोरेंसिक जांच कराई। MacBook की स्क्रीन और कीबोर्ड काम नहीं कर रहे थे, इसलिए विशेषज्ञों ने बाहरी मॉनिटर, कीबोर्ड और डॉकिन्ग स्टेशन की सहायता से सिस्टम तक पहुंच बनाई। इसके बाद डिवाइस का पूर्ण डिजिटल बैकअप तैयार किया गया और विशेष फोरेंसिक सॉफ्टवेयर के माध्यम से उसका विश्लेषण किया गया। iPhone का भी सुरक्षित बैकअप लेकर दोनों उपकरणों के डिजिटल डेटा का संयुक्त विश्लेषण किया गया।
फोरेंसिक विशेषज्ञों ने WhatsApp, iMessage, SMS, ईमेल, दस्तावेजों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया। जांच के दौरान प्राप्त संदेशों, कथित अनुबंधों और दस्तावेजों की समय-रेखा की तुलना बैंक रिकॉर्ड तथा गवाहों के बयानों से की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार डिजिटल साक्ष्यों से कथित व्यावसायिक गतिविधियों और प्रस्तुत दस्तावेजों के बीच कई महत्वपूर्ण विसंगतियां सामने आईं। अभियोजन पक्ष का दावा था कि उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य किसी वास्तविक और वैध व्यावसायिक संचालन का समर्थन नहीं करते थे।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को सफल व्यवसायी बताते हुए धोखाधड़ी के आरोपों से इनकार किया। हालांकि अभियोजन के अनुसार डिजिटल फोरेंसिक जांच और वित्तीय विश्लेषण से यह संकेत मिले कि आलीशान जीवनशैली, महंगी गाड़ियों, पांच सितारा होटलों और निजी विमान यात्राओं का खर्च कथित रूप से वैध कारोबारी आय के बजाय संदिग्ध धनराशि से पूरा किया जा रहा था। जांच एजेंसियों ने अब तक £100,000 (करीब ₹1.15 करोड़) से अधिक की राशि विभिन्न बैंक खातों से बरामद करने की भी जानकारी दी है, जबकि अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान संबंधी जांच आगे भी जारी है।
नौ सप्ताह तक चली सुनवाई के दौरान अदालत में डिजिटल दस्तावेज, चैट रिकॉर्ड, फोटोग्राफ, वित्तीय विश्लेषण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। 30 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद अदालत ने आरोपी को फर्जी व्यापार संचालन और जाली दस्तावेजों के उपयोग से जुड़े कई आरोपों में दोषी करार दिया।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आधुनिक आर्थिक अपराधों में डिजिटल फोरेंसिक जांच अब केवल सहायक उपकरण नहीं बल्कि सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य स्रोत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, लैपटॉप, क्लाउड डेटा, चैट रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल और डिजिटल दस्तावेजों का वैज्ञानिक विश्लेषण वित्तीय धोखाधड़ी की पूरी श्रृंखला को उजागर करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। उनके अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित फोरेंसिक तकनीकों के उपयोग से विशाल डिजिटल डेटा का तेजी से विश्लेषण कर संदिग्ध लेनदेन, फर्जी दस्तावेजों और आपराधिक नेटवर्क के बीच संबंधों की पहचान पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है।
