इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नाम पर पंजीकृत फार्महाउस में चल रहे कथित जुए के अड्डे का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक और पुलिस हलकों में हलचल मच गई है। बुधवार रात की गई छापेमारी के दौरान वहां से 18 लोगों को जुआ खेलते हुए गिरफ्तार किया गया, जबकि पांच अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने लाखों रुपये नकद, दर्जनों मोबाइल फोन, ताश की गड्डियां और दो कारें भी बरामद की हैं।
जांच के मुताबिक यह फार्महाउस पूर्व शहडोल कलेक्टर और वर्तमान में मध्य प्रदेश फाइनेंस डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की प्रबंध निदेशक वंदना वैद्य और उनके पति अंबरीश वैद्य के नाम पर पंजीकृत बताया गया है। हालांकि वैद्य ने इस पूरे मामले से खुद को अलग बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस की टीम देर रात फार्महाउस पहुंची। मुख्य गेट बाहर से बंद मिला, लेकिन परिसर के भीतर लोगों के होने की आवाजें सुनाई दीं। इसके बाद पुलिस पीछे के रास्ते से अंदर दाखिल हुई और बरामदे में ताश के पत्तों के साथ जुआ खेल रहे लोगों को घेर लिया।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
अचानक हुई इस कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग भागने में सफल रहे, जबकि 18 लोगों को मौके पर ही पकड़ लिया गया। फरार होने वालों में जगदीश राठौड़ उर्फ ‘अंकल’ उर्फ ‘कुबड़ा’, गोपाल, पप्पू, आशीष जैन और फार्महाउस का केयरटेकर रंजीत चौधरी शामिल बताए गए हैं। पुलिस की टीमें इनकी तलाश में जुटी हैं।
छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से ₹13.67 लाख नकद, ताश की गड्डियां, 30 मोबाइल फोन और दो कारें मिलीं। बरामद नकदी और अन्य सामान की कुल कीमत लगभग ₹28.67 लाख आंकी गई है। पुलिस ने सभी बरामद वस्तुओं को जब्त कर लिया है और आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फरार आरोपी जगदीश राठौड़ इस पूरे जुए के रैकेट का मुख्य संचालक हो सकता है। वहीं केयरटेकर रंजीत चौधरी पर आरोप है कि उसने फार्महाउस परिसर को जुआ खेलने के लिए उपलब्ध कराया और इसके बदले पैसे लेता था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या यहां नियमित रूप से जुए की महफिलें सजती थीं और क्या इसमें किसी बड़े सट्टा नेटवर्क का भी हाथ है।
मौके से बरामद मोबाइल फोन जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बन सकते हैं। इन फोन में मौजूद कॉल डिटेल, मैसेज और डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह जुआ अड्डा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित था या किसी बड़े संगठित नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।
पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।
इस बीच आईएएस अधिकारी वंदना वैद्य ने कहा है कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। उनके मुताबिक यह फार्महाउस उनकी निजी संपत्ति है, जिसकी देखभाल एक केयरटेकर करता है। उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए लोगों से उनका कोई संबंध नहीं है और न ही उन्हें इस गतिविधि की कोई जानकारी थी।
उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि संपत्ति का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना किया गया हो या परिसर में अवैध रूप से प्रवेश किया गया हो। इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासनिक हलकों में भी इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े स्तर पर जुए का संचालन कैसे हो रहा था और इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिल सकी। पुलिस का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की जाएगी।
